SAARC Summit: 2016 के बाद क्यों नहीं हुआ सार्क का एक भी सम्मेलन, भारत क्यों है इसकी वजह?
SAARC Summit: 2016 में उरी आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में होने वाले सार्क सम्मेलन का बहिष्कार किया, तब से आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का रुख नहीं बदला, सम्मेलन अब तक नहीं हो पाया.

SAARC Summit:दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन यानी सार्क, जिसकी स्थापना क्षेत्रीय सहयोग और आपसी विकास के मकसद से हुई थी, पिछले करीब एक दशक से लगभग निष्क्रिय पड़ा है. आखिरी बार सार्क शिखर सम्मेलन 2014 में काठमांडू में हुआ था, और उसके बाद से आज तक एक भी सम्मेलन आयोजित नहीं हो पाया है. इसकी सबसे बड़ी वजह भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ती तल्खी को माना जाता है.
उरी हमले ने बदल दी पूरी तस्वीर
साल 2016 में 19वां सार्क सम्मेलन पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होना तय था. लेकिन इससे ठीक पहले सितंबर 2016 में जम्मू-कश्मीर के उरी में भारतीय सेना के कैंप पर आतंकी हमला हुआ, जिसमें कई जवान शहीद हो गए. भारत ने इस हमले के पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों का हाथ बताते हुए साफ कहा कि मौजूदा हालात में सम्मेलन में शामिल होना संभव नहीं है, और सम्मेलन का बहिष्कार कर दिया.
अकेले भारत नहीं, कई और देशों ने भी किया किनारा
भारत के इस फैसले के बाद बांग्लादेश, अफगानिस्तान और भूटान ने भी पाकिस्तान में सीमा पार आतंकवाद का हवाला देते हुए सम्मेलन में शामिल होने से इनकार कर दिया. इतने सदस्य देशों के हटने के बाद पाकिस्तान के लिए सम्मेलन कराना संभव नहीं रह गया, और इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा.
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भारत का रुख आज भी नहीं बदला
इसके बाद से पाकिस्तान कई मौकों पर सम्मेलन दोबारा शुरू करने की कोशिश करता रहा है. विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने तो यहां तक प्रस्ताव रखा था कि सम्मेलन इस्लामाबाद में हो और भारतीय नेता चाहें तो वर्चुअली भी शामिल हो सकते हैं. लेकिन भारत के विदेश मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए साफ कहा कि 2014 के सम्मेलन के बाद से हालात में कोई बुनियादी बदलाव नहीं आया है, इसलिए सम्मेलन के लिए जरूरी सहमति अभी भी नहीं बन पाई है.
आतंकवाद ही रहा है भारत का मुख्य ऐतराज
भारत का लगातार यही रुख रहा है कि जब तक पाकिस्तान अपनी जमीन से चल रहे आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक क्षेत्रीय सहयोग की बातचीत आगे बढ़ाना मुमकिन नहीं है. यही वजह है कि भारत ने सार्क के बजाय बिम्सटेक जैसे संगठन को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया, जिसमें पाकिस्तान शामिल नहीं है.
सार्क पर लगातार बना हुआ है ग्रहण
कई देशों, जैसे नेपाल और अफगानिस्तान के पूर्व नेतृत्व, ने समय-समय पर सार्क को फिर से सक्रिय करने की अपील की है, लेकिन भारत-पाकिस्तान के बीच गहरे होते अविश्वास के चलते अब तक कोई ठोस पहल सफल नहीं हो पाई. यही वजह है कि 2014 के बाद से सार्क का कोई भी शिखर सम्मेलन आयोजित नहीं हो सका है.
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