Akash Tarang System: दुश्मनों के ड्रोन को हवा में अंधा कर देगा यह सिस्टम, कैसे काम करता है भारत का आकाश तरंग?
Akash Tarang System: आकाश तरंग भारत का नया एंटी-ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम है, जो दुश्मन के ड्रोन के सिग्नल को जाम करके उन्हें बिना मिसाइल या गोली चलाए बेअसर कर सकता है.

Akash Tarang System: भारत अपनी सीमाओं को हर तरह के खतरे से बचाने के लिए लगातार नई तकनीक तैयार कर रहा है. इसी कड़ी में रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में एक नए सिस्टम को मंजूरी दी है, जिसका नाम है आकाश तरंग. यह कोई मिसाइल नहीं बल्कि एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम है, जो दुश्मन के ड्रोन को गिराने से पहले ही उसे अंधा और बहरा कर देता है. यानी ड्रोन को अपने ऑपरेटर से जो सिग्नल मिलता है, वो सिग्नल ही तोड़ दिया जाता है, जिससे ड्रोन काम करना बंद कर देता है या रास्ता भटक जाता है. रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में इस सिस्टम समेत करीब 52 हजार करोड़ रुपये के हथियारों को मंजूरी दी गई है, जिसका मकसद तीनों सेनाओं को आधुनिक और मजबूत बनाना है.
जानिए दुश्मन के ड्रोन को कैसे अंधा और बहरा बनाता है आकाश तरंग?
अब सवाल यह है कि आकाश तरंग असल में करता क्या है. इसे एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम कहा जाता है. सीधी भाषा में समझें तो यह एक ऐसा जैमर है जो दुश्मन के मानवरहित हवाई वाहनों यानी ड्रोन को पहचानता है और फिर उनके कम्युनिकेशन और नेविगेशन सिग्नल को रोक देता है. जैसे ही कोई ड्रोन हमारी सीमा में घुसने की कोशिश करता है, यह सिस्टम रेडियो फ्रीक्वेंसी की मदद से उसका पता लगाता है और फिर उस पर इलेक्ट्रॉनिक तरंगें छोड़ता है.
इन तरंगों की वजह से ड्रोन का जीपीएस सिग्नल और उसका कंट्रोल सिग्नल दोनों बिगड़ जाते हैं. नतीजा यह होता है कि ड्रोन या तो अपने आप जमीन पर उतर जाता है, या रास्ता भटककर बेकार हो जाता है, या फिर वापस अपने भेजने वाले के पास लौट जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में गोली या मिसाइल की जरूरत नहीं पड़ती, इसलिए यह तरीका काफी सस्ता और सुरक्षित माना जाता है.
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आकाश मिसाइल और आकाशतीर के साथ बनेगी सुरक्षा कवच
कुल मिलाकर आकाश तरंग भारत की सीमा सुरक्षा को एक नई मजबूती देने वाला कदम है. यह सेना के पास पहले से मौजूद आकाश मिसाइल सिस्टम और आकाशतीर नेटवर्क के साथ मिलकर काम करेगा, जिससे हवाई सुरक्षा की एक बहुस्तरीय दीवार तैयार होगी.
पहली परत में इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से छोटे ड्रोन को रोका जाएगा, और अगर कोई खतरा फिर भी आगे बढ़ता है तो मिसाइल और गन सिस्टम उसे हवा में ही मार गिराएंगे. भारतीय सेना और डीआरडीओ इस दिशा में लगातार स्वदेशी तकनीक पर काम कर रहे हैं, ताकि सीमा पार से आने वाले हर तरह के हवाई खतरे का जवाब देश के अपने साधनों से ही दिया जा सके.

























