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मांस जैसी क्यों मानी जाती है यह दाल, किस वजह से होता है ऐसा?

दालें वैसे तो शाकाहारी मानी जाती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक दाल ऐसी भी है जिसे मांसाहारी माना जाता है? जी हां, चलिए आज हम उस दाल के बारे में बताते हैं.

भारत में किसी भी राज्य में दालें पौष्टिकता से भरपूर मानी जाती हैं. हमारे देश में हर घर में दाल बनाई जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में एक दाल ऐसी भी है जिसे नॉनवेज माना जाता है. जी हां, हमारे घरों में बनाई जाने वाली एक दाल ऐसी भी है जिसे मांसाहार की श्रेणी में रखा गया है. कई लोग खासकर बंगाल के लोग इसे नॉनवेज मानते हैं. चलिए जानते हैं कि आखिर वो कौनसी दाल है.

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इस दाल को मानते हैं नॉनवेज?

दरअसल मसूर दाल को कई लोग नॉनवेज की क्षेणी में रखते हैं. बंगाली घरों में मसूर दाल रोजाना खाने का हिस्सा होती है, जिसे प्रोटीन से भरपूर माना जाता है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर वेज दिखने वाली मसूर दाल नॉनवेज कब बन गई? चलिए जानते हैं.

क्या कहता है धर्म?

हिंदू धर्म में एक पौराणिक कथा है जिसमें राहु और केतु का उल्लेख है. कहा जाता है कि जब देवताओं ने अमृत पान किया था तब राहु ने छल से अमृत पी लिया था। लेकिन भगवान विष्णु ने अपने चक्र से राहु का सिर धड़ से अलग कर दिया। राहु का सिर राहु कहलाया और धड़ केतु। मान्यता है कि राहु का कटा हुआ सिर जहां गिरा वहां मसूर की दाल का जन्म हुआ। इसी कारण मसूर की दाल को खून और मांस से जोड़कर देखा जाता है.

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ये भी है कारण

बहुत से लोग मानते हैं कि मसूर दाल को मांसाहारी माना जाता है क्योंकि इसमें प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है और क्योंकि विधवाएं शाकाहारी भोजन (लहसुन, प्याज, मसूर दाल और पुई शाक को छोड़कर) खाती थीं, इसलिए ज्यादा प्रोटीन सामग्री उनके हार्मोन को उत्तेजित करती थी और उन्हें यौन रूप से ज्यादा सक्रिय बनाती थी. हालांकि, कुछ लोगों के अनुसार ऐसा नहीं है क्योंकि विधवाएं चने भी खाती हैं, जिनमें प्रोटीन की मात्रा लाल दाल से दोगुनी होती है. इसके अलावा मसूर की दाल का उपयोग कुछ तंत्र-मंत्र के अनुष्ठानों में किया जाता है। इन अनुष्ठानों में मांस का प्रयोग भी होता है. इस कारण भी मसूर की दाल को मांस से जोड़कर देखा जाता है. वहीं कुछ लोगों का मानना है कि मसूर की दाल का स्वाद और बनावट मांस के समान होती है। विशेषकर जब इसे मसालों के साथ पकाया जाता है.

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