एक्सप्लोरर

रीसेल में खरीदा फ्लैट तो क्या साथ मिलेगी पार्किंग? जानें क्या कहता है कानून

Flat Buyers Parking Rules: अगर कोई रीसेल में फ्लैट खरीद रहा है, तो यह जरूरी नहीं है कि उस घर से साथ-साथ आपको पार्किंग का भी हक मिल जाता है. मुंबई के एक केस में अदालत ने नए खरीदारों के खिलाफ फैसला सुनाया.

Show Quick Read
Key points generated by AI, verified by newsroom
  • पार्किंग नियमों हेतु बायलॉज जांचें, लिखित NOC भी लें।

Flat Buyers Parking Rules: अपना खुद का घर खरीदने का सपना हर किसी का होता है. लोग चाहते हैं कि वे अपने घर को बेहतर तरीके से सजाएं, जिसमें उनके पास खुद की गाड़ी भी हो. लेकिन अगर आप फ्लैट खरीदने के लिए सोच रहे हैं या फिर खरीदना चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है. अक्सर लोग लाखों रुपये खर्च करके नया आशियाना तो ले लेते हैं, लेकिन पार्किंग को लेकर बड़ी गलतफहमी में रहते हैं. मुंबई के एक हालिया कोर्ट केस ने साबित कर दिया है कि केवल फ्लैट खरीदने से उससे जुड़ी पार्किंग आपकी नहीं हो जाती है. अगर आपने सोसाइटी के बाय-लॉज का पालन करते हुए अपने नाम पर पार्किंग आवंटित नहीं कराई है, तो आप अपनी ही गाड़ी खड़ी करने का कानूनी अधिकार खो सकते हैं.

मुंबई के चर्चित केस का अदालती फैसला

मुंबई में एक नए दंपती ने रीसेल में फ्लैट खरीदा और उसी पार्किंग में अपनी गाड़ी पार्क करने लगे, जिसे पुराना मकान मालिक इस्तेमाल करता था. पड़ोसी से विवाद होने पर मामला जब महाराष्ट्र कोऑपरेटिव अपीलेट कोर्ट पहुंचा, तो अदालत ने नए खरीदारों के खिलाफ फैसला सुनाया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विक्रेता केवल उसी चीज को बेच सकता है, जिसका उसके पास मालिकाना हक हो. चूंकि पार्किंग केवल इस्तेमाल का अधिकार होती है और यह सीधे ट्रांसफर नहीं होती, इसलिए नए मालिक को सोसाइटी की मंजूरी के बिना पार्किंग का अधिकार नहीं मिल सकता है.

मालिकाना हक और इस्तेमाल के अधिकार में फर्क है

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला कोई नया कानून बनाने के बजाय मौजूदा व्यवस्था को पूरी तरह साफ करता है. किसी भी को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में फ्लैट का मालिकाना हक और पार्किंग की जगह का इस्तेमाल करने का अधिकार, दो बिल्कुल अलग बातें हैं. पुराने मालिक को मिला पार्किंग स्लॉट सोसाइटी द्वारा दिया गया एक लाइसेंस या इस्तेमाल का अधिकार मात्र होता है. मकान बिकते ही वह अधिकार खत्म हो जाता है और नए खरीदार को फिर से पूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. यानि अगर आप दोबारा उस घर को खरीदना चाहते हैं तो आपको यह देखना होगा कि बेचने वाले ने फ्लैट के साथ में आपको पार्किंग दी है या फिर आपको पार्किंग की जमीन के लिए अलग से पैसा देना होगा.

यह भी पढ़ें: मरने के बाद सरकार कैसे खत्म करती है आपका आधार डेटा? क्यों इसे जरूरी है कराना


रीसेल में खरीदा फ्लैट तो क्या साथ मिलेगी पार्किंग? जानें क्या कहता है कानून

कम जगह में लॉटरी और रोटेशन की व्यवस्था

जिन सोसायटियों में गाड़ियों की संख्या अधिक और पार्किंग स्लॉट सीमित होते हैं, वहां आवंटन के कड़े नियम लागू होते हैं. ऐसी जगहों पर मैनेजमेंट कमिटी लॉटरी, रोटेशन या सीनियरिटी के आधार पर निष्पक्ष रूप से पार्किंग आवंटित करती है. ऐसी स्थितियों में कोई भी नया खरीदार यह दावा नहीं कर सकता कि पुराना मालिक जहां गाड़ी खड़ी करता था, वही जगह अब उसकी हो गई. खरीदार को सौदा तय करने से पहले सोसाइटी के दफ्तर जाकर पार्किंग की उपलब्धता और नियमों की जांच कर लेनी चाहिए.

सोसाइटी बाय-लॉज और नए आवेदन की प्रक्रिया

मॉडल बाय-लॉज के अनुसार, पार्किंग की सुविधा चाहने वाले हर सदस्य को सोसाइटी के पास अलग से फॉर्म भरकर आवेदन देना होता है. यदि आप रीसेल में घर ले रहे हैं, तो सोसाइटी का नया सदस्य बनने के तुरंत बाद आपको पार्किंग के आधिकारिक आवंटन के लिए अप्लाई करना चाहिए. केवल सेल डीड में पार्किंग का जिक्र करवा लेने भर से आपको कानूनी सुरक्षा नहीं मिलती, जब तक कि सोसाइटी का रजिस्टर और रिकॉर्ड आपके नाम की पुष्टि न कर दे.

