एक्सप्लोरर

ISRO Atomic Clock: क्या है एटॉमिक घड़ी, इसे अंतरिक्ष में ISRO ने क्यों भेजा ?

ISRO Atomic Clock: हाल ही में इसरो ने अंतरिक्ष में एटॉमिक घड़ी भेजी है. आइए जानते हैं कि इसरो ने यह कदम क्यों उठाया है और आखिर एटॉमिक घड़ी का क्या फायदा होगा.

Show Quick Read
Key points generated by AI, verified by newsroom
  • इसरो ने NVS-03 उपग्रह में स्वदेशी परमाणु घड़ी भेजी।
  • सटीक नेविगेशन, NavIC प्रणाली के लिए यह महत्वपूर्ण है।
  • यह सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और डिजिटल सेवाओं को मजबूत करेगा।

ISRO Atomic Clock:  एटॉमिक घड़ी सबसे सटीक समय को तय करने वाला एक उपकरण है. पारंपरिक घड़ियों के उलट जो हाथ, पेंडुलम या फिर क्वार्ट्ज क्रिस्टल पर निर्भर होती हैं यह रुबिडियम या फिर सीजन जैसे परमाणुओं में ऊर्जा के स्तर से जुड़े प्राकृतिक कंपन  की फ्रीक्वेंसी की मदद से समय को मापती है. यह सटीकता उपग्रह नेवीगेशन के लिए परमाणु घड़ियों को जरूरी बनाती है, जहां पृथ्वी पर स्थिति की गणना के लिए सटीक समय जरूरी है.

हाल ही में इसरो ने भी GSLV-F18 रॉकेट पर अपने NVS-03  नेविगेशन सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया. सेटेलाइट में एक स्वदेशी रुबिडियम एटॉमिक घड़ी है जो अहमदाबाद में अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र द्वारा विकसित अपनी तरह की तीसरी है. मिशन भारत में विकसित टाइमिंग तकनीक को अंतरिक्ष में रखता है और देश की क्षेत्रीय नेविगेशन प्रणाली NavIC का समर्थन करता है. 

नेविगेशन के लिए समय क्यों मायने रखता है? 

गूगल मैप्स और भारत के NavIC सहित सैटलाइट नेवीगेशन सिस्टम सेटेलाइट से पृथ्वी पर रिसीवर तक रेडियो सिग्नल प्रसारित करके काम करते हैं. एक रिसीवर यह माप कर अपने स्थान की गणना करता है कि किसी सिग्नल को उपग्रह से डिवाइस तक पहुंचने में कितना वक्त लगता है. क्योंकि यह सिग्नल लाइट की रफ्तार से चलते हैं, यहां तक की काफी छोटी समय की गलती भी बड़ी स्थिति गलती पैदा कर सकती है. 

सिर्फ एक नैनोसेकंड की गलती जमीन पर सैकड़ों मीटर की विसंगति पैदा कर सकती है. परमाणु घड़ियां इन घटनाओं के लिए जरूरी काफी ज्यादा सटीक समय माप प्रदान करती हैं.  इस वजह से उनकी भूमिका इस बात को पक्का करने में केंद्रित है कि नेवीगेशन संकेतकों का इस्तेमाल स्थानों को विश्वसनीय और सटीक रूप से तय करने के लिए किया जा सकता है. 


ISRO Atomic Clock: क्या है एटॉमिक घड़ी, इसे अंतरिक्ष में ISRO ने क्यों भेजा ?

भारत के NavIC सिस्टम का समर्थन करना 

भारत अपनी खुद के क्षेत्रीय नेविगेशन प्रणाली चलाता है जिसे NavIC या फिर भारतीय तारामंडल के साथ नेविगेशन के रूप में जाना जाता है. प्रणाली नेविगेशन सेवा देती है और सेटेलाइट पर सटीक घड़ियां इसके संचालन के लिए जरूरी हैं. भारत पहले इस तरह की घड़ियों के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भर था. अंतरिक्ष में इस विदेशी परमाणु घडी भेजने से निर्भरता कम हो जाती है और ज्यादा तकनीकी आत्मनिर्भरता का समर्थन होता है.

