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Slanted Roof: विदेशों में टेढ़ी छत क्यों बनाई जाती हैं, जानें भारत से क्यों होती हैं ये अलग?

Slanted Roof: विदेशों में सपाट छत नहीं बनाई जाती बल्कि तिकोनी छत बनाई जाती है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह?

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  • भारत में सपाट छतें गर्म जलवायु, कंक्रीट निर्माण के कारण हैं।

Slanted Roof: अगर आपने कभी अमेरिका, कनाडा या यूरोप जैसे देशों में घरों को देखा होगा तो यह पाया होगा कि इनमें से ज्यादातर घरों की छत सपाट होने के बजाय ढलान वाली होती हैं. यह फर्क सिर्फ बनावट के स्टाइल की वजह से नहीं है बल्कि यह मौसम, बनाने के सामान और लोग अपने घरों का इस्तेमाल कैसे करते हैं इस बात पर भी निर्भर करता है.

ढलान वाली छत क्यों जरूरी? 

कई पश्चिमी देशों में ढलान वाली छतों के होने की सबसे बड़ी वजह भारी बर्फबारी और अक्सर होने वाली बारिश है. सर्दियों में छतों पर बर्फ की मोटी परत जमा हो जाती है. अगर छत सपाट होती तो बर्फ का वजन काफी ज्यादा हो सकता था. इस वजह से छत के टूटने या फिर गिरने का खतरा बढ़ जाता. ढलान वाली छत बर्फ और बारिश के पानी को अपने आप नीचे फिसलने देती है. इससे इमारत पर दबाव कम होता है. 

लकड़ी के घरों में पानी की निकासी 

अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में ज्यादातर घर कंक्रीट के बजाय लकड़ी से बनाए जाते हैं. क्योंकि लकड़ी नमी से जल्दी खराब हो सकती है इस वजह से जमा हुआ पानी लीकेज और बनावट को नुकसान पहुंचा सकता है. ढलान वाली छत यह पक्का करती है कि बारिश का पानी जल्दी निकल जाए. इससे लकड़ी के ढांचे को लंबे समय तक होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है. 

ढलान वाले ढांचे ज्यादा मजबूत 

इंजीनियरिंग के नजरिए से तिकोने आकार की छत सपाट छत के मुकाबले ज्यादा मजबूत होती हैं. ढलान वाली छत भार को बेहतर ढंग से बांटती है और तेज हवा, तूफान और चक्रवात का बेहतर ढंग से सामना करती है. 

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बेहतर इंसुलेशन 

ढलान वाली छत के नीचे एक बंद जगह बनती है जिसे एटिक कहा जाता है. इनका इस्तेमाल आमतौर पर सामान रखने के लिए किया जाता है और यह छत और रहने की जगह के बीच हवा को रोक कर इंसुलेशन को भी बेहतर बनाते हैं. इससे घर कड़ाके की ठंड में गर्म रहता है और हीटिंग का खर्चा कम हो जाता है. 

भारत में सपाट छत क्यों?

भारत के ट्रॉपिकल क्लाइमेट की वजह से सपाट छत एक व्यावहारिक विकल्प है. कंक्रीट की छत दिन में गर्मी सोखती है लेकिन उसे अच्छी तरह से इंसुलेट और वाटरप्रूफ किया जा सकता है. क्योंकि ज्यादातर इलाकों में बर्फबारी काफी कम या फिर बिल्कुल भी नहीं होती इस वजह से जमा हुई बर्फ को हटाने के लिए छत में ज्यादा ढलान की जरूरत नहीं होती.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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