Magnetic Attraction: चुंबक सिर्फ लोहे को ही क्यों खींचता है, सोने को क्यों नहीं?
Magnetic Attraction: चुंबक सिर्फ लोहे को ही अपनी तरफ खींचता है सोने को नहीं. आइए जानते हैं कि क्या है इसके पीछे की वजह और क्या है चुंबक का साइंस.

- इस चुंबकीय अंतर का उपयोग सोना परखने में होता है।
Magnetic Attraction: एक चुंबक लोहे के टुकड़े को अपनी तरफ खींच सकता है लेकिन सोने से बनी कोई भी चीज आमतौर पर उसी चुंबक से नहीं चिपक सकती. इसकी वजह सिर्फ यह नहीं है कि एक धातु दूसरी धातु से ज्यादा मजबूत या फिर भारी है. यह हर पदार्थ के एटॉमिक स्ट्रक्चर और खास तौर पर इलेक्ट्रॉनों के व्यवहार पर निर्भर करता है.
लोहा बाहरी चुंबकीय क्षेत्र के प्रति मजबूत प्रतिक्रिया दे सकता है क्योंकि इसमें अनपेयर्ड इलेक्ट्रोंस और मैग्नेटिक डोमेन्स होते हैं. इसके उलट सोना ऐसी कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाता. इन अंतरों को समझने से पता चलता है कि क्यों चुंबक कुछ धातुओं को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं जबकि दूसरी धातुओं पर उनका कोई असर नहीं पड़ता.
लोहा चुंबक की तरफ क्यों आकर्षित होता है?
इसकी जानकारी लोहे के परमाणु के अंदर से शुरू होती है. लोहे में कुछ इलेक्ट्रॉन अयुग्मित होते हैं और उनका स्पिन चुंबकीय मूवमेंट में योगदान देता है. इससे लोहे के हर परमाणु में थोड़ा चुंबकीय प्रभाव आ जाता है. लोहे के टुकड़े के अंदर परमाणुओं के समूह में मिलकर चुंबकीय डोमेन बनाते हैं. हर डोमेन के अंदर कई चुंबकीय मूवमेंट एक ही दिशा में संरेखित होते हैं. हालांकि लोहे के एक सामान्य टुकड़े में ये डोमेन अलग-अलग दिशाओं में हो सकते हैं.
जब कोई चुंबक इसके पास लाया जाता है तो उसका चुंबकीय क्षेत्र लोहे के डोमेन को प्रभावित करता है. इनमें से कई डोमेन बाहरी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में मुड़ जाते हैं या फिर उसी दिशा में सेटल हो जाते हैं. इस तरह लोहा कुछ समय के लिए मैग्नेटाइज्ड हो जाता है और चुंबक की तरफ आकर्षित होने लगता है.

सोना चुंबक से क्यों नहीं चिपकता?
सोने की इलेक्ट्रॉनिक संरचना अलग होती है. लोहे के साथ तुलना करने पर इसे आमतौर पर एक अचुंबकीय धातु मान लिया जाता है. सोने में सभी इलेक्ट्रॉन पेयर्ड होते हैं और उसके उलट स्पिन एक दूसरे के चुंबकीय प्रभाव को खत्म कर देते हैं. इस वजह से सोना किसी सामान्य चुंबक के प्रति वैसा मजबूत सामूहिक प्रभाव नहीं दिखाता.
लोहे के उलट सोने में उस तरह के चुंबकीय डोमेन नहीं बनते जो बाहरी चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव में आसानी से एक दिशा में व्यवस्थित हो सकें. शुद्ध सोने के टुकड़े के पास चुंबक लाने पर भी वह लोहे की तरह व्यवहार नहीं करता और सोना आमतौर पर चुंबक से नहीं चिपकता.
दूसरी धातु और उनका चुंबकीय व्यवहार
लोहा अकेली ऐसी धातु नहीं है जो स्वाभाविक रूप से चुंबक की तरफ मजबूती से आकर्षित होती है. निकेल और कोबाल्ट भी ऐसी ही धातु हैं जिनमें यह गुण पाया जाता है. इसके उलट सोना, चांदी, तांबा और एल्यूमीनियम आमतौर पर उस तरह से आकर्षित नहीं होते जैसा लोहा होता है.

गोल्ड मैग्नेट टेस्ट
इस अंतर का एक सबसे आम इस्तेमाल आभूषणों की जांच में भी होता है. जोहरी असली सोने और ऐसी वस्तु जिनमें दूसरी धातु मिली हो सकती हैं के बीच फर्क करने के लिए शुरुआती जांच के तौर पर मैग्नेट टेस्ट का इस्तेमाल करते हैं. अगर सोने के नाम पर बेचा जा रहा कोई आभूषण चुंबक से चिपक जाता है तो हो सकता है कि इसमें लोहा या फिर निकल जैसी कोई चुंबकीय धातु मिली हो.
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यह अंतर क्यों मायने रखता है?
यह आकर्षण किसी पदार्थ की आंतरिक चुंबकीय संरचना से जुड़ा होता है. जरूरी बात यह है कि क्या इसके चुंबकीय प्रभाव इस तरह से जुड़ सकते हैं कि बाहर से कोई चुंबक लाने पर एक मजबूत प्रतिक्रिया पैदा हो. लोहे में वह सभी जरूरी अनपेयर्ड इलेक्ट्रॉन और डोमेन संरचना होती है जिनका जिक्र ऊपर किया गया है. सोने में ऐसा व्यवहार नहीं दिखता इस वजह से किसी सामान्य चुंबक का इस्तेमाल करके शुद्ध सोने की वस्तु को अपनी तरफ नहीं खींचा जा सकता.
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