दिल्ली में 50% पासपोर्ट कैंसिल, जानें किस राज्य में सबसे बुरा हाल?
दिल्ली में 21 लाख में से 10.8 लाख पासपोर्ट रद्द हुए. चलिए जानें कि इसकी वजह क्या थी और कौन सा राज्य पासपोर्ट रद्द करने में लिस्ट में टॉप पर बना है.

विदेश जाने की इच्छा रखने वाले भारतीय नागरिकों के लिए पासपोर्ट सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पहचान का प्रतीक है. लेकिन हाल ही में विदेश मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों ने एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है. देश की राजधानी दिल्ली में जहां हर दो नए पासपोर्ट जारी होने पर एक पासपोर्ट रद्द हो रहा है, तो वहीं विदेश जाकर घूमने या बसने और भारतीय पासपोर्ट सरेंडर करने के मामले में देश का एक राज्य सबसे आगा निकल गया है. आइए जानें कि दिल्ली में इतने पासपोर्ट क्यों रद्द हो रहे हैं और किस राज्य में यह दर आखिर सबसे ज्यादा बनी हुई है.
दिल्ली में पासपोर्ट जारी और रद्द करने के आंकड़े
विदेश राज्य मंत्री की ओर से संसद में दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, साल 2023 से 2025 के दौरान दिल्ली क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय के अंतर्गत कुल 21 लाख नए पासपोर्ट जारी किए गए हैं. हालांकि, इसी टाइम के दौरान 10.8 लाख पासपोर्ट कैंसिल भी किए गए, जो जारी हुए कुल पासपोर्टों का लगभग आधा यानी 50 प्रतिशत है. साल 2023 में 7.2 लाख नए पासपोर्ट बने और 3.6 लाख रद्द हुए. इसके बाद 2024 में 6.9 लाख बने और 3.6 लाख कैंसिल हुए, जबकि 2025 में 7 लाख जारी होने पर 3.7 लाख पासपोर्ट रद्द किए गए.
कैसा है दिल्ली का पासपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर?
राजधानी दिल्ली में आवेदकों की सुविधा के लिए एक बड़ा पासपोर्ट नेटवर्क काम कर रहा है. दिल्ली शहर के अंदर तीन मुख्य पासपोर्ट सेवा केंद्र और 5 डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र संचालित हो रहे हैं. इसके अलावा दिल्ली क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय के अधिकार क्षेत्र के तहत पड़ोसी राज्य हरियाणा में भी 1 पासपोर्ट सेवा केंद्र और 4 डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र सेवाएं दे रहे हैं. सरकार ने 2018 में 'कहीं से भी आवेदन करें' सुविधा और पासपोर्ट सेवा मोबाइल ऐप लॉन्च करके प्रक्रिया को पहले की तुलना में बेहद सुलभ और आसान बना दिया है.
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पासपोर्ट रद्द होने के प्रमुख कारण
अक्सर लोग पासपोर्ट रद्द होने का मतलब धोखधड़ी या उसे जब्त करना समझ लेते हैं, लेकिन इसके पीछे कई सारी व्यावहारिक प्रक्रियाएं शामिल की गई हैं. सबसे बड़ा और मुख्य कारण पासपोर्ट का री-इश्यू होना होता है, जो रीन्यूअल कराने, व्यक्तिगत विवरण बदलने या पासपोर्ट के पन्ने खत्म होने पर किया जाता है. रीन्यूअल होते ही पुराना पासपोर्ट आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया जाता है या आवेदक को वापस लौटा दिया जाता है. इसके अलावा फर्जीवाड़े करने, आपराधिक मामलों में संलिप्तता, धोखाधड़ी या फिर राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे को देखते हुए कानूनी प्रावधानों के तहत भी पासपोर्ट रद्द या जब्त किए जाते हैं.
पासपोर्ट सरेंडर में कौन सा राज्य टॉप पर?
विदेशी नागरिकता अपनाने और भारतीय पासपोर्ट सरेंडर करने के मामले में गोवा राज्य देश में पहले स्थान पर बना है. विदेश मंत्रालय के आंकड़ों की मानें तो देशभर के क्षेत्रीय कार्यालयों में जमा हुए कुल सरेंडर पासपोर्ट में अकेले गोवा की हिस्सेदारी करीब 40.45% है. इसके बाद पंजाब लगभग 13.79% के साथ दूसरे और गुजरात तीसरे स्थान पर है. गोवा के निवासियों में पुर्तगाली नागरिकता लेने का चलन अधिक है, जबकि पंजाब और गुजरात के लोग अमेरिका, कनाडा और यूके जैसे देशों में बसने के कारण भारतीय नागरिकता छोड़ रहे हैं.
भारत में कितने लोगों के पास पासपोर्ट?
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयानों की मानें तो इतनी बड़ी आबादी होने के बाद भी भारत में वर्तमान समय में 8% से भी कम नागरिकों के पास पासपोर्ट उपलब्ध है. पासपोर्ट अधिनियम 1967 के तहत भारत सरकार नागरिकों की विदेश यात्रा को नियंत्रित करने के लिए यह दस्तावेज जारी करती है. भारत जैसे विकासशील देश में पासपोर्ट धारकों की यह कम संख्या इस बात को दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा अभी भी देश के एक सीमित वर्ग तक ही पहुंच पाई है, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में आवेदन करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है.

वैश्विक पासपोर्ट रैंकिंग में भारत का कितना नंबर?
वैश्विक स्तर पर किसी भी देश के पासपोर्ट की ताकत इस बात से मापी जाती है कि उसके नागरिकों को कितने देशों में बिना वीजा के जाने की छूट मिलती है. हेनले पासपोर्ट इंडेक्स की 2026 की लेटेस्ट रिपोर्ट में भारतीय पासपोर्ट की स्थिति में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. लिस्ट में भारतीय पासपोर्ट अब खिसककर 81वें स्थान पर पहुंच गया है, जबकि साल की शुरुआत में यह 75वें स्थान पर था. वर्तमान में भारतीय पासपोर्ट धारकों को दुनिया के केवल 55 देशों में वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा मिलती है.
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