Seawater Drinking: डायरेक्ट क्यों नहीं पी सकते समुद्र का पानी, जानें इंसानी शरीर पर क्या पड़ेगा असर?
Seawater Drinking: धरती का 97% हिस्सा महासागर ही है. इसके बावजूद भी हम समुद्री पानी नहीं पी सकते. आइए जानते हैं क्या है वजह.

- समुद्री पानी में 3.5% नमक होता है, जो किडनी संसाधित नहीं कर सकती।
- ज्यादा नमक शरीर की कोशिकाओं से पानी खींचकर डिहाइड्रेशन बढ़ाता है।
- लगातार सेवन से किडनी पर दबाव पड़ता है, संभवतः काम करना बंद कर देती हैं।
- हाइपरनेट्रेमिया, पाचन संबंधी समस्याएं और हानिकारक सूक्ष्मजीव भी मौजूद हो सकते हैं।
Seawater Drinking: पृथ्वी का लगभग 97% पानी महासागरों में पाया जाता है. इस वजह से ऐसा लग सकता है कि पीने के लिए काफी सारा पानी मौजूद है. लेकिन समुद्र का पानी पीने लायक बिल्कुल भी नहीं होता. ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें काफी ज्यादा नमक होता है. इतने ज्यादा नमक को इंसान का शरीर बिल्कुल भी संभाल नहीं सकता.
ज्यादा नमक इसे बनाता है खतरनाक
समुद्री पानी में लगभग 3.5% नमक होता है. हमारी किडनी सिर्फ दो प्रतिशत तक नमक वाले तरल पदार्थ को ही प्रोसेस कर सकती है. यह बेमेल स्थित एक गंभीर समस्या पैदा करती है. समुद्री पानी हमारे शरीर को हाइड्रेट करने के बजाय सर्वाइवल मोड में डाल देता है.
गंभीर डिहाइड्रेशन की समस्या
समुद्री पानी पीने से असल में आपको और ज्यादा डिहाइड्रेशन हो जाता है. ज्यादा नमक से छुटकारा पाने के लिए आपका शरीर अपनी ही कोशिकाओं से पानी खींच लेता है. इसलिए भले ही आप तरल पदार्थ पी रहे हों लेकिन आपका शरीर इस्तेमाल करने लायक पानी खो रहा होता है. इससे आपको और ज्यादा प्यास लगती है और आप कमजोर महसूस करते हैं.
किडनी पर काफी ज्यादा दबाव
इतने ज्यादा नमक को बाहर निकालने की कोशिश में आपकी किडनी को काफी ज्यादा काम करना पड़ता है. अगर आप लगातार समुद्री पानी पीते रहते हैं तो उन पर इतना ज्यादा बोझ पड़ सकता है कि वे आखिरकार काम करना बंद कर सकती हैं. एक बार जब किडनी का काम रुक जाता है तो स्थिति जानलेवा बन सकती है.
हाइपरनेट्रेमिया का खतरा
खून में नमक की मात्रा ज्यादा होने से एक ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है जिसे हाइपरनेट्रेमिया कहते हैं. इसकी वजह से भ्रम, चिड़चिड़ापन, मांसपेशियों में ऐंठन और गंभीर मामलों में दौरे भी पड़ सकते हैं. यह शरीर के सामान्य तंत्रिकाओं और मांसपेशियों के कामों को बाधित करता है.
पाचन संबंधी परेशानी
समुद्री पानी में मैग्नीशियम सल्फेट जैसे खनिज होते हैं. यह प्राकृतिक रेचक का काम करते हैं. इससे दस्त लग सकते हैं. जिस वजह से शरीर से और भी ज्यादा तरल पदार्थ निकल जाते हैं और डिहाइड्रेशन की प्रक्रिया तेज हो जाती है.
नमक के अलावा समुद्री पानी में हानिकारक सूक्ष्मजीव और प्रदूषण भी हो सकते हैं. पानी को उबालने से बैक्टीरिया तो मर सकते हैं लेकिन इससे नमक नहीं निकलता. इस वजह से यह पीने के लिए अभी भी असुरक्षित ही रहता है.
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