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Earthquake In Iran: परमाणु परीक्षण करने पर कितनी तीव्रता का आता है भूकंप, कितना खतरनाक होता है यह?

Earthquake In Iran: ईरान में जंग के हालात के बीच 4.3 तीव्रता का भूकंप आया है. ऐसे में चर्चा है कि कहीं वहां परमाणु परीक्षण तो नहीं हुआ है. आइए जानें कि परमाणु परीक्षण पर कितनी तीव्रता का भूकंप आता है.

Earthquake In Iran: ईरान में 3 मार्च यानि आज 4.3 तीव्रता का भूकंप दर्ज हुआ है. जंग के माहौल के बीच कुछ लोगों ने इसे परमाणु परीक्षण से जोड़कर देखना शुरू कर दिया. सोशल मीडिया पर ऐसा दावा किया जा रहा है कि कहीं ईरान ने परमाणु परीक्षण तो नहीं किया है? ऐसे में बड़ा सवाल है कि अगर कोई देश भूमिगत परमाणु परीक्षण करता है तो उससे कितनी तीव्रता का झटका आता है? क्या वह प्राकृतिक भूकंप जितना खतरनाक होता है? आइए, इसे समझते हैं.

ईरान में कहां आया भूकंप?

3 मार्च को ईरान के गराश इलाके में 4.3 तीव्रता का भूकंप आया. इसकी जानकारी United States Geological Survey (USGS) ने दी. एजेंसी के मुताबिक भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर नीचे था. गराश, फार्स प्रांत में स्थित है और यह इलाका भूकंपीय रूप से सक्रिय माना जाता है. ईरान अरेबियन प्लेट और यूरेशियन प्लेट की टक्कर वाले क्षेत्र में आता है. इसी वजह से यहां 4 से 5 मैग्निट्यूड के भूकंप आम माने जाते हैं. 

परमाणु परीक्षण से कितनी तीव्रता का भूकंप?

विशेषज्ञों के मुताबिक, भूमिगत परमाणु परीक्षण से आने वाली तीव्रता विस्फोट की शक्ति यानी यील्ड पर निर्भर करती है. यह शक्ति आमतौर पर TNT के टन या किलो-टन में मापी जाती है. सामान्य तौर पर छोटे परीक्षणों से 3.0 से कम तीव्रता के झटके आ सकते हैं. मध्यम स्तर के परीक्षण 4.5 से 5.5 तक के झटके पैदा कर सकते हैं, वहीं बड़े परीक्षण से झटके 6.0 या उससे ज्यादा मैग्निट्यूड तक दर्ज हो सकते हैं. 

उदाहरण के तौर पर उत्तर कोरिया के 2016 के परमाणु परीक्षण से 5.1 तीव्रता का झटका दर्ज हुआ था. 2017 के बड़े परीक्षण में 6.3 मैग्निट्यूड तक कंपन महसूस किया गया था.

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क्या परमाणु परीक्षण का झटका प्राकृतिक भूकंप जैसा होता है?

परमाणु परीक्षण से पैदा हुई तरंगें और प्राकृतिक भूकंप की तरंगें अलग-अलग होती हैं. भूकंप में प्लेटों की टक्कर से ऊर्जा निकलती है, जबकि परमाणु परीक्षण में अचानक विस्फोट से ऊर्जा फैलती है. ऐसे में वैज्ञानिक सिस्मोग्राफ मशीनों की मदद से यह पहचान लेते हैं कि झटका प्राकृतिक है या परमाणु विस्फोट से जुड़ा हुआ है. परमाणु परीक्षण में तरंगों का पैटर्न अलग होता है और वह आमतौर पर एक बिंदु से बाहर की ओर फैलता है, वहीं प्रकृतिक भूकंप में तरंगे अलग होती हैं. 

कितनी दूर तक होता है असर?

भूमिगत परमाणु परीक्षण का असर आम तौर पर परीक्षण स्थल के आसपास ही ज्यादा महसूस होता है. अधिकतर मामलों में 50 किलोमीटर से ज्यादा दूर तक बड़ा नुकसान नहीं होता है. इसके बाद कुछ दिनों तक छोटे आफ्टरशॉक आ सकते हैं. यह अक्सर जमीन के भीतर बने सिंकहोल के ढहने की वजह से होता है, लेकिन यह प्राकृतिक बड़े भूकंप जैसी व्यापक तबाही नहीं लाता है. इसलिए खतरनाक नहीं होता है.

क्या 4.3 तीव्रता का झटका खतरनाक है?

4.0 से 4.5 तीव्रता के भूकंप आम तौर पर हल्के माने जाते हैं. इससे दीवारों में दरार या हल्का नुकसान हो सकता है, लेकिन बड़े पैमाने पर तबाही कम ही होती है. ईरान जैसे भूकंपीय सक्रिय देश में 4.3 मैग्निट्यूड का झटका असामान्य नहीं है. ऐसे क्षेत्र में इस स्तर के झटके नियमित रूप से दर्ज होते रहते हैं.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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