जब सोने की चिड़िया था भारत तब कितनी थी इकोनॉमी, कौन-कौन से देश थे भारत से पीछे
Ancient Indian Economy: कभी पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था का चौथाई हिस्सा अकेले भारत संभालता था, लेकिन क्या आप जानते हैं उस दौर में कौन-कौन से बड़े देश भारत से पीछे थे. चलिए इस बारे में बताएं.

भारत को सदियों तक सोने की चिड़िया कहा गया है और यह महज एक कहावत नहीं, बल्कि आर्थिक सच्चाई थी. प्राचीन और मध्यकालीन दौर में भारत न सिर्फ सांस्कृतिक और ज्ञान की धरती था, बल्कि पूरी दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी थी. ऐतिहासिक शोध और आर्थिक आकलनों के अनुसार, भारत ने लगभग दो हजार साल तक वैश्विक अर्थव्यवस्था का नेतृत्व किया. यही वजह थी कि यूरोप से लेकर अरब और एशिया तक के व्यापारी भारत की ओर आकर्षित रहते थे. चलिए जानें कि उस दौर में कौन से देश भारत से पीछे थे.
आर्थिक योगदान का इतिहास
अंतरराष्ट्रीय आर्थिक इतिहासकार एंगस मैडिसन के अध्ययन से पता चलता है कि ईस्वी 1 से लेकर 1700 तक भारत का वैश्विक जीडीपी में हिस्सा सबसे अधिक था. ईस्वी 1 के आसपास भारत का विश्व अर्थव्यवस्था में योगदान करीब 33% था. वर्ष 1000 तक यह 28% और 1700 में लगभग 27% रहा. इसका सीधा मतलब यह था कि हर चार में से एक रुपया दुनिया के कुल उत्पादन का भारत में पैदा होता था. यह स्थिति उस समय की आर्थिक ताकत का स्पष्ट प्रमाण है.
भारत को क्यों कहा गया सोने की चिड़िया
भारत की समृद्धि का आधार उसका विशाल कृषि तंत्र, कपड़ा उद्योग, मसाले, सोना, हीरे, वूट्ज स्टील और रेशमी वस्त्र थे. भारतीय कपास और मसालों की इतनी मांग थी कि यूरोपीय व्यापारी समुद्री रास्तों की खोज में निकल पड़े थे. यूरोप में औद्योगिक क्रांति से पहले तक भारत का उत्पादन और निर्यात, विश्व व्यापार का अहम हिस्सा था. यही कारण है कि भारत को सोने की चिड़िया की उपाधि मिली.
भारत से पीछे कौन-कौन से देश
इतिहास गवाह है कि भारत की आर्थिक ताकत के मुकाबले यूरोप बहुत छोटा खिलाड़ी था. इंग्लैंड, फ्रांस, स्पेन और जर्मनी जैसे देश उस समय अपनी आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहे थे. अमेरिका उस समय तक उपनिवेशीकरण की प्रक्रिया में था और वहां की अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर नगण्य थी. चीन ही एकमात्र ऐसा देश था जो उत्पादन और व्यापार में भारत का करीबी प्रतिद्वंद्वी रहा, हालांकि कई कालखंडों में भारत उससे भी आगे रहा.
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