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Lunar Heritage: चांद पर पहले छोड़ी गई किसी चीज को क्यों नहीं छेड़ सकते दूसरे अंतरिक्ष यात्री? जानें इसकी वजह

Lunar Heritage: चांद पर छोड़ी गई किसी भी चीज को बाकी एस्ट्रोनॉट नहीं छू सकते. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह और क्यों बनाया गया यह नियम.

Lunar Heritage: इंसानों के चांद पर पहली बार उतरने के आधी सदी से भी ज्यादा समय बाद शुरुआती मिशन की कई चीजें आज भी ठीक वहीं हैं जहां उन्हें रखा गया था. इनमें साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स, इक्विपमेंट, नेशनल फ्लैग और यहां तक की ऐतिहासिक अपोलो 11 मून लैंडिंग मिशन के दौरान एस्ट्रोनॉट्स के छोड़े गए पैरों के निशान भी शामिल हैं. दिलचस्प बात यह है कि भविष्य के मिशन के एस्ट्रोनॉट्स को इन चीजों को छूने या फिर उन्हें परेशान करने की इजाजत नहीं है. सख्त इंटरनेशनल गाइडलाइंस और साइंटिफिक बातों की वजह से इन जगहों को कीमती इंसानी विरासत के तौर पर सुरक्षित रखा जाता है. 

चांद पर इंसानियत के पहले कदमों को सुरक्षित रखना 

इन चीजों को सुरक्षित रखने का एक मुख्य कारण उनका ऐतिहासिक महत्व है. अपोलो मिशन के दौरान छोड़े गए इक्विपमेंट और पैरों के निशान, खोज में इंसानियत की कुछ सबसे बड़ी कामयाबी को दिखाते हैं. क्योंकि चांद पर कोई एटमॉस्फियर, हवा या फिर बारिश नहीं है इस वजह से वहां छोड़े गए पैरों के निशान और चीजें लगभग वैसी ही हैं जैसी वे दशकों पहले थीं. उन्हें परेशान करने का मतलब होगा स्पेस में इंसानी इतिहास के एक ऐसे रिकॉर्ड को नुकसान पहुंचाना जिसे बदला नहीं जा सकता. इसी वजह से इन जगहों को अक्सर चांद के आर्कियोलॉजिकल लैंडमार्क का वर्जन बताया जाता है.

स्पेस में कीमती साइंटिफिक एक्सपेरीमेंट

इन चीजों को बचाने का एक और जरूरी कारण उनकी साइंटिफिक वैल्यू है. पीछे छूटी कई चीजें जैसे मेटल के हिस्से, प्लास्टिक और कांच दशकों स्पेस के खराब माहौल में रही हैं. साइंटिस्ट यह स्टडी करना चाहते हैं कि कॉस्मिक रेडिएशन, काफी ज्यादा तापमान और माइक्रोमीटियोराइट के असर के लंबे समय तक संपर्क में रहने के बाद यह चीजें कैसे बदलती हैं. ये चीजें असल में विटनेस प्लेट की तरह काम करती हैं.

इंटरनेशनल एग्रीमेंट चांद की विरासत को बचाते हैं 

इन जगहों को बचाने को स्पेस एक्टिविटीज को कंट्रोल करने वाले इंटरनेशनल एग्रीमेंट भी सपोर्ट करते हैं. ऐसा ही एक फ्रेमवर्क आर्टेमिस अकॉर्ड है. जो हिस्सा लेने वाले देशों को चांद पर ऐतिहासिक रूप से जरूरी जगह को बचाने के लिए बढ़ावा देता है.

आउटर स्पेस ट्रीटी 

एक और जरूरी लीगल फ्रेमवर्क आउटर स्पेस ट्रीटी है. इस ट्रीटी में कहा गया है कि कोई भी देश चांद या फिर दूसरी आसमानी चीजों पर मलिकाना हक का दावा नहीं कर सकता. हालांकि यह इस बात को भी साफ करता है कि स्पेस में भेजी गई चीजें उसी देश के मालिकाना हक और कंट्रोल में रहेंगी जिसने उन्हें लॉन्च किया था.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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