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शॉपिंग मॉल में क्यों नहीं होतीं घड़ियां-खिड़कियां? कंगाल बनाने के लिए रचा जाता है यह चक्रव्यूह!

Shopping Mall Psychology: अपने यह बात जरूर नोटिस की होगी कि किसी भी शॉपिंग मॉल में कोई भी खिड़की या फिर घड़ी नहीं होती. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे का सच.

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  • शॉपिंग मॉल ग्राहकों को अधिक देर तक रोकने के लिए डिज़ाइन होते हैं।
  • घड़ी-खिड़की की अनुपस्थिति समय के एहसास को प्रभावित करती है।
  • कृत्रिम रोशनी व संगीत ग्राहकों को खरीदारी पर केंद्रित रखते हैं।

Shopping Mall Psychology: जब भी आप शॉपिंग मॉल जाते हैं तो आपने इस बात पर जरूर गौर किया होगा कि कैसे कुछ घंटे बीत गए यह आपको पता ही नहीं चला. दरअसल यह कोई इत्तेफाक नहीं है. कई मॉल जानबूझकर ऐसे डिजाइन किए जाते हैं कि लोग ज्यादा देर वहां रुकें, जिससे उनके और चीजें खरीदने की संभावना बढ़ जाती है. रिटेल एक्सपर्ट इस रणनीति को ग्रुएन इफेक्ट और टेम्पोरल डिस्टॉर्शन जैसे कॉन्सेप्ट से जोड़ते हैं. ये दोनों ही खरीदारों के समय और जगह के एहसास पर असर डालते हैं.

क्यों बनाया गया ऐसा डिजाइन? 

शॉपिंग मॉल की सबसे खास बातों में से एक है वहां दीवार घड़ी और खिड़कियों का ना होना. घड़ी ना होने की वजह से खरीदारों को यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है कि वे अंदर कितना समय बिता चुके हैं. खरीदारी का एक छोटा सा चक्कर आसानी से कई घंटों में बदल सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि समय बीतने का एहसास दिलाने वाली चीजें काफी कम होती हैं. 

ठीक इसी तरह खिड़कियां ना होने से लोग बाहर के माहौल से कट जाते हैं. अंदर जाने के बाद लोगों को आसानी से यह पता नहीं चलता कि सुबह है, शाम है, धूप खिली है या फिर बारिश हो रही है. इस वजह से वे ज्यादा देर तक अंदर बने रहते हैं.

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आर्टिफिशियल लाइटिंग का कमाल 

शॉपिंग मॉल में आमतौर पर पूरी बिल्डिंग में तेज और सोच-समझकर लगाई गई लाइटों का इस्तेमाल किया जाता है. इस एक जैसी रोशनी से ऐसा लगता है कि हमेशा दिन ही है. अब भले ही बाहर कोई भी समय हो रहा हो. आरामदायक रोशनी से बाहर निकालने की जल्दबाजी महसूस ही नहीं होती. 

इसी के साथ सड़कों या फिर बाहर की गतिविधि को दिखाने वाली खिड़कियां ना होने की वजह से खरीदार पूरी तरह से अपने आसपास की दुकान, डिस्प्ले और प्रमोशनल ऑफर पर ध्यान देते हैं. बाहर की चीज से ध्यान ना भटकने की वजह से रिटेलर लोगों को मॉल के बाहर क्या हो रहा है इसके बजाय शॉपिंग के माहौल में ही व्यस्त रख पाते हैं.

म्यूजिक और लेआउट शॉपिंग के व्यवहार पर असर डालते हैं 

एक और सबसे शानदार रणनीति है बैकग्राउंड म्यूजिक. कई मॉल धीमा और सुकून देने वाला म्यूजिक बजाते हैं. लोग दुकानों में जितना ज्यादा समय बिताकर घूमते हैं उतने ही ज्यादा प्रोडक्ट देखते हैं. इससे बिना सोचे समझे खरीदारी करने की संभावना बढ़ जाती है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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