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रोज भोजन में शामिल होती है मिर्च! फिर भी बहुत सारे लोग नहीं जानते इसके तीखेपन की वजह

बहुत सारे पक्षी भी मिर्च खाते हैं, लेकिन उन्हें हमारी तरह तीखापन महसूस नहीं होता है. दरअसल, ऐसा पक्षियों और हमारे अलग-अलग रिसेप्टर्स के कारण होता है.

Facts About Pepper: आजकल, वैश्विक बाजार के लिए सालाना लगभग 30 लाख टन से अधिक मिर्च का उत्पादन होता है जो कि चार अरब डॉलर से अधिक का कारोबार है. दुनिया की लगभग 25 फीसदी आबादी फिलहाल रोजाना मिर्च खाती है. जीनस कैप्सिकम मिर्च दुनिया के सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले मसालों में से एक है. कभी-कभी तो इसे एक अलग व्यंजन के रूप में भी खाया जाता है. हैरान करने वाली बात यह है कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में इस तरह शामिल होने के बाद भी बहुत सारे लोग इसके तीखेपन की वजह नहीं जानते हैं. आज की इस खबर में हम आपको इसके तीखेपन के कारण के साथ-साथ मिर्च से जुड़ी अन्य रोचक जानकारी भी देंगे. पढ़िए इस खबर को पूरा.

मिर्च का इतिहास

वर्ष 1492 में क्रिस्टोफर कोलंबस के नई दुनिया की तलाश करने तक दुनिया के अधिकांश लोग मिर्च से अनजान थे. कई मूल सिद्धांतों के अनुसार मिर्च का संबंध पश्चिमी से उत्तर-पश्चिमी दक्षिण अमेरिका के एंडीज के साथ एक क्षेत्र से है. पुरानी मिर्च यहां जंगली, छोटे लाल, गोल, बेरी जैसा फल थी. मिर्च का इंसानों के भोजन का हिस्सा बनने का सबसे पहला प्रमाण मेक्सिको या उत्तरी-मध्य अमेरिका में 6,000 साल पहले का है. यूरोप में मिर्च 16वीं शताब्दी में पहुंची. वर्तमान समय में मिर्च की पांच घरेलू प्रजातियां उपलब्ध हैं. खायी जाने वाली प्रजातियों में कैप्सिकम एनम, सी फ्रूटसेन्स, सी बैकाटम, सी चिनेंस और सी प्यूब्सेंस हैं. 

भारत में मिर्च का आगमन  

मिर्च पुर्तगालियों के साथ भारत पहुंची थी. वैसे तो मिर्च का जैविक नाम कैप्सिकम एनम है, लेकिन स्थानीय भाषाओं में इसके अलग-अलग नाम पाए जाते हैं. हिंदी में इसे लाल मिर्च, बंगाली व उड़िया में मिर्च को लंका या लंकामोरिच, गुजराती में मार्च व मलयालम में मुलाकू नाम से जाना जाता है. मिर्च के नाम भले ही कई हों लेकिन इसकी तासीर हर जगह एक सी है. विदेशियों के साथ भारत आई मिर्च इस क़दर देसी बन गई कि आज दुनिया की सबसे तीखी मिर्च भूत झोलकिया उत्तर भारतीय राज्य असम में उगाई जाती है. इस मिर्च को नागा मोरिच, नागा झोलकिया और घोस्ट चिली भी कहा जाता है.

मिर्च जलन क्यों पैदा करती है?

दरअसल तीखापन भोजन में कैप्साइसिन की उपस्थिति के कारण होने वाली जलन है. जब हम मिर्च मसाले वाला खाना खाते हैं, तो कैप्साइसिन हमारे मुंह में टीआरपीवी1 रिसेप्टर्स को उत्तेजित कर एक प्रतिक्रिया को बढ़ाता है. टीआरपीवी1 रिसेप्टर्स का उद्देश्य थर्मोरेस्पिरेशन यानी गर्मी का पता लगाना होता है. इसका मतलब यह है कि ये हमें जलन वाले भोजन का सेवन करने से रोकने वाले होते हैं.

सभी मिर्च एक जैसी नहीं होती

मिर्च का तीखापन भी अलग-अलग होता है. मिर्च के तीखेपन को मापने के लिए फार्मासिस्ट विल्बर स्कोविल ने 1912 में एक पैमाना बनाया. स्कोविल हीट यूनिट्स (एसएचयू) में मापा गया यह पैमाना मिर्च खाने वाले लोगों को अनुभव होने वाली कैप्साइसिनोइड संवेदनशीलता पर आधारित है.

कैसे कम हो सकती है जलन?

अगर आपने बहुत ज्यादा तीखा खा लिया है तो चीनी की एक पर्याप्त मात्रा वाले पेय पदार्थ मिर्च की जलन को कम करने में मदद कर सकते हैं. दरअसल, मिठास के स्वाद को सक्रिय करना मूल रूप से हमारे दिमाग को भ्रमित करता है. बहुत ज्यादा उत्तेजना आखिर में मिर्च के तीखेपन को कम कर देगी. एक गिलास दूध, कुछ चम्मच दही या आइसक्रीम से भी जलन में तुरंत राहत मिल सकती है.

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