Indus Treaty: सिंधु जल संधि सस्पेंड होने के बाद कहां जा रहा पूर्वी नदियों का पानी, कैसे हो रहा इसका इस्तेमाल?
Indus Treaty: हाल ही में पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री ने एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर दावा करने वाले हाथ काट दिए जाएंगे. जानें पूरी जानकारी.

- रावी पर शाहपुर कंडी बैराज से भारत ने पानी रोका।
- नदियों को जोड़कर, उझ परियोजना से जल उपयोग बढ़ाया।
- सिंचाई, बिजली उत्पादन से भारतीय राज्यों को लाभ।
Indus Treaty: सिंधु जल संधि के सस्पेंशन के बाद पूर्वी नदियों के पानी का इस्तेमाल चर्चा का एक बड़ा विषय बन चुका है. पाकिस्तान ने भारत के इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है और उसके नेता बार-बार पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं. हाल ही में पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री ने कहा कि सिंधु जलसंधि के तहत पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर दावा करने वाले हाथ काट दिया जाएंगे. इसी बीच आइए जानते हैं कि जब से यह जल संधि सस्पेंड हुई है उसके बाद से कहां जा रहा है पूर्वी नदियों का पानी.
भारत ने पाकिस्तान की मुश्किल बढ़ा दी
संधि के सस्पेंशन के बाद भारत ने इस बात पर ध्यान दिया कि रावी, ब्यास और सतलुज का पानी बिना इस्तेमाल हुए आगे बहने के बजाय उसके अपने इलाकों में ही रोका जाए और इस्तेमाल किया जाए. सबसे बड़े घटनाक्रमों में से एक है पंजाब जम्मू और कश्मीर बॉर्डर पर रावी नदी पर बने शाहपुर कंडी बैराज का पूरी तरह से चालू होना. पहले रावी का काफी ज्यादा पानी पाकिस्तान की तरफ बहता रहता था. लेकिन जब से यह प्रोजेक्ट चालू हुआ है उस पानी को स्टोर किया जा रहा है और भारत के अंदर इस्तेमाल के लिए दूसरी तरफ मोड़ा जा रहा है.
नदियों को जोड़ने वाले प्रोजेक्ट
भारत ने पानी के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल के लिए नदियों को जोड़ने वाले अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत कर लिया है. ब्यास-सतलुज लिंक सिस्टम के जरिए ब्यास नदी के पानी को नहरों और सुरंगों के बड़े नेटवर्क का इस्तेमाल करके सतलुज नदी की तरफ मोड़ा जाता है. इससे पानी को सिंचाई और दूसरे कामों के लिए भारत के अंदरूनी इलाकों तक पहुंचाना मुमकिन हो सकता है.
वहीं दूसरी तरफ रावी की सहायक नदी उझ पर बन रहे मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट का काम जम्मू और कश्मीर के कठुआ और सांबा जिलों की तरफ पानी के अतिरिक्त स्टोरेज और बहाव को मोड़ने में मदद करना है.
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पानी कई राज्यों में सिंचाई का दायरा बढ़ा रहा है
रोके गए पानी का एक बड़ा हिस्सा अब खेती की सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. पंजाब और हरियाणा को खेती में मदद के लिए नहर का अतिरिक्त पानी मिल रहा है . जम्मू और कश्मीर में शाहपुर कंडी डैम से निकलने वाली नहरों से सांबा और कठुआ जिलों में लगभग 32000 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होने की उम्मीद है. इससे स्थानीय खेती को काफी ज्यादा बढ़ावा मिलेगा.
वहीं दक्षिण की तरफ सतलुज और ब्यास नदियों के अतिरिक्त पानी को इंदिरा गांधी नहर प्रणाली के जरिए राजस्थान भेजा जा रहा है. इसके बाद रेगिस्तानी इलाकों में सिंचाई का दायरा बढ़ाने में मदद मिल रही है, जहां पानी की उपलब्धता हमेशा से कम रही है.
हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट से बिजली बन रही
सिंचाई के अलावा नदी के पानी को कंट्रोल तरीके से जमा करने और छोड़ने से हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर बनाने में भी मदद मिल रही है. बिजली बनाने के लिए नदी के नियंत्रित बहाव का इस्तेमाल किया जा रहा है. इन प्रोजेक्ट से बनी बिजली को नेशनल पावर ग्रिड के जरिए पंजाब, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में भेजा जाता है.
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