घरेलू स्तर पर विकसित टाइमिंग तकनीक का इस्तेमाल का उद्देश्य NavIC को ज्यादा सुरक्षित, सटीक और मजबूत बनाना है. NVS-03 सेटेलाइट की रुबिडियम घड़ी एक जरूरी घटक के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भर होने के बजाय सैटलाइट नेवीगेशन के लिए भारत की अपनी क्षमताओं को विकसित करने में एक और कदम को दर्शाती है.  

स्ट्रैटेजी और सिक्योरिटी का महत्व 

NavIC का इस्तेमाल नागरिकों के लिए रोजमर्रा के नेविगेशन से हटकर है. यह भारत की सीमाओं पर तैनात कर्मियों और व्यापारी नौसेना का भी समर्थन कर सकता है. स्वदेशी घड़ी का उद्देश्य देश के हर हिस्से और इसकी सीमाओं से परे 1500 किलोमीटर तक सटीक नेविगेशन उत्तर देना है. 

यह कवरेज राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है. ऐसा इसलिए क्योंकि यहां भरोसेमंद स्थिति संबंधित जानकारी सीमावर्ती क्षेत्रों और समुद्री सेटिंग में गतिविधि का समर्थन कर सकती हैं. सटीक समय रिसीवर द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले नेविगेशन संकेत को रेखांकित करता है जिससे परमाणु घड़ी प्रणाली का एक जरूरी हिस्सा बन जाता है.


ISRO Atomic Clock: क्या है एटॉमिक घड़ी, इसे अंतरिक्ष में ISRO ने क्यों भेजा ?

एक राष्ट्र एक समय पहल

यह तकनीक वन नेशन वन टाइम पहल के जरिए से डिजिटल आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के बड़े प्रयास में योगदान देती है. सत्यापित और सिंक्रोनाइज समय उन प्रणालियों के लिए जरूरी है जो कंसिस्टेंट टाइम रेफरेंस पर निर्भर करते हैं. उम्मीद है कि स्वदेशी परमाणु घड़ी बैंकिंग सेवा, मोबाइल नेटवर्क, डिजिटल संचार और कंप्यूटर सिस्टम में सटीक समय बनाए रखने में मदद करेगी. 

यह क्षेत्र अपने परिचालन के लिए कोऑर्डिनेशन वाले समय पर भरोसा करते हैं. सटीक समय का एक भरोसमंद घरेलू स्रोत डिजिटल सेवाओं में स्थिरता का समर्थन कर सकता है और विदेशी टेक्नोलॉजी पर निर्भरता को कम कर सकता है.

यह भी पढ़ें: जनगणना क्यों होती है जरूरी, इसके आंकड़े देखकर क्या करती है सरकार?

स्पर्श गोयल एबीपी लाइव के साथ कंटेंट राइटर के तौर पर जुड़े हुए हैं. वह जनरल नॉलेज बीट की जिम्मेदारी संभालते हैं. कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में उन्हें चार साल का अनुभव है. एबीपी से पहले वह डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद में करीब दो साल तक काम कर चुके हैं. उन्होंने नमस्कार भारत से अपने करियर की शुरुआत की थी. .

वह अलग-अलग विषयों पर रिसर्च करके पाठकों के लिए जानकारी को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण अंदाज में पेश करते हैं. उन्होंने न्यूज राइटिंग के साथ-साथ स्क्रीनराइटिंग में भी अपनी पकड़ मजबूत की.

