एक्सप्लोरर

जनगणना डेटा लीक हो जाए तो क्या होगा, आपके लिए कितना बड़ा खतरा?

2027 Census India: भारत में जनगणना की तैयारी चल रही है. इसी बीच आइए जानते हैं कि अगर जनगणना की जानकारी किसी तरह से लीक हो जाती है तो इससे क्या खतरा होगा.

Show Quick Read
Key points generated by AI, verified by newsroom
  • भारत 2027 जनगणना की तैयारी, संवेदनशील डेटा लीक का खतरा।
  • स्थायी व्यक्तिगत जानकारी लीक होने से गंभीर धोखाधड़ी, पहचान चोरी।
  • विस्तृत पारिवारिक डेटा से शारीरिक/राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी खतरा।

2027 Census India: भारत 2027 की जनगणना की तैयारी कर रहा है और सरकार इसके दूसरे और आखिरी चरण की तैयारी में आगे बढ़ रही है. केंद्र ने घर-घर जाकर की जाने वाले इस सर्वे में पूछने के लिए 40 सवालों का नोटिफिकेशन जारी किया है. इनमें परिवारों और व्यक्तियों के बारे में जरूरी जानकारी शामिल होगी. इन तैयारी के बीच डिजिटल युग में एक बड़ा सवाल काफी ज्यादा अहम हो चुका है. क्या हो अगर जनगणना की इतनी संवेदनशील जानकारी लीक हो जाए? इससे आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा? आइए जानते हैं क्या है इन सवालों के जवाब.

जनगणना का डेटा दूसरे डेटा लीक से अलग कैसे है?

बैंक या फिर सोशल मीडिया में सेंध लगने से पासवर्ड, ईमेल एड्रेस या फिर कार्ड की जानकारी सामने आ सकती है. इनमें से कई जानकारी को बाद में बदला या फिर ब्लॉक किया जा सकता है. जनगणना की जानकारी अलग होती है क्योंकि इसका ज्यादातर हिस्सा ऐसे व्यक्तिगत डेटा से जुड़ा होता है जो स्थायी होता है या फिर जिन्हें बदलना मुश्किल होता है.

किसी व्यक्ति की जन्मतिथि, माता-पिता का नाम, पारिवारिक रिश्ते और स्थायी पते जैसी जानकारी को सेंध लगने के बाद आसानी से बदला ही नहीं जा सकता. अगर ऐसी जानकारी गैर कानूनी तरीके से हासिल कर ली जाए तो अपराधी इसे दूसरे डेटाबेस की जानकारी के साथ मिलकर काफी विस्तृत प्रोफाइल बना सकते हैं. एक और बड़ा अंतर जनगणना की जानकारी का पारिवारिक स्तर का होना है. सिर्फ एक व्यक्ति की जानकारी सामने आने के बजाय लीक हुए डेटासेट से एक ही घर के कई सदस्यों के बीच के रिश्तों का पता चल सकता है.


जनगणना डेटा लीक हो जाए तो क्या होगा, आपके लिए कितना बड़ा खतरा?

ऑनलाइन धोखाधड़ी कैसे बढ़ सकती है? 

एक बड़ा खतरा काफी विश्वसनीय लगने वाली सोशल इंजीनियरिंग हो सकती है. अपराधी असली व्यक्तिगत जानकारी का इस्तेमाल करके धोखाधड़ी वाले कॉल या फिर मैसेज को असली जैसा दिख सकते हैं. सिर्फ ओटीपी मांगने के बजाय स्कैमर को पहले से ही किसी व्यक्ति के परिवार की बनावट, लोकेशन या फिर दूसरी जानकारी के बारे में पता हो सकता है. इससे सरकार, बैंकिंग या फिर नौकरी से जुड़ा कोई नकली संदेश या फिर बातचीत काफी ज्यादा विश्वसनीय लग सकती है.

आपको बता दें कि यह खतरा सिर्फ जानकारी में नहीं है बल्कि उसे लीक हुए दूसरे डेटाबेस के साथ मिलाने में भी है. अपराधी के पास पीड़ित की जितनी सटीक प्रोफाइल होगी उतना ही आसान विश्वसनीय धोखा तैयार करना हो सकता है. 

