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Year Ender 2025: क्या होता है Year Ender और साल के आखिर में क्यों बनती है इसकी लिस्ट? जानें इसका मतलब

आसान शब्दों में समझे तो ईयर एंडर का मतलब साल भर का छोटा-सा हिसाब-किताब होता है. इसमें देखा जाता है कि साल भर क्या देखा, क्या सुना, क्या ट्रेंड में रहा और क्या यादगार बना?

आपने भी नोटिस किया होगा कि जब साल खत्म होने को होता है तो अचानक हर तरफ बस ईयर एंडर ही दिखाई देने लग जाता है. कहीं गूगल बताता है की सबसे ज्यादा क्या सर्च हुआ है तो कहीं स्पॉटिफाई आपके सालभर के गाने की लिस्ट तैयार कर देता है. वहीं कई बार तो सोशल मीडिया पर  मीम्स और ट्रेंड्स की लिस्ट चल रही होती है. साल के आखिर में ऐसा लगता है जैसे पूरा साल एक बार फिर रिवाइंड हो रहा हो. लेकिन क्या आपने सोचा है कि ये ईयर एंडर होता क्या है और साल के आखिर में ही Year Ender लिस्ट क्यों बनती है. चलिए तो आज हम आपको  बताते हैं कि ईयर एंडर क्या होता है और साल के आखिर में ही Year Ender लिस्ट क्यों बनती है.

क्या होता है ईयर एंडर, कहां से शुरू हुआ इसका ट्रेंड?

दरअसल ईयर एंडर  कोई नई चीज नहीं है. इसका कॉन्सेप्ट हजारों साल पुराना है. इतिहास के अनुसार करीब 3000 BCE में मिस्र और बेबीलोन जैसी सभ्यताओं में साल भर की बड़ी घटनाओं, मौसम और खगोलीय बदलावों का रिकॉर्ड रखा जाता था. जिसका मकसद साल भर में क्या खास हुआ उसे दर्ज करना होता है.  रोमन और ग्रीक सभ्यताओं में भी साल के हिसाब से घटनाएं लिखी जाती थी. इसका मतलब है कि आज जो हम ईयर एंडर की डिजिटल लिस्ट देखते हैं उसकी जड़ें बहुत पुरानी है. वहीं अगर आसान शब्दों में समझे तो ईयर एंडर का मतलब साल भर का छोटा सा हिसाब-किताब होता है. इसमें देखा जाता है कि साल भर क्या देखा, क्या सुना, क्या ट्रेंड में रहा और क्या यादगार बना. यही वजह होती है कि साल के आखिर में ये लिस्ट हर बार चर्चा में आ ही जाती है. 

1500 से 1900 के बीच ईयर एंडर ने लिया था नया रूप 

1500 से 1900 के बीच ईयर एंडर के ट्रेंड ने नया रूप लिया था. पहले के समय में पंचांगों में सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि मौसम, ग्रहों की चाल और साल भर की अहम बातें भी दर्ज की जाती थी. वहीं इसी दौर में अखबारों ने भी साल के आखिर में बड़ी घटनाओं की समरी छापना शुरू कर दिया था. वहीं आज के डिजिटल दौर के ईयर एंडर को भी उसी सोच का नया वर्जन माना जाता है. वहीं 1900 में ईयर एंडर पॉपुलर होने के बाद 1929 में टाइम मैगजीन ने Year in Review शुरू किया. वहीं 1950 से 80 के दशक में रेडियो और टीवी पर साल के अंत में स्पेशल शो आने लगे, जिनमें पूरे साल का रिव्यू दिखाया जाता था. इसके अलावा 2010 के बाद फेसबुक, इंस्टाग्राम और X जैसे प्लेटफॉर्म्स ने सालभर के ट्रेंड्स और मोमेंट्स दिखाने शुरू किए. वहीं अब यूट्यूब और स्पॉटिफाई ने इसे और पर्सनल बना दिया और आपने साल भर क्या सुना और देखा इसकी लिस्ट बनाने लगे. 

ईयर एंडर को क्यों इतना पसंद करने लगे लोग?

ईयर एंडर की पॉपुलैरिटी बढ़ने के साथ ही साल के आखिर में इसे खूब पसंद किया जाने लगा है. इसे पसंद किए जाने के पीछे एक तो नॉस्टैल्जिया बताया जाता है जिसमें बीते साल की यादों को दोबारा देखना लोगों को अच्छा लगता है. वहीं दूसरी बढ़ी वजह यह है कि ईयर एंडर बताता है कि पूरे साल क्या ट्रेंड में रहा. इसके अलावा साल खत्म होने के साथ एक प्रकार से लोगों को क्लोजर मिल जाने से भी लोग ईयर एंडर को पसंद करते हैं. 

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कविता एबीपी नेटवर्क नोएडा के साथ बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही है. वर्तमान में कविता का मुख्य फोकस शिक्षा, करियर और नौकरी से जुड़ी खबरों पर रहता है.

करीब 3.5 साल से पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी कव‍िता एबीपी नेटवर्क से पहले राजस्थान पत्रिका में काम कर चुकी है. यहां  उन्होंने नेशनल एडिशन और अलग-अलग सप्लीमेंट्स के लिए काम किया. राजस्थान पत्रिका में करियर की उड़ान और सी न्यूज जैसे कॉलम वह कवर करती थी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो के साथ काम करने का अवसर मिला, जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन की बारीकियों को समझने का अनुभव दिया. वहीं पत्रकारिता के अलावा कविता की खास रुचि खेल, विशेष रूप से क्रिकेट में है. राजस्थान पत्रिका में रहते हुए कविता ने मदर्स डे स्पेशल स्पोर्ट्स एडिशन में भी काम किया है.

पढ़ाई की बात करें तो कविता ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की.

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