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हराम और हलाल में क्या है अंतर? इस्लाम में खाने से पहले इसे क्यों चेक किया जाता है

Halal And Haram Food In Islam: इस्लाम में हलाल और हराम बहुत मायने रखता है. मुस्लिमों में खाद्य पदार्थों को लेकर भी कानून हैं, चलिए जानें कि इस्लाम में खाने से पहले हलाल और हराम क्यों जांचते हैं.

इस्लाम धर्म में पहनने से लेकर खाने-पीने की चीजों तक में भी बहुत सारे नियम कानून देखने को मिलते हैं. कुछ ऐसा ही हराम और हलाल को लेकर भी है. इस्लाम धर्म की मानें तो उनके यहां शिक्षा यह तय करती है कि कौन सी खाने-पीने की चीजें हलाल यानि कि पाक और कौन सी हराम यानि नापाक हैं. इस्लाम में हराम और हलाल सिर्फ खाने-पीने की चीजों पर ही लागू नहीं होता है, बल्कि इस्लाम के अनुसार जिंदगी जीने के लिए जिन तौर-तरीकों को उचित माना गया है, वो सभी हलाल होते हैं और जिनको इजाजत नहीं है, वो सभी हराम माने जाते हैं. चलिए जानें कि मुस्लिमों में खाने-पीने के दौरान इसे क्यों जांचते हैं.

हलाल और हराम क्या होता है

इस्लाम में इस बात के साफ तौर पर निर्देश हैं कि क्या हलाल है और क्या हराम है. भाषाई विद्वानों की मानें तो हलाल और हराम अरबी शब्द हैं. यानि कि जो चीज वैध यानि जायज होती है, और जिस बात को करने की इजाजत होती है वो हलाल माना जाता है और हराम उसे कहते हैं, जो कि अवैध होता है. जिस चीज को करना उचित न माना गया हो या इस्लाम जिसकी इजाजत नहीं देता है, और जिसके करने पर रोक है वह हराम होता है. 

इस्लाम में खाने-पीने से पहले इसे क्यों जांचते हैं?

इस्लाम धर्म की मानें तो आहार व्यक्ति को जीवन में दिशा दिखाता है. इसलिए मुस्लिमों में हराम खाद्य पदार्थ के खाने को लेकर सख्त पाबंदी है. हराम खाद्य पदार्थ को खाना इस्लाम धर्म के सिद्धांतों के खिलाफ होता है. इसीलिए हराम कहे जाने वाले खाद्य पदार्थों की जानकारी होना मुसलमानों के लिए उनके सिद्धांतो पर अमल करने के जैसा होता है. यही वजह है कि वे कोई भी खाने-पीने की चीज को पहले जांचते हैं उसके बाद उसे खाते हैं. 

इस्लाम में कौन से खाद्य पदार्थ हराम

मुस्लिमों में सुअर का मांस और उससे बने खाद्य पदार्थ सबसे ज्यादा निषेध माने जाते हैं. इसका जिक्र कुरान की आयतों में देखने को मिलता है, (सूरह अल-बक़रा, 2:173; सूरह अल-अनम, 6:145; सूरह अल-इसरा, 17:16). सुअर के मांस से बना कोई भी पदार्थ जैसे कि बेकन या हैम जो कि खास तरह का मीट होता है, इसका इस्तेमाल करने की भी इस्लाम में मनाही है. इस्लाम में जानवरों के खून का सेवन करना और किसी भी तरह से उसका इस्तेमाल अशुद्ध और नापाक करता है. इसके अलावा नशीले पदार्थों का सेवन, मांसाहारी पशु और शिकारी पक्षी, मृत मांस भी हराम माना गया है. 

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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