Russia US Extreme Cold: रूस और अमेरिका में अचानक क्यों पड़ने लगी इतनी ठंड, क्या है इसके पीछे की वजह?
Russia US Extreme Cold: इस बार रूस और अमेरिका में जबरदस्त ठंड देखने को मिल रही है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.

Russia US Extreme Cold: जनवरी 2026 में नॉर्दर्न हेमिस्फीयर के बड़े हिस्सों में असामान्य रूप से कड़ाके की ठंड पड़ी है. रूस में रिकॉर्ड तोड़ बर्फबारी से लेकर पूरे संयुक्त राज्य अमेरिका में जानलेवा शीत लहर तक तापमान में अचानक गिरावट देखने को मिल रही है. इसी बीच लोगों का सवाल उठ रहा है कि आखिर इस साल इतनी ज्यादा ठंड अचानक से क्यों बढ़ गई है. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
पोलर वर्टेक्स का टूटना
ज्यादा ठंड के पीछे की वजह पोलर वर्टेक्स का कमजोर होना और उसकी अपनी जगह से हटना है. पोलर वर्टेक्स बर्फीली हवाओं का एक विशाल घेरा है जो आमतौर पर आर्कटिक के चारों तरफ घूमता है. इससे जमा देने वाली हवा उत्तरी ध्रुव के पास बंद रहती है. जनवरी 2026 में यह वर्टेक्स कमजोर हो गया और फैल गया. इस वजह से आर्कटिक की हवा दक्षिण की तरफ उत्तरी अमेरिका और यूरेशिया में फैल गई. एक बार जब यह ठंडी हवा अपनी सामान्य सीमा से बाहर निकल जाती है तो यह आर्कटिक से दूर तापमान में अचानक और गंभीर गिरावट ला सकती है.
जेट स्ट्रीम में गड़बड़ी और आर्कटिक का गर्म होना
पोलर वर्टेक्स से जेट स्ट्रीम भी जुड़ी हुई है. यह एक तेज गति वाली हवा की धारा है जो वैश्विक मौसम के पैटर्न को आकर देती है. आर्कटिक के लंबे समय तक गर्म होने की वजह से आर्कटिक और मिड लेटीट्यूड के बीच तापमान का अंतर कम हो गया है. इस वजह से जेट स्ट्रीम धीमी और ज्यादा लहरदार हो गई है. यही वजह है कि पश्चिम से पूर्व की तरफ बहने के बजाय यह अब दक्षिण की तरफ झुक जाती है.
सडन स्ट्रेटोस्फैरिक वार्मिंग
इस सर्दी में एक और बड़ी वजह जनवरी की शुरुआत में अचानक स्ट्रेटोस्फैरिक वार्मिंग की घटना रही है. ऐसी घटनाओं के दौरान आर्कटिक के ऊपर इट्स स्ट्रेटोस्फीयर में तापमान कुछ ही दिनों में तेजी से बढ़ जाता है. यह वायुमंडल संतुलन को बिगाड़ देता है जो पोलर वर्टेक्स को स्थिर रखता है. जब पोलर वर्टेक्स कमजोर होता है तो ठंडी हवा के गुच्छे बाहर की तरफ धकेल दिए जाते हैं. इससे महाद्वीपों में सर्दियों की स्थिति और भी ज्यादा खराब हो जाती है.
पिघलती आर्कटिक समुद्री बर्फ की भूमिका
वैज्ञानिक बैरेंट्स और कारा सागर में रिकॉर्ड बर्फ पिघलने को भी एक बड़ा योगदान बता रहे हैं. बर्फ से ढके समुद्रों की तुलना में खुला पानी वायुमंडल में ज्यादा गर्मी छोड़ता है. यह अतिरिक्त गर्मी आर्कटिक हवा के पैटर्न को और भी ज्यादा अस्थिर करती है. इस वजह से पोलर वर्टेक्स में गड़बड़ी और निकले लेटीट्यूड में ज्यादा ठंड फैलने की संभावना बढ़ जाती है.
रूस पर प्रभाव
रूस सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक रहा है. कामचटका प्रायद्वीप में 30 से 60 सालों में सबसे ज्यादा बर्फबारी हुई है. इसमें बर्फ के ढेर कई मीटर तक पहुंच गए हैं. मॉस्को में तापमान गिरकर लगभग - 28 डिग्री सेल्सियस हो गया है. इससे इंफ्रास्ट्रक्चर की समस्याएं हो रही हैं और इमारत के अंदर पानी के सिस्टम भी जम गए हैं.
संयुक्त राज्य अमेरिका पर असर
संयुक्त राज्य अमेरिका में विंटर स्टॉर्म फर्न ने लगभग आधे देश को प्रभावित किया है. इससे लगभग 160 मिलियन लोग प्रभावित हुए हैं. मिनेसोटा जैसे राज्यों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है. इससे जमने वाली बारिश और बर्फबारी ने ट्रांसपोर्ट, बिजली सप्लाई और रोजमर्रा की जिंदगी को बाधित किया है. फ्रॉस्टबाइट और हाइपोथर्मिया की जोखिम की वजह से कई राज्यों में इमरजेंसी अलर्ट जारी किए गए हैं.
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Source: IOCL


