क्या लीक हुए डेटा से पहचान की चोरी हो सकती है?

एक और संभावित खतरा सिंथेटिक आइडेंटिटी फ्रॉड है. अपराधी किसी एक व्यक्ति की असली जानकारी को मनमर्जी की जानकारी या आसान शब्दों में कहें तो मनगढ़ंत जानकारी के साथ मिलाकर एक नई पहचान बना सकते हैं. ऐसी पहचान का इस्तेमाल धोखाधड़ी वाली वित्तीय गतिविधि, खाते खोलने, शेल कंपनी बनाने या फिर क्रेडिट हासिल करने के लिए किया जा सकता है. अगर अपराधी नकली पहचान को किसी असली व्यक्ति के रिकॉर्ड से जोड़ने में सफल हो जाता है तो पीड़ित को वित्तीय और कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. 

शारीरिक सुरक्षा को खतरा 

घर परिवार से जुड़ी काफी ज्यादा डिटेल वाला डेटाबेस ऑनलाइन धोखाधड़ी से कहीं ज्यादा जोखिम पैदा कर सकता है. ऐसी जानकारी जिससे पता चले कि लोग कहां पर रहते हैं, उनके परिवार में कौन-कौन हैं, वह क्या काम करते हैं या फिर घर की कुछ खास बातें क्या हैं, उसका इस्तेमाल कमजोर लोगों को निशाना बनाने के लिए भी किया जा सकता है.

उदाहरण के लिए अपराधी अकेले रहने वाले बुजुर्गों या फिर आर्थिक रूप से कमजोर माने जाने वाले परिवारों की पहचान करने की कोशिश कर सकते हैं. यही वजह है कि बड़े पैमाने पर आबादी के डेटाबेस की सुरक्षा सिर्फ प्राइवेसी का मामला नहीं है. इसका असर शारीरिक सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा पर भी पड़ सकता है. 

यह भी पढ़ेंः फ्री में UPI देकर पैसा कैसे कमाते हैं फोनपे, पेटीएम जैसे ऐप? जानें पूरा प्रोसेस

राष्ट्रीय स्तर पर क्या हो सकता है? 

जनगणना से सरकारों को आबादी की विशेषता, आवास, रोजगार और सामाजिक आर्थिक संकेतकों के बारे में एक विस्तृत जानकारी मिलती है. अगर काफी ज्यादा डिटेल वाली जानकारी लीक हो जाती है तो दुश्मन ताकत इसके इस्तेमाल खास इलाकों या फिर समुदाय की कमजोरी को समझने के लिए कर सकती हैं.

इस तरह की जानकारी का इस्तेमाल टारगेटेड गलत जानकारी फैलाने या फिर मनोवैज्ञानिक ऑपरेशन के लिए किया जा सकता है. हालांकि इस दावे को सावधानी से देखा जाना चाहिए की जनगणना का डेटा लीक होने से विदेशी सरकार या फिर कंपनी समाज को आसानी से प्रभावित कर पाएंगी. असल खतरा इस बात पर निर्भर होता है कि कौन सी जानकारी लीक हुई है और उसमें कितनी डिटेल थी. 


जनगणना डेटा लीक हो जाए तो क्या होगा, आपके लिए कितना बड़ा खतरा?

जनगणना डेटा के लिए क्या कानूनी सुरक्षा है?

भारत में जनगणना की जानकारी के लिए खास कानूनी सुरक्षा उपाय मौजूद हैं. आपको बता दें कि जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 15 के तहत जनगणना के दौरान इकट्ठा की गई जानकारी गोपनीय रहती है. जनगणना के व्यक्तिगत रिकॉर्ड आम सार्वजनिक रिकॉर्ड नहीं होते और उन्हें आसानी से सार्वजनिक भी नहीं किया जाता. 

जब जनगणना के नतीजे जारी किए जाते हैं तो सरकार आमतौर पर लोगों के नाम और घर परिवार के रिकॉर्ड के बजाय कुल आंकड़ों को ही जारी करती है. इस वजह से साक्षरता, आबादी और जनसांख्यिकीय पैटर्न जैसी जानकारी को स्टडी किया जा सकता है बिना किसी व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक किए.

