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दिल्ली में कितना भी हो जाए प्रदूषण, इन लोगों को नहीं मिलेगा वर्क फ्रॉम होम, जानें क्यों?

दिल्ली सरकार ने कुछ सेवाओं को वर्क फ्रॉम होम से पूरी तरह छूट दी है. इन सेवाओं में प्रदूषण कितना भी बढ़ जाए कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम नहीं मिलेगा. क्योंकि यह सेवाएं राजधानी के लिए जरूरी है.

दिल्ली एनसीआर में खतरनाक लेवल पर पहुंच चुके वायु प्रदूषण को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. दरअसल दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए सरकारी और प्राइवेट ऑफिस में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य कर दिया है. इसे लेकर सोमवार यानी 24 नवंबर को पर्यावरण विभाग ने आदेश जारी करते हुए साफ कहा कि राजधानी में लगातार बढ़ रहे एक्यूआई को देखते हुए तुरंत प्रभाव से यह नियम लागू होगा. वहीं सोमवार को दिल्ली का औसत एक्यूआई 382 दर्ज किया गया था जबकि कई इलाकों में यह 400 के पार रहा. यह लगातार तीसरा सप्ताह है जब राजधानी की हवा बहुत खराब श्रेणी में बनी हुई है. इसके अलावा सरकार का ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान का तीसरा चरण लागू है जिसके तहत यह सख्त कदम उठाया गया है. हालांकि वर्क फ्रॉम होम का यह नियम सभी पर लागू नहीं होगा. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि दिल्ली में कितना भी प्रदूषण हो जाए लेकिन किन लोगों को वर्क फ्रॉम होम नहीं मिलेगा और इसके पीछे की वजह क्या है

किन ऑफिस में लागू होगा 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम?

दिल्ली सरकार के आदेश के अनुसार सभी सरकारी विभागों में केवल 50 प्रतिशत कर्मचारी ऑफिस आएंगे. वहीं विभाग का अध्यक्ष और प्रशासनिक सचिवों की उपस्थिति भी अनिवार्य रहेगी. इसके अलावा प्राइवेट ऑफिस में भी केवल 50 प्रतिशत स्टाफ के साथ काम होगा. बाकी कर्मचारी घर से काम करेंगे. वहीं जहां संभव हो ऑफिस के समय अलग-अलग रखने के भी निर्देश दिए गए हैं. जिला मजिस्ट्रेट और डीसीपी काे आदेशों के कड़ाई से पालन की जिम्मेदारी दी गई है. इन नियमों को तोड़ने पर कार्रवाई भी किया जाएगी.

किन लोगों को नहीं मिलेगा वर्क फ्रॉम होम?

दिल्ली सरकार ने कुछ सेवाओं को वर्क फ्रॉम होम से पूरी तरह छूट दी है. इन सेवाओं में प्रदूषण कितना भी बढ़ जाए कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम नहीं मिलेगा. इन सेवाओं में छूट इसीलिए दी गई है क्योंकि यह सेवाएं राजधानी के लिए जरूरी है. जिन कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम नहीं मिलेगा उनमें हॉस्पिटल और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारी, फायर सर्विस, जेल विभाग, सार्वजनिक परिवहन, बिजली आपूर्ति, पानी की आपूर्ति, स्वच्छता और नगर निगम की सेवाएं, आपदा प्रबंधन विभाग, पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण, निगरानी टीमें, धूल नियंत्रण, ग्रैप लागू करने वाली टीमें और बायोमास जलने पर निगरानी करने वाले विभाग के कर्मचारी शामिल है. इन सभी विभागों के कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति नहीं है, क्योंकि यह प्रत्यक्ष रूप से फील्ड में काम करते हैं और उनके बिना शहर की व्यवस्था संभालना मुश्किल हो जाएगा.

कितनी खराब है राजधानी की हवा?

सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अनुसार दिल्ली में 11 दिनों से लगातार एक्यूआई बहुत खराब श्रेणी में है. 24 नवंबर को दिल्ली में एक्यूआई 382 दर्ज किया गया है. वहीं कई निगरानी केंद्रों पर एक्यूआई 400 के ऊपर दर्ज हुआ. इसके अलावा नोएडा 397 और गाजियाबाद 396 एक्यूआई के साथ सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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