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संविधान निर्माण में आंबेडकर ही नहीं नेहरू का भी था योगदान, जानें किस आर्टिकल से जुड़ा है उनका नाम

संविधान निर्माण में डॉ. आंबेडकर के साथ पंडित नेहरू का भी बड़ा योगदान था. जानिए कैसे उनका ऐतिहासिक उद्देश्य प्रस्ताव हमारे संविधान की प्रस्तावना और महत्वपूर्ण अनुच्छेदों का आधार बना.

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  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण को संविधान निर्माण में महत्व दिया गया.

भारतीय संविधान के निर्माण का जब भी जिक्र होता है, तो बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर का नाम सबसे पहले जेहन में आता है. इसमें कोई दोराय नहीं है कि संविधान को मूर्त रूप देने में उनकी भूमिका सबसे अहम थी, लेकिन इस महान दस्तावेज को तैयार करने में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का योगदान भी बेहद ऐतिहासिक रहा है. बहुत से लोग यह नहीं जानते कि संविधान की आत्मा कही जाने वाली प्रस्तावना और राज्य के नीति निदेशक तत्वों के पीछे नेहरू की ही दूरगामी सोच छिड़ी हुई थी. संविधान के कुछ खास अनुच्छेदों का ताना-बाना सीधे तौर पर नेहरू के विचारों और उनके द्वारा पेश किए गए ऐतिहासिक प्रस्तावों से बुना गया था. 

उद्देश्य प्रस्ताव का कूटनीतिक आधार

पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा के सामने एक ऐतिहासिक 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) पेश किया था. यही प्रस्ताव आगे चलकर भारतीय संविधान की 'प्रस्तावना' (Preamble) का मुख्य आधार बना. नेहरू का यह कदम संविधान निर्माण की दिशा में सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण वैचारिक मील का पत्थर साबित हुआ. इस प्रस्ताव ने संविधान सभा को वह दार्शनिक और कूटनीतिक ढांचा प्रदान किया, जिसके आधार पर पूरे देश के लिए नियमों और अधिकारों को तैयार किया जाना था. इसने भारत को एक संप्रभु और स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त किया. 

नीति निदेशक तत्वों की प्रेरणा

आमतौर पर यह माना जाता है कि संविधान के भाग 4 में शामिल राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) का कोई भी विशेष अनुच्छेद नेहरू ने व्यक्तिगत रूप से नहीं लिखा था. इन्हें मुख्य रूप से संविधान सभा की सलाहकार समिति और बी.एन. राऊ द्वारा तैयार किया गया था, जो आयरलैंड के संविधान से काफी हद तक प्रेरित था. इसके बावजूद, इन नीति निदेशक सिद्धांतों के भीतर जितने भी सामाजिक और आर्थिक अधिकार शामिल किए गए, उनके पीछे नेहरू की समाजवादी सोच की गहरी छाप साफ तौर पर दिखाई देती है. उनके विचारों के बिना इन कल्याणकारी नीतियों की कल्पना करना भी नामुमकिन था. 

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अनुच्छेद 39 का समाजवादी ढांचा

संविधान का अनुच्छेद 39 (Article 39) राज्य द्वारा अपनी जनता के हित में अनुसरण किए जाने वाले कुछ खास नीति-सिद्धांतों के बारे में विस्तार से बात करता है. इस अनुच्छेद के भीतर छुपे हुए समाजवादी आदर्श पूरी तरह से नेहरू के जीवन दर्शन और उनके 'उद्देश्य प्रस्ताव' से गहराई से प्रेरित हैं. नेहरू हमेशा से एक ऐसे समाज की स्थापना करना चाहते थे जहां देश के संसाधनों का समान वितरण हो और अमीर-गरीब के बीच की खाई को कम किया जा सके. उनकी इसी आर्थिक और सामाजिक सोच को बाद में संविधान निर्माताओं ने अनुच्छेद 39 के तहत शामिल किया.

अनुच्छेद 51 और नेहरू की विदेश नीति

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए संविधान में अनुच्छेद 51 (Article 51) को जोड़ा गया था. यह अनुच्छेद सीधे तौर पर नेहरू की वैश्विक दृष्टि और उनकी प्रसिद्ध विदेश नीति का आईना माना जाता है. इस अनुच्छेद में साफ कहा गया है कि राज्य अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा को बढ़ावा देगा और राष्ट्रों के बीच न्यायपूर्ण संबंधों को बनाए रखने का प्रयास करेगा. नेहरू ने हमेशा विश्व शांति और गुटनिरपेक्षता की वकालत की थी. यही वजह है कि उनके इस अंतरराष्ट्रीय नजरिए को भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्वों के सबसे आखिरी अनुच्छेद में बेहद खास जगह दी गई. 

वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मिला बढ़ावा

नेहरू का मानना था कि एक आधुनिक और प्रगतिशील देश के निर्माण के लिए समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temper) का होना बेहद जरूरी है. उनके इसी विचार को आगे चलकर भारतीय संविधान की मूल आत्मा में पिरोया गया, ताकि देश की नीतियां रूढ़िवादिता से दूर और तार्किक सोच पर आधारित हों. संविधान सभा की विभिन्न बहसों के दौरान नेहरू ने बार-बार इस बात पर जोर दिया था कि भारत का संविधान सिर्फ एक कानूनी दस्तावेज न होकर देश के सामाजिक और वैज्ञानिक विकास का सबसे बड़ा जरिया बनना चाहिए, जो आने वाली पीढ़ियों का सही मार्गदर्शन कर सके.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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