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इजरायल को क्यों पसंद नहीं करते हैं मुस्लिम देश? ये है सबसे बड़ा कारण

इजरायल खुद को यहूदी और लोकतांत्रिक राज्य बताता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इजरायल को कोई मुस्लिम देश पसंद क्यों नहीं करता? चलिए जानते हैं.

पिछले एक साल से इजरायल और हमास के बीच जंग जारी है. जिसमें अबतक हजारों लोग अपनी जान गवां चुके हैं. वहीं इजराइल और मुस्लिम देशों की आपस में तनातनी किसी से छुपी नहीं है. इसराइल से खाड़ी के मुस्लिम देशों के संबंध काफी कड़वे हैं. दुनिया भर के मुसलमानों के मन में इसराइल की नकारात्मक छवि है. आखिर सवाल ये उठता है कि इसराइल से खाड़ी के मुस्लिम देश क्यों चिढ़े रहते हैं. इस सवाल का जवाब जानने के लिए आपको इसराइल एक देश कैसे बना ये समझना होगा.

सैन्य ताकत का लोहा मानती है दुनिया

इसराइल दुनिया का इकलौता ऐसा देश है जहां की बहुसंख्यक आबादी यहूदी है. इसराइल एक छोटा देश है पर उसकी सैन्य ताक़त का दुनिया लोहा मानती है. कहा जाता है कि अनौपचारिक रूप से इसराइल परमाणु शक्ति संपन्न देश है और अपनी ताकत के दम पर ही अस्तित्व में है.

50 साल पहले इसराइल और उसके पड़ोसियों के बीच युद्ध खासा भड़क गया था जो 1967 के अरब-इसराइल युद्ध के नाम से जाना जाता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि ये संघर्ष महज छह दिन ही चला, लेकिन इसका असर काफी ज्यादा था. दरअसल 1948 के आख़िर में इसराइल के अरब पड़ोसियों ने हमला कर दिया था. इनकी कोशिश इसराइल को नष्ट करने की थी, लेकिन वे नाकाम रहे. अरब और इसराइल के संघर्ष की छाया मोरोक्को से लेकर पूरे खाड़ी क्षेत्र पर है. इस संघर्ष का इतिहास काफ़ी पुराना है. 14 मई 1948 को पहला यहूदी देश इसराइल अस्तित्व में आया. यहूदियों और अरबों ने एक-दूसरे पर हमले शुरू कर दिए. लेकिन यहूदियों के हमलों से फ़लस्तीनियों के पांव उखड़ गए और हज़ारों लोग जान बचाने के लिए लेबनान और मिस्र भाग खड़े हुए. 1948 में इसराइल के गठन के बाद से ही अरब देश इसराइल को जवाब देना चाहते थे.

इजरायल के विरुद्ध जंग

साल 1964 में अरब देशों ने फ़लस्तीनी लिबरेशन ऑर्गेनाइज़ेशन, पीएलओ नाम के संगठन की स्थापना की. 1969 में यासिर अराफ़ात ने इस संगठन की बागडोर संभाल ली. इसके पहले अराफ़ात ने 'फ़तह' नामक संगठन बनाया था जो इसराइल के विरुद्ध हमले कर काफी चर्चा में आ चुका था. इसराइल और इसके पड़ोसियों के बीच बढ़ते तनाव का अंत युद्ध के रूप में हुआ. ये युद्ध 5 जून से 11 जून 1967 तक चला और इस दौरान मध्य पूर्व संघर्ष का स्वरूप बदल गया.

इसराइल ने मिस्र को गजा से सीरिया को गोलन पहाड़ियों से और जॉर्डन को पश्चिमी तट और पूर्वी यरुशलम से धकेल दिया. इसके कारण पांच लाख और फलस्तीनी लोगों के घर उजड़ गए थे. इसके अलावा मिस्त्र और सीरिया ने भी अपनी जमीन वापस न मिलने पर इजराइल पर चढ़ाई कर दी थी. इसराइल के कब्ज़े के विरोध में 1987 में फ़लस्तीनियों ने इंतिफ़ादा यानी जनआंदोलन छेड़ा जो ज़ल्दी ही पूरे क्षेत्र में फैल गया था. चारों ओर से मुस्लिम देशों से घिरा होने के चलते और समय-समय पर युद्द होने की वजह से इजराइल ज्यादातर मुस्लिम देशों का दुश्मन बन गया.          

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