भारत के किन मंदिरों में पहले से लागू है स्पेशल ड्रेस कोड, यहां देख लीजिए लिस्ट
Ram Mandir No Pocket Dress Code: हाल ही में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर में नए ड्रेस कोड नियम लागू किए हैं. आइए जानते हैं कि और कौन से मंदिरों में ड्रेस कोड नियम लागू हैं.

- श्री राम मंदिर कर्मचारियों के लिए 'नो पॉकेट ड्रेस कोड' लागू हुआ।
- केरल, आंध्र प्रदेश के मंदिरों में पारंपरिक धोती-साड़ी पहनना अनिवार्य है।
- देश के कई अन्य मंदिरों में पश्चिमी परिधान, छोटे कपड़े प्रतिबंधित हैं।
Ram Mandir No Pocket Dress Code: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने हाल ही में अयोध्या राम मंदिर में दान और चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारियों के लिए एक नया नियम लागू किया है. इस नियम का नाम नो पॉकेट ड्रेस कोड है. हालांकि यह नियम सिर्फ मंदिर के कर्मचारियों पर लागू होता है भक्तों पर नहीं. इसी बीच आइए जानते हैं भारत भर के उन प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में जहां पर आने वाले लोगों को सख्त ड्रेस कोड का पालन करना पड़ता है.
दक्षिण भारतीय मंदिरों में सबसे सख्त ड्रेस कोड
देश के कुछ सबसे सख्त ड्रेस नियम दक्षिण भारत में देखने को मिलते हैं. केरल के श्री पद्मनखभस्वामी मंदिर में पुरुषों को सिर्फ पारंपरिक धोती या फिर मुंडू पहनना होता है. साथ ही अंदर जाने से पहले शर्ट या फिर कुर्ता उतरना पड़ता है. ऐसा इसलिए ताकि शरीर का ऊपरी हिस्सा खुला रहे. महिलाओं को साड़ी या फिर पारंपरिक लहंगा पहनना होता है. यहां पर सलवार सूट आमतौर पर स्वीकार नहीं किए जाते.
गुरुवायुर कृष्ण मंदिर में भी पारंपरिक ड्रेस कोड का पालन होता है. पुरुषों को सिर्फ कमर के चारों तरफ बंधी मुंडू या फिर लुंगी में प्रवेश करने की अनुमति है. इसी के साथ महिलाओं को साड़ी या फिर सलवार सूट पहनना पड़ता है.
आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर में पुरुषों को धोती कुर्ता या फिर पजामा पहनना होता है. इसी के साथ महिलाओं को दुपट्टे के साथ साड़ी या फिर चूड़ीदार सलवार सूट पहनना होता है. शॉर्ट्स, जींस, टी-शर्ट और बाकी पश्चिमी कैजुअल कपड़े पहनने की अनुमति नहीं है.
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मध्य और पश्चिम भारत में पारंपरिक कपड़ों की इजाजत
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती या फिर जलाभिषेक में भाग लेने वाले भक्तों को तय ड्रेस कोड का पालन करता होता है. पुरुषों को धोती के साथ सोला पहनना पड़ता है और महिलाओं को साड़ी पहननी पड़ती है. महाराष्ट्र के संभाजी नगर में स्थित घृष्णेश्वर महादेव मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. यहां पर पुरुषों को गर्भ गृह में प्रवेश करने से पहले शरीर के ऊपरी हिस्से के सभी कपड़े उतारने होते हैं.
इसी के साथ द्वारकाधीश मंदिर में भी नोटिस लगाए गए हैं जिनमें आने वालों को बताया गया है कि मंदिर पूजा का स्थान है फैशन का नहीं. यहां पर शॉर्ट्स, मिनी स्कर्ट, फटी हुई जींस, नाइट सूट और इस तरह के कपड़े पहनने वालों को प्रवेश नहीं दिया जाता.
उत्तर और पूर्वी भारत के मंदिरों में ड्रेस नियम
उत्तर और पूर्वी भारत के कई मंदिरों ने भी भक्तों के लिए ड्रेस से जुड़े नियम लागू किए हैं. पुरी के जगन्नाथ मंदिर में आधिकारिक तौर पर एक ड्रेस कोड लागू किया गया है. इसमें वेस्टर्न कैजुअल कपड़ों को पहनने से मना किया गया है. नियम के मुताबिक जींस शॉर्ट्स और टी शर्ट पहनने की इजाजत नहीं है.
इसी के साथ बांके बिहारी मंदिर और राधा दामोदर मंदिर में नोटिस बोर्ड के जरिये ऐसे लोगों से विनम्रतापूर्वक यह अनुरोध किया गया है कि शरीर दिखाने वाले या फिर वेस्टर्न कपड़े ना पहनें.
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