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सेना की गाड़ियों पर स्टार क्यों जरूरी है, क्या बताते हैं ये सितारे?

सेना की गाड़ी पर लगा स्टार भी उतना ही अहम होता है, जितना कि सेना के अफसर की वर्दी पर लगे सितारे. यही छोटा सा निशान सैन्य अनुशासन और पहचान का बड़ा सबूत बनता है.

सड़क पर चलते हुए जब अचानक एक सैन्य वाहन दिखता है, तो उस पर बने चमकते सितारे तुरंत ध्यान खींच लेते हैं. कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या यह वही स्टार है जो अफसर की वर्दी पर लगा होता है? या फिर इसका कोई अलग मतलब है? दरअसल, सेना की गाड़ियों पर बना यह सितारा सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि पद, जिम्मेदारी और सरकारी पहचान से जुड़ा एक अहम संकेत है. चलिए समझते हैं. 

सेना की गाड़ियों पर स्टार क्यों जरूरी होता है?

भारतीय सेना के वाहनों पर बने स्टार एक खास पहचान का काम करते हैं. यह बताते हैं कि वाहन किस स्तर के अधिकारी के लिए अधिकृत है और वह आधिकारिक ड्यूटी पर है या नहीं. ये स्टार आम नागरिकों की गाड़ियों और रक्षा मंत्रालय के अधीन सैन्य वाहनों के बीच साफ फर्क दिखाते हैं, ताकि सुरक्षा, आवाजाही और प्रोटोकॉल में कोई भ्रम न रहे.

वर्दी के स्टार और वाहन के स्टार में फर्क

वर्दी पर लगे स्टार अधिकारी की रैंक दिखाते हैं कि कौन लेफ्टिनेंट हैं, कौन मेजर या जनरल. वहीं, वाहन पर लगा स्टार उस समय वाहन के उपयोग से जुड़ा होता है. यानी अगर अधिकारी गाड़ी में मौजूद है, यूनिफॉर्म में है और ड्यूटी पर है, तभी वाहन पर स्टार लगाया जाता है. अधिकारी के उतरते ही या ऑफ-ड्यूटी होने पर स्टार हटा दिया जाता है. 

किन अधिकारियों की गाड़ियों पर लगते हैं स्टार?

सेना में कर्नल से ऊपर के अधिकारियों को वाहन पर स्टार लगाने की अनुमति होती है. ब्रिगेडियर से लेकर जनरल रैंक तक के अधिकारियों की आधिकारिक गाड़ियों पर यह व्यवस्था लागू है. इसका उद्देश्य यह है कि सुरक्षा एजेंसियां और सैन्य कर्मी तुरंत पहचान सकें कि वाहन में किस स्तर का अधिकारी मौजूद है.

कितने स्टार, किस रैंक का संकेत?

चार स्टार चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ, नेवी के एडमिरल और एयर फोर्स के एयर चीफ मार्शल के वाहनों पर होते हैं. तीन स्टार लेफ्टिनेंट जनरल, वाइस एडमिरल और एयर मार्शल की गाड़ियों पर लगाए जाते हैं. दो स्टार मेजर जनरल, रियर एडमिरल और एयर वाइस मार्शल के लिए होते हैं, जबकि एक स्टार ब्रिगेडियर, कमोडोर और एयर कमोडोर की गाड़ियों पर लगाया जाता है. कई बार इनके साथ छोटा त्रिकोणीय या आयताकार झंडा भी लगा होता है, जो सेवा शाखा की पहचान बताता है.

नंबर प्लेट पर बना तीर क्या बताता है?

सैन्य वाहनों की नंबर प्लेट पर बना तीर का निशान, जिसे ब्रॉड एरो कहा जाता है, यह दर्शाता है कि वाहन भारत सरकार और रक्षा मंत्रालय की संपत्ति है. यह चिन्ह ब्रिटिश काल से चला आ रहा है और आज भी सरकारी स्वामित्व की आधिकारिक पहचान माना जाता है.

यह भी पढ़ें: नोटों पर गांधी जी की एंट्री से पहले किसकी तस्वीर थी, RBI ने क्यों लिया फोटो बदलने का फैसला?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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