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ऑनलाइन शॉपिंग में एक ही सामान के दो अलग दाम क्यों, जानें MRP के साथ छेड़छाड़ पर क्या है सजा?

ऑनलाइन शॉपिंग में अलग-अलग दाम दिखना हमेशा धोखा नहीं होता है, लेकिन हर बार सही भी नहीं होता है. डायनामिक प्राइसिंग, सेलर प्रतिस्पर्धा और बैंक ऑफर कीमत बदल सकते हैं. आइए जानें.

आज के बिजी लाइफस्टाइल में ज्यादातर लोग ऑनलाइन शॉपिंग करना पसंद करते हैं. कई बार लोग सुबह से शाम तक स्क्रॉल करते रहते हैं और फिर दिखता है कि सुबह मोबाइल पर जो सामान 18,999 रुपये में दिखा था, शाम को वही 20,499 रुपये का दिखने लगा. हैरानी यहीं खत्म नहीं होती है. कभी सर्च पेज पर कुछ और दाम, तो प्रोडक्ट पेज पर कुछ और दाम देखने को मिलता है. ऐसे में सवाल है कि क्या यह तकनीक का खेल है या नियमों की अनदेखी? ऑनलाइन शॉपिंग में एक ही सामान के अलग-अलग दाम दिखना अब आम बात है, आइए जानें कि इस पर कानून क्या कहता है.

एक ही सामान के दो दाम क्यों?

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे Amazon और Flipkart खुद ज्यादातर सामान नहीं बेचते हैं, बल्कि मार्केटप्लेस की तरह काम करते हैं. यानी एक ही प्रोडक्ट कई अलग-अलग सेलर बेच सकते हैं. हर सेलर अपनी लागत, स्टॉक और मुनाफे के हिसाब से कीमत तय करता है. इसी वजह से एक ही ब्रांड और मॉडल के दो अलग दाम दिख सकते हैं. 

कई बार सर्च रिजल्ट में जो कीमत दिखती है, वो शुरुआती कीमत होती है. जैसे ही आप प्रोडक्ट पेज पर क्लिक करते हैं, वहां अलग सेलर या अलग वैरिएंट की कीमत सामने आ जाती है. इससे भ्रम पैदा होता है, लेकिन यह हमेशा नियमों का उल्लंघन नहीं होता है. 

डायनामिक प्राइसिंग का असर

ई-कॉमर्स कंपनियां एल्गोरिदम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करती हैं. मांग बढ़ी तो कीमत ऊपर, स्टॉक ज्यादा हुआ तो कीमत नीचे. त्योहार, सेल, शहर की लोकेशन, यहां तक कि आपकी ब्राउजिंग हिस्ट्री भी असर डाल सकती है. इसे डायनामिक प्राइसिंग कहा जाता है. यही वजह है कि जो सामान सुबह सस्ता था, वह रात तक महंगा दिख सकता है. हालांकि कंपनियां यह दावा करती हैं कि यह पूरी तरह ऑटोमेटेड सिस्टम है, लेकिन ग्राहक के लिए यह बदलाव अक्सर चौंकाने वाला होता है. 

प्लेटफॉर्म ऑफर और बैंक छूट

कई बार एक ही प्रोडक्ट पर दो कीमतें इसलिए दिखती हैं क्योंकि एक बेस प्राइस होता है और दूसरी बैंक ऑफर या एक्सचेंज के बाद की प्रभावी कीमत होती हैं. कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए सबसे कम संभावित कीमत को बड़े अक्षरों में दिखाती हैं. असल भुगतान करते समय शर्तें लागू हो जाती हैं, इसलिए खरीदने से पहले ऑफर की पूरी जानकारी पढ़ना जरूरी है. 

MRP से छेड़छाड़ पर क्या कहता है कानून?

भारत में ई-कॉमर्स नियम 2020 और लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट 2009 साफ कहते हैं कि कोई भी विक्रेता MRP से ज्यादा कीमत पर सामान नहीं बेच सकता है. अगर लिस्टिंग में दिखाई गई दोनों कीमतें MRP से कम हैं, तो यह कानूनी हो सकता है, लेकिन अगर MRP को बढ़ाकर दिखाया गया है या फर्जी स्टिकर लगाकर कीमत ज्यादा बताई गई है, तो यह कानून का उल्लंघन है. ऐसे मामलों में विक्रेता पर जुर्माना लगाया जा सकता है. गंभीर मामलों में उसका अकाउंट सस्पेंड या बंद भी हो सकता है.

डार्क पैटर्न्स से सावधान

सरकार ने हाल के वर्षों में डार्क पैटर्न्स पर भी सख्ती दिखाई है. जैसे सिर्फ 2 पीस बचे हैं दिखाकर दबाव बनाना या सस्ता प्रोडक्ट दिखाकर क्लिक कराने के बाद महंगा विकल्प सामने रखना. अगर आपको अचानक कीमत में तेज बदलाव या गुमराह करने वाली जानकारी दिखे, तो इससे सतर्क रहें. 

उपभोक्ता के अधिकार क्या हैं?

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत हर ग्राहक को सही जानकारी पाने और अपनी पसंद से खरीदारी करने का अधिकार है. अगर आपको लगता है कि आपसे गलत कीमत वसूली गई है या MRP के साथ छेड़छाड़ हुई है, तो आप नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन 1915 पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं. ऑनलाइन शिकायत पोर्टल भी उपलब्ध है. ऑनलाइन शॉपिंग आसान जरूर है, लेकिन समझदारी से की जाए तो ही फायदे का सौदा बनती है. कीमत पर भरोसा करने से पहले उसकी परतें समझना अब जरूरी हो गया है. 

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About the author निधि पाल

निधि पाल एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर हैं. ये यहां पर जीके सेक्शन की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. पिछले 7 साल से पत्रकारिता की दुनिया में कार्यरत निधि पाल ने इससे पहले अमर उजाला डिजिटल, न्यूज 24, ईटीवी भारत हैदराबाद जैसे बड़े संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है.

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने आईआईएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन लखनऊ से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है.

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