History of Mumbai: इस शख्स ने बसाई थी मुंबई, जिसके लिए छिन गई थी उसकी नौकरी? जानें पूरा मामला
History of Mumbai: मुंबई काे आधुनिक शहर बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम तत्कालीन गवर्नर विलियम हॉर्नबी ने उठाया. उन्होंने 18 वीं सदी में हॉर्नबी वेलार्ड प्रोजेक्ट शुरू किया.

History of Mumbai: जिस मुंबई को आज दुनिया भर में सपनों के शहर और भारत के सबसे बड़े महानगरों में से एक माना जाता है. क्या आप जानते हैं कि उस मुंबई को किसने बसाया था. दरअसल आज की मुंबई कभी सात अलग-अलग द्वीपों का समूह हुआ करती थी. इतिहासकारों के अनुसार इन द्वीपों पर प्राचीन समय से आबादी रहती थी और समय-समय पर कई राजवंशों और शासकों का यहां शासन रहा. बाद में यह इलाका पुर्तगालियों के कब्जे में आया और फिर अंग्रेजों तक पहुंच गया. 1661 में पुर्तगाल ने इंग्लैंड के राजा चार्ल्स द्वितीय को शादी के दहेज के तौर पर यह द्वीप सौंप दिए थे. इसके बाद इसके कुछ साल बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने इन द्वीपों का प्रशासन अपने हाथ में ले लिया. उस समय मुंबई अलग-अलग हिस्सों में बंटी हुई थी और समुद्री पानी के कारण लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी होती थी. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि मुंबई किस शख्स ने बसाई थी, जिसके लिए उसकी नौकरी छिन गई थी.
गवर्नर विलियम हॉर्नबी ने बदली मुंबई की तस्वीर
मुंबई काे आधुनिक शहर बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम तत्कालीन गवर्नर विलियम हॉर्नबी ने उठाया. उन्होंने 18 वीं सदी में हॉर्नबी वेलार्ड प्रोजेक्ट शुरू किया. इस परियोजना का मकसद समुद्र के पानी को रोक कर अलग-अलग रूपों को आपस में जोड़ना था. यह काम उसे दौर में बहुत कठिन माना जाता था, क्योंकि इसके लिए समुद्री इलाकों में बड़े पैमाने पर निर्माण करना पड़ा. इस प्रोजेक्ट के जरिए सड़कों और बंदरगाह तैयार किए गए, जिससे धीरे-धीरे द्वीपों के बीच संपर्क आसान होने लगा.
नौकरी चली गई, लेकिन इतिहास में दर्ज हो गया नाम
बताया जाता है कि ईस्ट इंडिया कंपनी इस परियोजना के पक्ष में नहीं थी. कंपनी को लगता था कि इस काम में जरूरत से ज्यादा पैसा खर्च हो रहा है. इसके बावजूद विलियम हॉर्नबी ने अपना काम रुकने नहीं दिया और बिना पूरी मंजूरी का इंतजार किए परियोजना आगे बढ़ाते रहे. बाद में यही फैसला उनके खिलाफ चल गया और उन्हें अपने पद से हटना पड़ा. हालांकि जिस प्रोजेक्ट की वजह से उनकी नौकरी गई, उसी ने आगे चलकर मुंबई की नींव मजबूत कर दी. इसी तरह से इतिहास में विलियम हॉर्नबी का नाम मुंबई को जोड़ने वाले शख्स के तौर पर दर्ज हो गया.
ये भी पढ़ें-Global Fuel Crisis: चीन और अमेरिका को क्यों नहीं है ऊर्जा संकट की चिंता, भारत को ही क्यों करनी पड़ रही बचत?
1845 तक एक हो गए सातों द्वीप
हॉर्नबी वेलार्ड प्रोजेक्ट के बाद मुंबई में लगातार जमीन पुन निर्माण का काम चला रहा. समुद्र से जमीन निकालकर अलग-अलग हिस्सों को जोड़ा गया. आखिरकार 1845 तक सातों द्वीप मिलकर एक बड़े भूभाग में बदल गए. इसी के बाद मुंबई में तेजी से औद्योगिक विकास शुरू हुआ. शहर व्यापार और समुद्री गतिविधियों का बड़ा केंद्र बन गया. अंग्रेजों ने यहां बंदरगाह और कई आधुनिक ढांचे तैयार किए, जिससे मुंबई की अहमियत लगातार बढ़ती गई. इसके बाद 1853 में मुंबई और थाने के बीच देश की पहली रेलवे लाइन शुरू हुई. इसे भारत में आधुनिक परिवहन की शुरुआत माना जाता है. इसके बाद मुंबई में व्यापार और उद्योग तेजी से बढ़ने लगे. 1869 में स्वेज नहर खुलने के बाद मुंबई का समुद्री संपर्क दुनिया के दूसरे शहरों से और मजबूत हो गया यही वजह रही कि मुंबई धीरे-धीरे भारत की आर्थिक राजधानी बनती चली गई.
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL


























