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Fan Blades: भारत के पंखों में तीन और अमेरिका के पंखों में चार ब्लेड क्यों होते हैं, जानें क्या है वजह?

Fan Blades: अक्सर ही लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि भारत के पंखों में तीन ब्लेड और विदेश के पंखों में चार-पांच ब्लेड क्यों होते हैं? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

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  • भारत में पंखे तीन ब्लेड के होते हैं तीव्र ठंडक हेतु।
  • अमेरिकी पंखे चार-पांच ब्लेड के होते हैं वातानुकूलित हवा हेतु।
  • कम ब्लेड गति बढ़ाते, अधिक ब्लेड शांति से हवा फैलाते।

Fan Blades: सीलिंग फैन का डिजाइन पहले ही काफी साधारण लगे लेकिन उसमें लगे ब्लेड की संख्या उसकी परफॉर्मेंस को तय करने में एक बड़ी भूमिका निभाती है.  अक्सर ही आपने देखा होगा कि भारत में ज्यादातर सीलिंग फैन में तीन ब्लेड होते हैं और अमेरिका के फैन में अक्सर 4 से 5 ब्लेड होते हैं. यह फर्क इस वजह से है क्योंकि दोनों देशों में पंखे का इस्तेमाल अलग-अलग मकसद से किया जाता है. आइए जानते हैं क्या है यह मकसद.

भारतीय फैन का डिजाइन 

भारत में साल के ज्यादातर समय गर्म और उमस भरा मौसम रहता है. इस वजह से लोगों को तेज हवा के बहाव की जरूरत होती है. इससे तुरंत ठंडक महसूस हो जाती है. इस मकसद के लिए तीन ब्लेड वाले पंखे सबसे अच्छे होते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि उनमें हवा का प्रतिरोध कम होता है. 

कम ब्लेड होने से मोटर फैन को तेजी से घुमा सकती है. इससे हवा का बहाव नीचे की तरफ ज्यादा तेज होता है. हवा का यह केंद्रीय बहाव लोगों को बिना एयर कंडीशनिंग के भी ठंडक महसूस करने में मदद करता है. इस वजह से तीन ब्लेड वाला डिजाइन तेज रफ्तार से ठंडक देने के लिए सबसे सही माना जाता है. 

अमेरिकी फैन के डिजाइन 

अमेरिका में ज्यादातर घरों में पहले से ही एचवीएसी सिस्टम लगे होते हैं. ये सिस्टम हीटिंग और एयर कंडीशनिंग की सुविधा देते हैं. सीलिंग फैन का इस्तेमाल आमतौर पर कमरे में कंडीशन वाली हवा को फैलाने के लिए किया जाता है ना कि तेज हवा का बहाव बनाने के लिए. इस वजह से अमेरिकी पंखों में अक्सर 4 से 5 ब्लेड होते हैं. ज्यादा ब्लेड हवा को धीरे और समान रूप से घुमाते हैं. 

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ब्लेड की संख्या रफ्तार और हवा के प्रतिरोध पर असर डालती है 

ब्लेड की संख्या सीधे तौर पर पंखे की परफॉर्मेंस पर असर डालती है. तीन ब्लेड वाला फैन हल्का होता है और उसमें हवा का प्रतिरोध काफी कम होता है. यही वजह है कि वह तेजी से घूम सकता है. ज्यादा ब्लेड होने से पंखे का वजन और हवा का प्रतिरोध बढ़ जाता है. इस वजह से घूमने की रफ्तार कम हो जाती है.

शोर में भी फर्क 

क्योंकि भारतीय फैन ज्यादा तेज रफ्तार से घूमते हैं इस वजह से वे चलाते समय शोर करते हैं.  हालांकि इसे अक्सर ज्यादा परेशानी वाला नहीं माना जाता क्योंकि ठंडक देने की क्षमता ही ज्यादा प्राथमिकता होती है. 

दूसरी तरफ अमेरिकी पंखे शांत तरीके से चलने के लिए डिजाइन किए जाते हैं. ज्यादा ब्लेड और कम स्पीड से शोर कम होता है. इस वजह से ये बेडरूम, लिविंग रूम और ऑफिस जैसी जगहों के लिए अच्छे होते हैं.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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