Payal Nag: कौन हैं पायल नाग जिनके हौसले की कहानी जानना चाहती है दुनिया, बिना हाथ-पैर लगाती हैं अचूक निशाने
Payal Nag: एक हादसे में दोनों हाथ और पर गंवाने वाली पायल नाग ने बैंकॉक में हुए वर्ल्ड पैरा आर्चरी सीरीज फाइनेंस में गोल्ड मेडल जीता है. आइए जानते हैं उनकी सफलता की इस कहानी को.

- पायल नाग ने बैंकॉक में वर्ल्ड पैरा आर्चरी में जीता गोल्ड।
- बचपन में हादसे से गंवाए थे चारों हाथ-पैर।
- मुंह और पैरों की मदद से सीखी तीरंदाजी।
- विश्व चैंपियन शीतल देवी को हराकर रचा इतिहास।
Payal Nag: ओडिशा की 18 साल की पैरा एथलीट पायल नाग ने बैंकॉक में हुए वर्ल्ड पैरा आर्चरी सीरीज फाइनेंस में गोल्ड मेडल जीत कर पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है. उनकी कहानी को असाधारण बनाने वाली बात सिर्फ यह मैडल नहीं है बल्कि इसके पीछे का उनका सफर है. बचपन में अपने दोनों हाथ और पैर खो देने के बावजूद पायल ने तीरंदाजी में इतनी महारत हासिल कर ली कि उन्होंने फाइनल में मौजूद चैंपियन शीतल देवी को हरा दिया.
हमेशा के लिए बदल गया सब कुछ
ओडिशा के बोलांगीर जिले में जन्मी पायल नाग एक साधारण परिवार में पली बढ़ीं. उनके पिता मजदूरी करते थे. जब वह सिर्फ 7 से 8 साल की थीं तभी 11000 वोल्ट की बिजली की लाइन से जुड़े एक दुखद हादसे में उनके चारों हाथ पैर काटने पड़े. जिस उम्र में ज्यादातर बच्चे बेफिक्र होते हैं उस उम्र में पायल को जिंदगी जीना ही दोबारा सीखना पड़ा.
पायल की बदली जिंदगी
हादसे के बाद उन्हें बोलांगीर के पार्वतीगिरी बालनिकेतन में भर्ती कराया गया. वहां पायल ने अपने मुंह का इस्तेमाल करके लिखना और पेंटिंग करना सीखना शुरू किया. जो चीज दुनिया को उनकी कमजोरी लगती थी वही उनके आगे बढ़ने की सीढ़ी बनी. हालात के हिसाब से ढलने और खुद को साबित करने के उनके जुनून ने लोगों का ध्यान खींचा और आखिरकार उनकी जिंदगी बदल गई.
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एक अहम मोड़
उनकी प्रतिभा को जाने-माने को कुलदीप वेदवान ने पहचाना. उन्होंने पहले भी कई बड़े पैरा एथलीटों को ट्रेनिंग दी थी. उन्होंने पायल में वह काबिलियत देखी जिसे शायद दूसरों ने नजरअंदाज कर दिया था. उन्हें ट्रेनिंग देना आसान नहीं था. बिना हाथों के तीरंदाजी सीखना आसान नहीं है. दोनों ने मिलकर एक अनोखी तकनीक ईजाद की. जिसमें उन्होंने अपने मुंह और पैरों का इस्तेमाल किया. इसी के साथ धनुष की डोरी को पकड़ने और छोड़ने के लिए एक खास तरह का यंत्र बनाया गया.
हर मुश्किल के बावजूद ट्रेनिंग
जम्मू में स्थित माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड स्पोर्ट्स अकादमी में पायल ने कड़ी ट्रेनिंग ली. हर तीर चलाने के लिए उन्हें संतुलन, ताकत और सटीक निशाने की जरूरत होती थी. यह आम ट्रेनिंग से काफी ज्यादा मुश्किल थी.
ऐतिहासिक गोल्ड मेडल की जीत
बैंकॉक में हुए वर्ल्ड पैरा आर्चरी सीरीज फाइनल्स में पायल ने वह कर दिखाया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. उन्होंने अपनी आदर्श और विश्व चैंपियन शीतल देवी को हराकर गोल्ड मेडल जीता. पायल नाग को अब पहली ऐसी क्वाड्रपल एम्प्यूटी पैरा तीरंदाज के रूप में पहचाना जाता है जिसने इस स्तर पर सफलता हासिल की है.
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