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मुसलमान क्यों पहनते हैं जालीदार सफेद टोपी? ये है इसके पीछे का कारण

दुनियाभर में सभी धर्मों के लोग रहते हैं, लेकिन बीते कुछ सालों से इस्लाम को मानने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. क्या आप जानते हैं कि मुसलमान सफेद जालीदार टोपी क्यों पहनते हैं .

दुनियाभर में सभी धर्म के लोग रहते हैं. सभी धर्म के लोगों की अपनी मान्यताएं और कल्चर है, जिसको उस धर्म के लोग फॉलो करते हैं. इतना ही नहीं सभी धर्म के लोगों में प्रार्थना करने का तरीका भी अलग होता है. आज हम आपको बताएंगे कि आखिर इस्लाम को मानने वाले लोग नमाज पढ़ने के समय  या अन्य मौकों पर सफेद टोपी पहनते हैं. आज हम आपको बताएंगे कि आखिर मुसलमान जालीदार सफेद टोपी क्यों पहनते हैं. 

मुस्लिम

इस्लाम को मानने वालों की आबादी दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही है. आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल दुनियाभर में लगभग 1.9 अरब मुस्लिम समुदाय के लोग हैं, जो 2030 तक बढ़ कर 2.2 अरब हो जाएंगे. आज इस्लाम दुनिया का सबसे बड़ा धर्म है, जिसे मानने वाले लोग दुनिया की कुल आबादी का लगभग 24 फीसदी हिस्सा हैं. ये आंकड़े 'द ग्लोबललिस्ट' से लिए गए हैं.

जालीदार टोपी

मुसलमान भी अलग-अलग फिरको में बटे हुए हैं. लेकिन सभी मुसलमानों में एक बात कॉमन है कि वह नमाज और कुरान शरीफ पढ़ने के दौरान टोपी लगाते हैं. हालांकि इसके अलावा भी कई मुसलमान हर वक्त टोपी लगाते हैं. ऐसे में लोगों के मन में सवाल रहता है कि आखिर मुसलमान जालीदार सफेद टोपी ही क्यों लगाते हैं?  कुछ लोगों का मानना है कि इस्लाम मिडिल ईस्ट से फैलना शुरू हुआ और वहां गर्मी होने के कारण टोपी पहनने का रिवाज था, इसके अलावा साफे का भी इस्तेमाल होता था.

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मुसलमान क्यों पहनते हैं टोपी?

धार्मिक जानकारों की मुताबिक तो टोपी पहना इस्लाम में फर्ज यानी जरूरी नहीं है. यहां तक की नमाज और दूसरे फर्ज अदा करने के दौरान भी इसे वाजिब (जरूरी) नहीं बताया गया है. टोपी पहनना सुन्नत है और नामज का कुरान शरीफ की तिलावत करने के दौरान इसे पहनना शिष्टाचार माना जाता है. अगर कोई  नमाज के दौरान टोपी नहीं पहनता है, तो उसकी नमाज इनवैलिड नहीं मानी जाएगी. वहीं अगर कोई शख्स फैशन के कारण नमाज में टोपी नहीं पहनता है, तो उसकी नमाज मकरूह मानी जाएगी.

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सिर ढकने का रिवाज

बता दें सिर्फ मुसलमानों में ही टोपी या साफे से सिर ढकने का रिवाज नहीं है. अधिकांश धर्मों में धार्मिक मौकों पर सिर ढकने का रिवाज है. जैसे ईसाई धर्म में पोप सिर टोपी से ढकते हैं. जिसे अच्छा माना जाता है. वहीं सिखों में पग पहनना जरूरी होता है. इस्लाम धर्म में नमाज और कुरान शरीफ की तिलावत के दौरान टोपी पहनते हैं. इसके अलावा मजहबी इजलास यानी धार्मिक सभाओं के दौरान भी लोग टोपी पहनते हैं. 

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