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Smallest Tenure Prime Minister: भारत के किन प्रधानमंत्रियों का रहा है सबसे छोटा कार्यकाल? यहां देखिए लिस्ट

Smallest Tenure Prime Minister: क्या आप जानते हैं देश में सबसे छोटे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री कौन हैं? अगर नहीं तो एक क्लिक में सबसे छोटे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्रियों के बारे में.

Smallest Tenure Prime Minister: भारतीय लोकतंत्र की यात्रा बेहद रोमांच भरी रही रही है. इस यात्रा में हमने ऐसे दौर भी देखे जब राजनीतिक अस्थिरता के कारण कुछ प्रधानमंत्रियों की कुर्सी महज चंद दिनों में चली गई थी, तो वहीं कुछ नेताओं ने लंबे समय तक देश की कमान संभाली. आइए जानते हैं  भारत के उन प्रधानमंत्रियों  के बारे में जिनका कार्यकाल सबसे छोटा रहा और साथ ही उस ऐतिहासिक रिकॉर्ड की, जो अब से कुछ दिनों में  बनने जा रहा है. 

गुलजारी लाल नंदा

गुलजारी लाल नंदा भारत के इतिहास में एक ऐसे पीएम हुए हैं जिनके नाम अनोखा रिकॉर्ड दर्ज है. वे देश के पहले कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने थे. साल 1964 में जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद उन्होंने 13 दिनों के लिए देश की कमान संभाली. इसके बाद 1966 में लाल बहादुर शास्त्री की अचानक मृत्यु के बाद वे फिर से केवल 13 दिनों के लिए ही प्रधानमंत्री बने. इस प्रकार वे कुल मिलाकर महज 26 दिन इस पद पर रहे थे.

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अटल बिहारी वाजपेयी

वहीं, बात करें भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष कहे जाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी की तो वे अपने पहले कार्यकाल में देश के इतिहास में सबसे छोटे  पूर्णकालिक कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री थे. बात साल 1996 के लोकसभा चुनावों की है जब भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी तब अटल जी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन लोकसभा में बहुमत साबित न कर पाने के कारण उनकी सरकार मात्र 13 दिनों में ही गिर गई. हालांकि, बाद में उन्होंने वापसी की और अपना 5 साल का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया.

चौधरी चरण सिंह

सबसे छोटे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्रियों की सूची में किसानों के मसीहा कहे जाने वाले चौधरी चरण सिंह का नाम भी शामिल है. चौधरी चरण सिंह जो साल 1979 में कांग्रेस के बाहरी समर्थन से प्रधानमंत्री बने थे. जनता पार्टी के टूटने के बाद उन्होंने सत्ता संभाली, लेकिन वे केवल 170 दिन ही इस पद पर रह सके. बाद में कांग्रेस ने समर्थन वापस लेने की घोषणा की जिसके कारण उन्होंने संसद सत्र शुरू होने से पहले ही अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. उनके कार्यकाल की सबसे अनोखी बात यह थी कि वे प्रधानमंत्री रहते हुए कभी संसद नहीं जा सके.

एक ओर जहां इतिहास में बेहद छोटे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री रहे हैं, वहीं दूसरी ओर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक नया रिकॉर्ड बनाने जा रहे हैं.साल 2014 से लगातार देश का नेतृत्व कर रहे पीएम मोदी के नाम एक महा-रिकॉर्ड दर्ज होने जा रहा है. वहीं आने वाली 10 जून को वे भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के लगातार सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने के रिकॉर्ड को तोड़ देंगे. वहीं, नेहरू जी लगातार 16 साल और 286 दिन इस पद पर रहे थे, और अब मोदी जी लगातार देश की सेवा करते हुए इस आंकड़े को पार कर एक नया गौरवशाली अध्याय लिखने जा रहे हैं.

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​खबरों के खेल को समझना और उसके पीछे छिपे हर पहलू की नब्ज पकड़ना मेरी खूबी है और जुनून भी.दुनिया को करीब से जानने और जियोपॉलिटिक्स जैसे गंभीर विषयों पर लिखने-पढ़ने के कीड़े ने स्कूल के दिनों में ही काट लिया था. इस सफर की शुरुआत कानपुर के केवी ओईएफ से स्कूलिंग के बाद हुई, जिसे रफ्तार मिली पूरब के ऑक्सफोर्ड वाले तमगे से लैस इलाहाबाद विश्वविद्यालय से, जहां मैंने अंग्रेजी और राजनीति शास्त्र में बीए (BA) किया.

पॉलिटिक्स और दुनियादारी  के इसी कौतूहल को शब्दों का मंच देने के लिए मैंने पत्रकारिता का रुख किया और साल 2025 में देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान आईआईएमसी में दाखिला लिया.आईआईएमसी के उन लाल गलियारों से पत्रकारिता के ककहरे और बारीकियों को बखूबी सीखने के बाद मैं  फिलहाल एबीपी नेटवर्क के साथ बतौर प्रशिक्षु पत्रकार जुड़कर अपने सीखने के सिलसिले को नया आसमान दे रहा हूं.

मिजाज से ठेठ कनपुरिया हूं तो दुनिया के किसी भी कोने में रहूं ,अपने जैसे दो-चार को ढूंढ ही लेता हूं और संयोग से अगर कोई कानपुर-उन्नाव का मिल जाए तो फिर महफिल जमनी तय ही समझो. काम से इतर मुझे लजीज खाने का शौक है. फुर्सत के पलों में किताबें पढ़ना पसंद है और मौका मिलते ही पिच पर चौके-छक्के जड़ने यानी क्रिकेट खेलने का शौक भी बखूबी रखता हूं.सीखने-सिखाने और खबरों के सफर को जीने का यह कनपुरिया अंदाज आगे भी यूं ही जारी रहेगा.

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