मंदिर में फिल्मी गानों पर डांस किया तो कितनी मिलेगी सजा, जानें क्या कहता है कानून?
मंदिर में फिल्मी गानों पर किया गया डांस सिर्फ विवाद नहीं, कानूनी कार्रवाई का कारण भी बन सकता है. श्रीशैलम मंदिर का मामला बताता है कि सीमा लांघने पर कानून सख्त हो सकता है.

सोचिए, जहां लोग श्रद्धा और शांति की तलाश में पहुंचते हैं, वहीं अचानक फिल्मी गानों पर डांस का वीडियो सामने आ जाए. आस्था की जगह पर मस्ती का यह नजारा अब बड़ा विवाद बन चुका है. आंध्र प्रदेश के एक प्रसिद्ध मंदिर श्रीशैलम में फिल्मी गाने पर डांस से जुड़ा यह मामला सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है. आइए जानें कि मंदिर में फिल्मी गानों पर डांस करने पर कितनी सजा मिलती है.
श्रीशैलम मंदिर का मामला क्यों चर्चा में
आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध श्रीशैलम मंदिर में नए साल की पार्टी के दौरान हुआ एक घटनाक्रम इन दिनों सुर्खियों में है. आरोप है कि मंदिर परिसर में कुछ कर्मचारियों ने फिल्मी गानों पर डांस किया है. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लोगों की नाराजगी सामने आने लगी. श्रद्धालुओं ने इसे मंदिर की गरिमा और धार्मिक मर्यादा के खिलाफ बताया.
पुलिस ने क्या कार्रवाई की
विवाद बढ़ने के बाद पुलिस ने तुरंत संज्ञान लिया और मंदिर के पांच कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया. पुलिस का कहना है कि यह घटना मंदिर के नियमों और अनुशासन का उल्लंघन है. मामले की जांच की जा रही है कि यह सब जानबूझकर किया गया या लापरवाही के कारण हुआ.
मंदिर में ऐसा करना अपराध कैसे बनता है
कानूनी नजरिए से देखा जाए तो धार्मिक स्थलों पर ऐसा कोई भी काम, जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हों, अपराध की श्रेणी में आ सकता है. भारतीय कानून में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने से जुड़े प्रावधान मौजूद हैं. अगर यह साबित हो जाए कि किसी कृत्य से जानबूझकर आस्था को ठेस पहुंचाई गई, तो संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है.
कितनी हो सकती है सजा
कानून के तहत धार्मिक भावनाओं को आहत करने या पूजा स्थल की मर्यादा भंग करने पर जुर्माना, जेल या दोनों की सजा का प्रावधान हो सकता है. सजा इस बात पर निर्भर करती है कि मामला कितना गंभीर है, मंशा क्या थी और इससे कितने लोगों की भावनाएं प्रभावित हुईं. साथ ही, स्थानीय मंदिर कानून और प्रशासनिक नियम भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं.
मंदिरों में नियम क्यों होते हैं सख्त
मंदिर केवल इमारत नहीं, बल्कि आस्था का केंद्र होते हैं. यहां आने वाले लोग शांति, भक्ति और अनुशासन की उम्मीद करते हैं. इसलिए मंदिर परिसरों में व्यवहार को लेकर सख्त नियम बनाए जाते हैं. इन नियमों का उद्देश्य किसी की आजादी रोकना नहीं, बल्कि धार्मिक मर्यादा और श्रद्धालुओं की भावनाओं की रक्षा करना होता है.
सोशल मीडिया के दौर में बढ़ी चुनौतियां
आज के समय में रील और वीडियो बनाने का चलन तेजी से बढ़ा है. कई बार लोग लाइक और व्यूज के चक्कर में जगह और परिस्थिति की मर्यादा भूल जाते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक स्थलों पर कंटेंट बनाने से पहले नियमों और कानून की जानकारी होना बेहद जरूरी है.
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Source: IOCL