अलग-अलग राज्यों के कानूनों में है अंतर

कानूनी जानकारों का कहना है कि महाराष्ट्र के इस फैसले को पूरे देश पर एक समान लागू नहीं माना जा सकता है. दिल्ली हाई कोर्ट और अन्य राज्यों के वकीलों की मानें तो जहां अपार्टमेंट ओनरशिप एक्ट लागू है या जहां रेरा (RERA) के तहत बिल्डर दस्तावेजों में ढकी हुई पार्किंग का स्पष्ट उल्लेख है, वहां स्थितियां अलग हो सकती हैं. कई राज्यों में बिल्डर द्वारा आधिकारिक रूप से बेची गई गैराज पार्किंग आपकी निजी संपत्ति का हिस्सा मानी जाती है, जबकि खुली पार्किंग कॉमन एरिया में आती है.


रीसेल में खरीदा फ्लैट तो क्या साथ मिलेगी पार्किंग? जानें क्या कहता है कानून

खरीदारों के लिए जरूरी सावधानियां और गाइडलाइंस

रीसेल फ्लैट खरीदते वक्त किसी भी धोखे से बचने के लिए विक्रेता के मौखिक दावों पर भरोसा करने के बजाय सोसाइटी से लिखित एनओसी और पार्किंग स्टेटस लेटर मांगें. अपने सेल एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ें कि उसमें ओपन पार्किंग का सिर्फ इस्तेमाल का अधिकार लिखा है या कवर्ड गैराज का जिक्र है. सौदा पक्का होने के बाद पार्किंग संबंधी किसी भी अनौपचारिक समझौते को सोसाइटी के रिकॉर्ड में दर्ज कराएं.

यह भी पढ़ें: देश में कितने करोड़ Gen-G? 2029 में कितने प्रतिशत वोटों पर होगा इनका सीधा असर

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

रीसेल में खरीदा फ्लैट तो क्या साथ मिलेगी पार्किंग? जानें क्या कहता है कानून
रीसेल में खरीदा फ्लैट तो क्या साथ मिलेगी पार्किंग? जानें क्या कहता है कानून
मरने के बाद सरकार कैसे खत्म करती है आपका आधार डेटा? क्यों इसे जरूरी है कराना
मरने के बाद सरकार कैसे खत्म करती है आपका आधार डेटा? क्यों इसे जरूरी है कराना
देश में कितने करोड़ Gen-G? 2029 में कितने प्रतिशत वोटों पर होगा इनका सीधा असर
देश में कितने करोड़ Gen-G? 2029 में कितने प्रतिशत वोटों पर होगा इनका सीधा असर
कितने खतरनाक हैं 2026 के परमाणु हथियार? केवल एक हमले से आ सकती है कयामत
कितने खतरनाक हैं 2026 के परमाणु हथियार? केवल एक हमले से आ सकती है कयामत
Advertisement

वीडियोज

Bollywood News: आवारापन 2 ट्रेलर में इमरान हाशमी का शिवम पंडित अवतार, बदले की शुरुआत (06.08.26)
गोरखपुर की लेडी नटवरलाल का करोड़ों वाला मायाजाल!
Pati Brahmachari:💔Isha-Suraj के बीच फिर आई Avni, तकरार के बीच पनपने लगा प्यार। #sbs
Bollywood News: बिग बॉस के टीज़र से मचा तहलका: क्या टीवी पर फिर दिखेगी 'करण-अर्जुन' की जोड़ी? ( 05.08.26 )
Jharkhand Job Protest: झारखंड नौकरी आंदोलन से घिरी सरकार! इस्तीफा देंगे हेमंत सोरेन? ABPLIVE
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
मोदी कैबिनेट का अहम फैसला, असम में दूसरे बड़े फॉर लेन प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी
मोदी कैबिनेट का अहम फैसला, असम में दूसरे बड़े फॉर लेन प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी
बारिश में राहुल-प्रियंका की बातचीत, अमित शाह खुद थामे दिखे छाता
बारिश में राहुल-प्रियंका की बातचीत, अमित शाह खुद थामे दिखे छाता
लुधियाना: कांग्रेस के कार्यक्रम में बवाल, चन्नी समर्थकों ने लगाए 'बघेल Go Back' के नारे
लुधियाना: कांग्रेस के कार्यक्रम में बवाल, चन्नी समर्थकों ने लगाए 'बघेल Go Back' के नारे
गिल के लिए श्रीलंका दौरा 'अग्निपरीक्षा', कैफ ने बताया क्यों होगा इम्तिहान
गिल के लिए श्रीलंका दौरा 'अग्निपरीक्षा', कैफ ने बताया क्यों होगा इम्तिहान
'अपनी आत्मा बेची', 'गोलमाल' एक्ट्रेस के ऊपर था 1 करोड़ का लोन, चुकाने के लिए करनी पड़ी सी ग्रेड फिल्में
'गोलमाल' एक्ट्रेस के ऊपर था 1 करोड़ का लोन, चुकाने के लिए करनी पड़ी सी ग्रेड फिल्में
‘क्या बोलती पब्लिक’, Zen G का मूड जानने के लिए सितंबर से CJP का देशव्यापी अभियान
‘क्या बोलती पब्लिक’, Zen G का मूड जानने के लिए सितंबर से CJP का देशव्यापी अभियान
रेप केस: बॉम्बे HC से दोषी करार देने के बाद तरुण तेजपाल का पहला रिएक्शन
रेप केस: बॉम्बे HC से दोषी करार देने के बाद तरुण तेजपाल का पहला रिएक्शन
अतीक अहमद के बेटे आबान अहमद की मौत, डिवाइडर से टकराई कार
अतीक अहमद के बेटे आबान अहमद की मौत, डिवाइडर से टकराई कार
Embed widget