Crude Oil Exports: क्रूड ऑयल ही क्यों बेचते हैं रूस-अमेरिका जैसे देश, रिफाइन करके क्यों नहीं करते सौदा?
Crude Oil Exports: रूस और अमेरिका जैसे देश क्रूड आयल ही बेचते हैं. आइए जानते हैं कि वह तेल को रिफाइन करके क्यों नहीं बेचते.

Crude Oil Exports: भारत की सबसे बड़ी रिफाइनरी इंडियन ऑयल कार्पोरेशन ने मार्च में ब्राजील की पेट्रोब्रास के साथ-साथ कई देशों से लगभग 7 मिलियन बैरल कच्चा तेल खरीदा. यह रूसी तेल में कटौती की भरपाई के लिए किया गया. रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसी बड़ी ऊर्जा शक्तियां अक्सर बेचने से पहले कच्चे तेल को पूरी तरह से रिफाइन करने के बजाय उसे एक्सपोर्ट करना पसंद करती हैं. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.
रिफाइनरी डिजाइन में बेमेल
कच्चे तेल को घरेलू स्तर पर रिफाइन करने के बजाय बेचने का एक सबसे बड़ा कारण रिफाइनरियों का डिजाइन है. रिफाइनरी खास तरह के कच्चे तेल को प्रोसेस करने के लिए बनाई जाती है जैसे की लाइट स्वीट या फिर हैवी सोर.
आपको बता दें कि संयुक्त राज्य अमेरिका बड़ी मात्रा में हल्का कच्चा तेल पैदा करता है. लेकिन उसकी कई रिफायनरी वेनेजुएला और मध्य पूर्व जैसे देशों से आयात किए जाने वाले भारी कच्चे तेल को संभालने के लिए अपग्रेड की गई हैं. इसी का नतीजा है कि अमेरिका अक्सर अपना हल्का कच्चा तेल एक्सपोर्ट करता है और उस भारी तेल को आयात करता है जो उसकी रिफाइनरी कॉन्फिगरेशन के लिए बेहतर होता है. रूस को भी इसी तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है.
ईंधन की तुलना में कच्चे तेल को ले जाना सस्ता
अगर लॉजिस्टिक्स के नजरिए से बात करें तो कच्चे तेल को रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की तुलना में ले जाना काफी ज्यादा आसान और सस्ता है. कच्चे तेल को पाइपलाइन और बड़े टैंकरों के जरिए कम सुरक्षा प्रतिबंधों के साथ थोक में भेजा जा सकता है.
पेट्रोल, डीजल या फिर एवियशन फ्यूल जैसे रिफाइंड उत्पादों के लिए अलग-अलग स्टोरेज, खास जहाज, सुरक्षा नियम और ज्यादा बीमा लागत की जरूरत होती है.
भारत और चीन जैसे रिफायनिंग हब से मांग
भारत और चीन जैसे देशों ने दुनिया की कुछ सबसे बड़ी और सबसे जटिल रिफाइनरियों को बनाने में अरबों डॉलर का निवेश किया है. यह देश कच्चा तेल आयात करना पसंद करते हैं ताकि वह इसे घरेलू स्तर पर रिफाइन कर पाएं, स्थानीय मानकों के अनुसार ईंधन बना सकें और रोजगार पैदा कर सकें.
तेज डॉलर कमाई
कच्चा तेल दुनिया की सबसे ज्यादा लिक्विड कमोडिटी में से एक है. इसे इंटरनेशनल मार्केट में बेचने से डॉलर और दूसरी मजबूत विदेशी मुद्राओं तक जल्दी पहुंच मिलती है. रूस जैसे देशों के लिए कच्चे तेल का एक्सपोर्ट विदेशी मुद्रा का एक जरूरी सोर्स है. दूसरी तरफ रिफाइंड प्रोडक्ट्स पर टैरिफ, क्वालिटी रेगुलेशन और मार्केट एक्सेस में रुकावटें होती हैं.
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Source: IOCL
























