पाकिस्तान पर किन-किन देशों का है उधार, जानें सबसे ज्यादा किसके बकाया?
कर्ज के सहारे चल रही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अब बेहद नाजुक मोड़ पर खड़ी है. ऐसे में सवाल ये है कि किन किन देशों ने पाकिस्तान को कितना उधार दे रखा है. चलिए जानें.

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक स्तर पर शांति से जुड़ी एक नई और अहम पहल सामने रखी है. इस पहल के तहत ‘बोर्ड ऑफ पीस’ नाम का एक अंतरराष्ट्रीय मंच बनाने का प्रस्ताव दिया गया है. इस मंच में दुनिया के करीब 60 देशों के शीर्ष नेताओं को शामिल होने का न्योता दिया गया है. इसका मुख्य उद्देश्य युद्ध से बुरी तरह प्रभावित गाजा क्षेत्र में शांति बहाल करना और वहां दोबारा निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है.
इस प्रस्तावित बोर्ड में भारत और पाकिस्तान दोनों को जगह दी गई है. योजना के मुताबिक, जो देश इस पहल के लिए एक अरब डॉलर की आर्थिक मदद देंगे, उन्हें बोर्ड में स्थायी सदस्यता दी जाएगी. इसी क्रम में चलिए यह जान लेते हैं कि पाकिस्तान पर किन-किन देशों का उधार है और सबसे ज्यादा किस देश का बकाया है.
कर्ज के जाल में फंसता पाकिस्तान
पाकिस्तान की पहचान आज एक ऐसे देश की बन चुकी है जो अपनी जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी कर्ज पर निर्भर है. बीते 12 वर्षों में पाकिस्तान का विदेशी कर्ज लगभग दोगुना हो चुका है. साल 2011 में जहां उस पर करीब 66.4 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज था, वहीं 2023 की रिपोर्ट की मानें तो यह बढ़कर 124.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया. भारतीय मुद्रा में देखें तो यह आंकड़ा 103 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा बैठता है.
IMF से पाकिस्तान ने कितना कर्ज लिया?
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF पाकिस्तान के लिए सबसे अहम सहारा बनकर उभरा है. साल 2023 में IMF ने पाकिस्तान को 7 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज दिया था. इसके बाद मार्च 2024 में जलवायु परिवर्तन से निपटने और आर्थिक मजबूती के लिए 1.3 अरब डॉलर की अतिरिक्त मदद दी गई.
एशियन डेवलपमेंट बैंक की भूमिका
एशियन डेवलपमेंट बैंक यानी ADB भी पाकिस्तान का बड़ा कर्जदाता है. दिसंबर 2024 तक ADB ने पाकिस्तान को लोन, अनुदान और तकनीकी सहायता के तहत कुल 43.4 अरब डॉलर देने का वादा किया था. फिलहाल ADB के पोर्टफोलियो में पाकिस्तान के लिए 53 लोन और 3 अनुदान शामिल हैं, जिनकी कुल राशि 9.13 अरब डॉलर है. इसमें खैबर पख्तूनख्वा में ग्रामीण सड़कों के विकास के लिए दिया गया 320 मिलियन डॉलर का लोन भी शामिल है.
विश्व बैंक से भी भारी उधार
विश्व बैंक ने भी पाकिस्तान के साथ बड़ा वित्तीय समझौता किया है. जनवरी 2024 में विश्व बैंक ने जलवायु परिवर्तन, निजी क्षेत्र के विकास और अन्य परियोजनाओं के लिए 20 अरब डॉलर के लोन पर सहमति जताई. कुल मिलाकर विश्व बैंक पाकिस्तान में 365 परियोजनाओं के लिए करीब 49.6 अरब डॉलर की फंडिंग का वादा कर चुका है.
सबसे ज्यादा कर्ज किसका है?
आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान के कुल विदेशी कर्ज का लगभग 30.1 प्रतिशत हिस्सा वर्ल्ड बैंक और इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक जैसे बहुपक्षीय संगठनों का है. IMF से लिया गया कर्ज कुल उधार का करीब 5.7 प्रतिशत है. इसके अलावा लगभग 19 प्रतिशत कर्ज द्विपक्षीय समझौतों के तहत लिया गया है, जिसमें चीन, सऊदी अरब, जापान जैसे देश शामिल हैं.
चीन बना सबसे बड़ा कर्जदाता
द्विपक्षीय कर्ज देने वालों में चीन सबसे ऊपर है. पाकिस्तान के द्विपक्षीय कर्ज का करीब 57.9 प्रतिशत हिस्सा अकेले चीन का है. रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान पर चीन का करीब 12.27 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है. इसे चीन की डेट ट्रैप नीति से जोड़कर देखा जाता है, जहां वह कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देशों को बड़े कर्ज देकर उनके फैसलों पर असर डालता है. चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत पाकिस्तान पर आगे और कर्ज बढ़ने की आशंका है.
सऊदी अरब और अन्य देश
एक समय पाकिस्तान का करीबी माने जाने वाला सऊदी अरब अब निवेश के मामले में दूरी बनाता नजर आ रहा है. कर्ज देने के मामले में जापान पहले, चीन दूसरे और सऊदी अरब तीसरे स्थान पर है. जापान ने पाकिस्तान को करीब 3.48 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया है, जबकि सऊदी अरब से लिया गया उधार लगभग 1.49 लाख करोड़ रुपये है. इसके अलावा फ्रांस, जर्मनी और अमेरिका ने भी पाकिस्तान को बड़ी रकम उधार दी है.
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Source: IOCL
























