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क्या काम करती हैं ममदानी की बीवी रमा, उन्हें दुनिया से क्यों छिपाते रहे जोहरान?

Zohran Mamdani Wife Rama: न्यूयॉर्क की सबसे युवा फर्स्ट लेडी रमा दुवाजी, हाल ही में मेयर का चुनाव जीते जोहरान ममदानी की पत्नी हैं. चलिए जानें कि वो क्या करती हैं और ममदानी ने उनको दूर क्यों रखा.

न्यूयॉर्क में जब जोहरान ममदानी ने मेयर की रेस जीती, तो तालियों की गूंज में एक चेहरा चुपचाप मीडिया की नजरों में आया और वो चेहरा था रमा दुवाजी का. रमा न सिर्फ ममदानी की पत्नी हैं, बल्कि अब न्यूयॉर्क की फर्स्ट लेडी भी हैं. लेकिन सवाल यह है कि जो शख्स शहर की चर्चा का केंद्र बनीं, वो इतने वक्त तक सार्वजनिक मंचों से गायब क्यों रहीं? क्या यह सिर्फ निजता का मामला था या राजनीति का एक सुनियोजित फैसला? आइए जानते हैं.

कौन हैं रमा दुवाजी और क्या करती हैं?

रमा दुवाजी, जिनका जन्म अमेरिका के टेक्सस राज्य में हुआ और बचपन दुबई में गुजरा, आज वे न्यूयॉर्क के कला जगत की एक जानी-मानी इलस्ट्रेटर और एनीमेटर हैं. वो सीरियाई मूल की हैं और उनका आर्टवर्क मिडिल ईस्ट, फिलस्तीन और सामाजिक न्याय जैसे विषयों को आवाज देता है. रमा की कलाकृतियां सटीक रंगों और गहरी राजनीतिक संवेदनाओं से भरी होती हैं. 

कैमरे से दूर क्यों रहीं रमा?

शायद यही कारण था कि चुनाव प्रचार के दौरान जोहरान ने उन्हें कैमरों से दूर रखा. कहा जाता है कि ममदानी का यह कदम रणनीतिक था. फिलस्तीन के समर्थक होने के कारण रमा की सार्वजनिक मौजूदगी चुनाव के कुछ संवेदनशील वर्गों में विवाद पैदा कर सकती थी. वहीं, ममदानी का कहना था कि उनकी पत्नी की पहचान उनके आर्ट से है, किसी रिश्ते से नहीं. 

चुनाव के महीनों तक रमा ने अपने सोशल मीडिया पर केवल अपने आर्टवर्क साझा किए. न कोई चुनावी पोस्ट, न कोई राजनीतिक बयान. और फिर, जब 24 जून को ममदानी ने डेमोक्रेटिक प्राइमरी में जीत दर्ज की, तब रमा पहली बार उनके साथ स्टेज पर दिखीं. यह वही पल था जिसने उनके नाम को भी सुर्खियों में ला दिया.

पर्दे के पीछे रमा की भूमिका

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, रमा चुनावी मंचों से दूर जरूर थीं, लेकिन पर्दे के पीछे उनकी भूमिका बेहद अहम थी. उन्होंने ममदानी के प्रचार अभियान के रंगों और डिजाइन से लेकर ग्राफिक पहचान तक तैयार की थी. वो पीले, नारंगी और नीले रंगों का कॉम्बिनेशन, जिसने पूरे अभियान को विजुअली अलग पहचान दी, वह रमा का ही आइडिया था. 

किन विषयों पर बनाई आर्ट

27 वर्षीय रमा दुवाजी ने अमेरिका की वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और न्यूयॉर्क स्कूल ऑफ विजुअल आर्ट्स से मास्टर्स किया. उनकी पहचान केवल कला तक सीमित नहीं है, वो सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखती हैं. उन्होंने नस्लीय हिंसा, फलस्तीनियों पर अत्याचार और महिलाओं के अधिकार जैसे विषयों पर लगातार आर्ट बनाया है.

रमा का परिवार

रमा के परिवार के बारे में ज्यादा जानकारी तो सामने नहीं आई है. बस इतनी जानकारी है कि उनके माता-पिता सीरियाई मुसलमान हैं और मूल रूप से दमिश्क के रहने वाले हैं. रमा ने खुद कई बार कहा कि उन्हें अपनी सीरियाई-अमेरिकी पहचान को स्वीकार करने में वक्त लगा.

यह भी पढ़ें: भारत की तरह क्या चीन में भी होती है जाति-धर्म के नाम पर वोटिंग, जानें यहां कितने लोग छोड़ चुके हैं धर्म

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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