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Ghost Town: इस शहर में नहीं है लोगों का कोई परमानेंट घर, जानें क्यों नहीं देती सरकार इसकी मंजूरी?

Ghost Town: दुनिया में एक ऐसा शहर भी है जहां पर लोगों को पक्के घर बनाने की इजाजत ही नहीं है. आइए जानते हैं कौन सा है वह शहर और क्या है इसके पीछे की वजह.

Ghost Town: यूनाइटेड स्टेट्स में एक छोटा सा शहर है जहां पर लोगों को पक्के घर बनाने की इजाजत ही नहीं है. इतना ही नहीं बल्कि सरकार किसी को भी वहां रहने से रोकती है. यह अजीब जगह है सेंट्रालिया. यह एक ऐसा शहर है जिसे अक्सर दुनिया के सबसे अजीब घोस्ट टाउन में से एक माना जाता है. इस अजीब हालात के पीछे कोई जंग या फिर आर्थिक संकट नहीं है. बल्कि  इसकी वजह एक तबाही है जो 6 दशक से भी पहले शुरू हुई थी. 

आखिर क्यों नहीं रह सकता कोई यहां? 

सेंट्रालिया में यह संकट 1962 में शुरू हुआ था. उस वक्त शहर के नीचे एक कोयला खदान में गलती से आग लग गई थी. जलने के बजाय आग अंडरग्राउंड कोयले की परतों में फैल गई. एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस इलाके में कोयले का इतना बड़ा भंडार है कि आग अगले 200 से 250 साल तक जलती रह सकती है. दशकों बाद भी अंडरग्राउंड आग अभी भी जल रही है. इस वजह से इसे बुझाना काफी मुश्किल हो गया है.

रहने के लिए खतरनाक हालात 

जमीन के नीचे लगी आग से जहरीली गैसें निकलती हैं. इनमें कार्बन मोनोऑक्साइड भी शामिल है. यह जमीन के दरारों से बाहर निकलती हैं. यह गैस इंसानी सेहत के लिए काफी ज्यादा खतरनाक है. इसके अलावा जलते हुए कोयले से पैदा होने वाली गर्मी जमीन के नीचे काफी ज्यादा तापमान तक पहुंच सकती है. यह गर्मी ऊपर की जमीन को कमजोर कर देती है.  इस वजह से ऐसे हालात बन जाते हैं कि यह जगह लोगों के रहने के लिए असुरक्षित हो जाती है. 

सड़कों में पड़ी दरारें 

जमीन के नीचे लगी आग से होने वाली एक और बड़ी समस्या है. जैसे ही कोयला जमीन के नीचे जलता है जमीन के नीचे खाली जगह बन जाती है. वक्त के साथ इससे ऊपर की जमीन अचानक ढह सकती है. इससे सिंकहोल बन सकते हैं. गर्मी और जमीन के खिसकने की वजह से इलाके की सड़कों में भी दरार आ गई है. 

सरकार ने रहने वालों को जाने के आदेश दिए 

इस बढ़ते खतरे की वजह से अधिकारियों ने आखिरकार फैसला किया कि यहां अब नहीं रहा जा सकता. 1980 के दशक में यूनाइटेड स्टेट्स सरकार ने रहने वालों को पैसे का मुआवजा दिया ताकि वे दूसरी जगह जा सकें. काफी लोगों ने बायआउट मान लिया और चले गए. लेकिन कुछ रहने वालों ने शुरू में खतरों के बावजूद अपने घरों में ही रहना चुना.

जमीन हुई जब्त

1992 में सरकार ने एमिनेंट डोमेन का इस्तेमाल करके और कड़ी कार्रवाई की. इस कानून के तहत सरकार ने सेंट्रालिया में ज्यादातर जमीन और घरों का मालिकाना हक ले लिया. अधिकारियों ने शहर का ZIP कोड 17927 हटाकर उसकी पोस्टल पहचान भी हटा दी. 2013 में सरकार ने बचे हुए कुछ रहने वालों के साथ एक समझौता किया. उन्हें अपनी बाकी की जिंदगी वहीं रहने की इजाजत दे दी गई लेकिन वह अपने घर बेच नहीं सकते थे या फिर उन्हें वारिस को नहीं दे सकते थे.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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