उन्होंने मां शाकुम्भरी यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. इसके साथ उन्होंने एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलिविजन से स्क्रीनप्ले का डिप्लोमा भी हासिल किया है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

1 November Statehood Day: 1 नवंबर को अस्तित्व में आए थे ये राज्य, कैसे हुआ था इनका गठन?
1 नवंबर को अस्तित्व में आए थे ये राज्य, कैसे हुआ था इनका गठन?
Magnetic Attraction: चुंबक सिर्फ लोहे को ही क्यों खींचता है, सोने को क्यों नहीं?
चुंबक सिर्फ लोहे को ही क्यों खींचता है, सोने को क्यों नहीं?
यह है देश की सबसे महंगी मिठाई, 1 किलो की कीमत में आ जाएगी बाइक
यह है देश की सबसे महंगी मिठाई, 1 किलो की कीमत में आ जाएगी बाइक
What If Oxygen Disappears: 5 सेकेंड के लिए गायब हो जाए ऑक्सीजन तो क्या होगा, क्या खत्म हो जाएगी दुनिया?
5 सेकेंड के लिए गायब हो जाए ऑक्सीजन तो क्या होगा, क्या खत्म हो जाएगी दुनिया?
Advertisement

वीडियोज

ABP News: REEL का जुनून... मौत को चैलेंज ! | Sansani
Jan Mahabhiyog Programme: अभी-अभी 'जन महाभियोग'पर आई बड़ी खबर! | Rahul Gandhi | Congress | ABP
Jan Mahabhiyog Programme: जन महाभियोग में क्या-क्या हुआ? पूरी कहानी | Rahul Gandhi | BJP | Gyanesh
Jan Mahabhiyog Programme: जन-महाभियोग-रैली..खतरे में ज्ञानेश की कुर्सी? | Rahul Gandhi | Congress
Sandeep Chaudhary: 'ज्ञानेश हटाओ'...लोकतंत्र बचाओ या राजनीति चमकाओ? | Jan Mahabhiyog | Congress
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं 7 शर्तें, कहा- 'मानी तो खुलेंगे रास्ते'
ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं 7 शर्तें, कहा- 'मानी तो खुलेंगे रास्ते'
दिल्ली में आज इन रास्तों पर जाने से बचें, रामलीला मैदान में रैली को लेकर ट्रैफिक डायवर्जन
दिल्ली में आज इन रास्तों पर जाने से बचें, रामलीला मैदान में रैली को लेकर ट्रैफिक डायवर्जन
GRAP लागू, दूध-दही, गैस और शराब महंगी, बैंक-Fastag के नए नियम, आज 1 नवंबर से बहुत कुछ बदला
GRAP लागू, दूध-दही, गैस और शराब महंगी, बैंक-Fastag के नए नियम, आज 1 नवंबर से बहुत कुछ बदला
ऑस्ट्रेलिया की हार से बदले सारे समीकरण, जानें WTC फाइनल में कैसे जाएगी टीम इंडिया?
ऑस्ट्रेलिया की हार से बदले सारे समीकरण, जानें WTC फाइनल में कैसे जाएगी टीम इंडिया?
पॉलिटिकल व्यूज की वजह से प्रकाश राज के हाथ से निकली फिल्में, पत्नी बोलीं- वो निडर शख्स हैं
पॉलिटिकल व्यूज की वजह से प्रकाश राज के हाथ से निकली फिल्में, पत्नी बोलीं- वो निडर शख्स हैं
दिल्ली मेट्रो की मैजेंटा लाइन का होगा विस्तार, 89 KM लंबा होगा कॉरिडोर
दिल्ली मेट्रो की मैजेंटा लाइन का होगा विस्तार, 89 KM लंबा होगा कॉरिडोर
CJP की दिवाली पार्टी में पहुंचे विपक्ष के नेता, अभिजीत दीपके, सौरव दास से क्या बोलीं सुप्रिया सुले?
CJP की दिवाली पार्टी में पहुंचे विपक्ष के नेता, अभिजीत दीपके, सौरव दास से क्या बोलीं सुप्रिया सुले?
शेरवानी पहन बिन बुलाए शादी में घुसा फॉरेनर, डीजे पर मचाया तहलका
शेरवानी पहन बिन बुलाए शादी में घुसा फॉरेनर, डीजे पर मचाया तहलका
Embed widget