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क्या सच में सरदार पटेल ने लगाया था RSS पर बैन, जिसको लेकर कांग्रेस और BJP में ठन गई? जानें किस्सा

Sardar Patel RSS: सरदार पटेल ने वाकई RSS पर बैन लगाया था या यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी है? आज भी यह सवाल बीजेपी और कांग्रेस की बहस के केंद्र में है. चलिए इसकी सच्चाई जानते हैं.

राजनीति में कुछ सवाल वक्त के साथ फीके नहीं पड़ते, बल्कि हर चुनाव, हर भाषण में दोबारा जिंदा हो जाते हैं. ऐसा ही एक सवाल फिर चर्चा में है कि क्या सरदार वल्लभभाई पटेल ने वाकई RSS पर बैन लगाया था? दरअसल बीते दिनों कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरदार पटेल की जयंती पर कहा कि RSS पर बैन लगना चाहिए, सरदार पटेल ने भी इस पर बैन लगाया था. उनकी इस बात को लेकर सियासत का पारा एकदम चढ़ गया है और कांग्रेस व बीजेपी में ठन गई है. इसी क्रम में चलिए जान लेते हैं कि क्या वाकई में सरदार पटेल ने RSS पर बैन लगाया था.

कितना पुराना है यह विवाद

असल में, यह विवाद नया नहीं है. इसकी जड़ें 1948 में हैं वो साल, जब देश ने अपने इतिहास की सबसे दर्दनाक घटना देखी, महात्मा गांधी की हत्या. 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने बिड़ला भवन में गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस घटना के बाद देश सदमे में था, और तत्कालीन गृह मंत्री सरदार पटेल ने स्थिति को संभालने की जिम्मेदारी उठाई.

कब RSS को किया गया बैन

4 फरवरी 1948 को भारत सरकार के गृह विभाग ने एक आधिकारिक आदेश जारी किया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को गैरकानूनी संगठन घोषित किया गया. सरकार की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया था कि ‘देश में सक्रिय नफरत और हिंसा की ताकतें भारत की आजादी को खतरे में डाल रही हैं, इसलिए सरकार ने RSS को प्रतिबंधित करने का फैसला किया है.’

बैन लगाने पर क्या बोले थे सरदार पटेल

यह प्रतिबंध लगभग 17 महीनों तक चला, फरवरी 1948 से लेकर जुलाई 1949 तक. इस दौरान RSS के नेताओं ने लगातार प्रतिबंध हटाने की कोशिश की, लेकिन पटेल सख्त रुख पर कायम रहे. उन्होंने हिंदू महासभा के नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी को चिट्ठी लिखी थी जिसमें उन्होंने कहा- ‘RSS की गतिविधियों ने राज्य और सरकार के अस्तित्व पर खतरा पैदा किया है. उनकी सोच और भाषण सांप्रदायिक जहर से भरे हैं.’ पटेल ने RSS प्रमुख एम.एस. गोलवलकर (गुरुजी) को भी दो बार पत्र लिखे. सितंबर 1948 में उन्होंने लिखा था- ‘हिंदू समाज को संगठित करना एक बात है, लेकिन निर्दोषों के खिलाफ हिंसा करना दूसरी बात. गांधी जी का बलिदान इसी सांप्रदायिक जहर का परिणाम था.’

कब हटा प्रतिबंध

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती है. बाद में गोलवलकर और पटेल की मुलाकातें हुईं. उन्होंने RSS पर से बैन हटाने के लिए कहा. इस पर सरदार पटेल ने साफ शर्तें रखीं. उन्होंने कहा, ‘RSS को अपना लिखित संविधान बनाना होगा, लोकतांत्रिक ढंग से काम करना होगा, और राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहना होगा.’ जब गोलवलकर ने ये शर्तें मान लीं और एक लिखित आश्वासन दिया, तब 11 जुलाई 1949 को प्रतिबंध हटाया गया था.

छिड़ी बीजेपी और कांग्रेस की जंग

यानी सच यह है कि सरदार पटेल ने RSS पर बैन लगाया था, लेकिन यह स्थायी नहीं था. यह तब हटाया गया जब RSS ने खुद को एक सांस्कृतिक संगठन के रूप में परिभाषित किया और लोकतांत्रिक ढांचे में काम करने का वादा किया. आज, इस पुराने फैसले को लेकर कांग्रेस और बीजेपी में फिर जंग छिड़ गई है. कांग्रेस पटेल को अपनी विरासत बताती है, तो बीजेपी उन्हें ‘आयरन मैन ऑफ इंडिया’ कहती है. 

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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