प्रेस कार्ड और PIB कार्ड में क्या है अंतर? किसका कहां होता है इस्तेमाल
प्रेस कार्ड मीडिया संस्थान द्वारा जारी की गई साधारण पहचान है, जबकि पीआईबी कार्ड भारत सरकार द्वारा योग्य पत्रकारों को दी जाने वाली आधिकारिक मान्यता है जिससे केंद्रीय मंत्रालयों तक पहुंच मिलती है.

देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर रिपोर्टिंग कर रहे मीडियाकर्मियों और पुलिस के बीच हुई नोकझोंक ने पत्रकारों के पहचान पत्रों पर एक नई बहस छेड़ दी है. मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन को कवर कर रहे स्वतंत्र पत्रकारों को दिल्ली पुलिस ने रोक दिया और उनसे पीआईबी कार्ड दिखाने की शर्त रख दी. प्रेस कार्ड होने के बावजूद पत्रकारों को हटाए जाने और कुछ महिला पत्रकारों द्वारा यौन उत्पीड़न व बदसलूकी के गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद मामला क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है. इस घटना के बाद आम लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर प्रेस कार्ड और पीआईबी कार्ड में ऐसा क्या फर्क होता है.
संस्थानों से मिलने वाला प्रेस कार्ड
किसी भी पत्रकार के पास मौजूद प्रेस कार्ड असल में उस निजी मीडिया हाउस की पहचान होता है, जहां वह काम करता है. चाहे वह कोई अखबार हो, टीवी चैनल हो या फिर कोई रजिस्टर्ड न्यूज वेब पोर्टल, वहां के संपादक अपने रिपोर्टर या कैमरामैन को यह आईडी कार्ड जारी करते हैं. इस कार्ड का मुख्य मकसद फील्ड में काम करते समय यह साबित करना होता है कि संबंधित व्यक्ति एक सक्रिय मीडियाकर्मी है. इस कार्ड को जारी करने के लिए सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होता, बल्कि संस्थान अपने हिसाब से कर्मचारी को यह कार्ड देता है.
पीआईबी कार्ड क्या है और इसका क्या काम?
दूसरी तरफ पीआईबी कार्ड भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत आने वाले पत्र सूचना कार्यालय द्वारा जारी किया जाने वाला एक बेहद खास पहचान पत्र है. यह कोई साधारण आईडी कार्ड नहीं, बल्कि केंद्र सरकार द्वारा पत्रकार को दी जाने वाली एक आधिकारिक मान्यता है. पीआईबी कार्डधारक पत्रकारों को देश के राष्ट्रपति भवन, संसद भवन, केंद्रीय मंत्रालयों और प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों जैसी बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल जगहों पर बिना किसी रुकावट के प्रवेश की अनुमति मिलती है.
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पीआईबी मान्यता मिलने के कड़े नियम
पीआईबी कार्ड हासिल करना किसी भी पत्रकार के लिए इतना आसान नहीं होता, क्योंकि इसके लिए भारत सरकार ने बेहद कड़े नियम बनाए हैं. इस कार्ड को पाने के लिए पत्रकार के पास मुख्यधारा के मीडिया संस्थान में कम से कम 5 साल का पूर्णकालिक काम करने का अनुभव होना जरूरी है. इसके अलावा जिस अखबार या चैनल में वह कार्यरत है, उसका प्रसार, व्यूअरशिप और राजस्व सरकार के तय मानकों के अनुसार होना चाहिए. यही वजह है कि हर पत्रकार के पास यह विशेष मान्यता कार्ड नहीं होता है.
सरकारी सुविधाएं और विशेषाधिकार का लाभ
पीआईबी कार्ड धारक पत्रकारों को न केवल सरकारी कार्यक्रमों में पहुंच मिलती है, बल्कि केंद्र सरकार उन्हें कई तरह की विशेष सुविधाएं भी देती है. ऐसे पत्रकारों को केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के तहत बेहतरीन इलाज की सुविधा मिलती है. इसके साथ ही, सरकारी प्रेस वार्ताएं, बजट सत्र और अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों की आधिकारिक जानकारी सबसे पहले इन्हीं पत्रकारों तक पहुंचाई जाती है. वहीं साधारण प्रेस कार्ड धारक केवल अपने संस्थान के दायरे और सार्वजनिक जगहों तक ही सीमित रहते हैं.

दोनों कार्डों का बुनियादी फर्क
संक्षेप में समझें तो साधारण प्रेस कार्ड आपको केवल एक मीडियाकर्मी के रूप में पहचान दिलाता है, जबकि पीआईबी कार्ड आपको भारत सरकार की नजरों में एक प्रामाणिक और मान्यता प्राप्त पत्रकार का दर्जा देता है. आम प्रेस कार्ड से आपको हर जगह वीआईपी एंट्री या सरकारी सुरक्षा घेरे में जाने की छूट नहीं मिल सकती है. जंतर-मंतर जैसी जगहों पर सामान्य प्रेस कार्ड वाले रिपोर्टर काम कर सकते हैं, लेकिन पुलिस द्वारा पीआईबी कार्ड की मांग करना पूरी तरह से सरकारी और गैर-सरकारी कवरेज के अंतर से जुड़ा हुआ मामला है.
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