यह भी पढ़ेंः देश में ऑनलाइन कोचिंग इंडस्ट्री कितनी बड़ी, PM की घोषणा से क्या पड़ेगा फर्क?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

भारत में फांसी के लिए कितनी पेंडेंसी? देखें आंकड़े
भारत में फांसी के लिए कितनी पेंडेंसी? देखें आंकड़े
भारत में जंतर-मंतर, तो अमेरिका-ब्रिटेन समेत दूसरे देशों में कहां होते हैं बड़े प्रदर्शन?
भारत में जंतर-मंतर, तो अमेरिका-ब्रिटेन समेत दूसरे देशों में कहां होते हैं बड़े प्रदर्शन?
मदर ऑफ ऑल बम..कितना ताकतवर है, कौन से शहर पलक झपकते हो जाएंगे स्वाहा?
मदर ऑफ ऑल बम..कितना ताकतवर है, कौन से शहर पलक झपकते हो जाएंगे स्वाहा?
जब तक मुस्कान के साथ जेल में रहेगी छोटी बेटी, क्या तब तक फांसी भी नहीं होगी?
जब तक मुस्कान के साथ जेल में रहेगी छोटी बेटी, क्या तब तक फांसी भी नहीं होगी?
Advertisement

वीडियोज

'इच्छाधारी बीवी' को सजा-ए-मौत!
विदेश से 'मंतर' अराजक 'जंतर'
संविधान नहीं..सड़कतंत्र पर भरोसा ?
CEC पर दिल्ली में NON-STOP बवाल...तख्तापलट का ट्रेलर?
Bollywood News: 'रामायण' का हॉलीवुड में डंका, 3 घंटे 15 मिनट की होगी महागाथा! (16.10.26)
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
अभिजीत दीपके की हिरासत पर शशि थरूर का रिएक्शन, 'दिल्ली पुलिस आपको...'
अभिजीत दीपके को हिरासत में लेने पर शशि थरूर का रिएक्शन, 'दिल्ली पुलिस आपको...'
CBI अधिकारियों से मिले अंकिता भंडारी के माता-पिता, निष्पक्ष जांच का मिला भरोसा
CBI अधिकारियों से मिले अंकिता भंडारी के माता-पिता, निष्पक्ष जांच का मिला भरोसा
प्रशांत भूषण के रिजीम चेंज वाले बयान पर बोले योगेंद्र यादव बोले- 'ये भारत का...'
प्रशांत भूषण के रिजीम चेंज वाले बयान पर बोले योगेंद्र यादव बोले- 'ये भारत का...'
पैनिक अटैक, शराब की लत, 26 दिन रिहैब सेंटर...तलाक के बाद बुरी तरह टूट गए थे युजवेंद्र चहल
पैनिक अटैक, शराब की लत, 26 दिन रिहैब सेंटर...तलाक के बाद बुरी तरह टूट गए थे युजवेंद्र चहल
शमी-भुवी फिर नजरअंदाज, हार्दिक गायब; NZ दौर के लिए टीम इंडिया के चयन पर सवाल
शमी-भुवी फिर नजरअंदाज, हार्दिक गायब; NZ दौर के लिए टीम इंडिया के चयन पर सवाल
'सपा जॉइन कई लेहला का...', सच होगा रवि किशन का तंज? अखिलेश से मिले BJP पार्षद
'सपा जॉइन कई लेहला का...', सच होगा रवि किशन का तंज? अखिलेश से मिले BJP पार्षद
JEE Mains के लिए कब से शुरू हो रहे रजिस्ट्रेशन? ये डॉक्यूमेंट्स रखें तैयार
JEE Mains के लिए कब से शुरू हो रहे रजिस्ट्रेशन? ये डॉक्यूमेंट्स रखें तैयार
मेकअप टिप्स; इंडियन स्किन टोन के लिए ऐसे चुनें सही फाउंडेशन और ब्लश
मेकअप टिप्स; इंडियन स्किन टोन के लिए ऐसे चुनें सही फाउंडेशन और ब्लश
Embed widget