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Parliament Names: अफगानिस्तान में संसद को कहते हैं शूरा-ए-मिल्ली, जानें हमारे पड़ोसी मुल्कों में संसद के क्या नाम?

Parliament Names: दुनिया में सभी देशों के पार्लियामेंट के अलग-अलग नाम होते हैं. आइए जानते हैं भारत के पड़ोसी मुल्कों में संसद को क्या कहते हैं.

Parliament Names: अफगानिस्तान में पार्लियामेंट को शूरा-ए-मिल्ली के नाम से जाना जाता है. इसका मतलब होता है नेशनल असेंबली. अफगानिस्तान की तरह भारत के पड़ोसी देशों में भी उनकी लेजिस्लेचर के अलग-अलग नाम और स्ट्रक्चर होते हैं. यह उनके पॉलीटिकल सिस्टम, इतिहास और कांस्टीट्यूशनल फ्रेमवर्क से बनते हैं. आइए जानते हैं भारत के पड़ोसी देशों की संसद के नाम के बारे में.

पाकिस्तान 

पाकिस्तान के पार्लियामेंट को ऑफीशियली मजलिस-ए-शूरा कहा जाता है. इसका मतलब होता है कंसलटेटिव काउंसिल. यह  बाईकैमरल स्ट्रक्चर को फॉलो करती है जिसमें नेशनल असेंबली, लोअर हाउस और सीनेट अपर हाउस है. नेशनल असेंबली में 336 सीटें हैं, जिसमें सीधे चुने गए मेंबर के साथ-साथ महिलाओं और माइनॉरिटी के लिए रिजर्व सीट भी शामिल है. सीनेट में 96 मेंबर है. लोअर हाउस 5 साल का टर्म पूरा करता है और सीनेटर 6 साल का. इनमें से आधे हर 3 साल में रिटायर हो जाते हैं. 

बांग्लादेश 

बांग्लादेश में पार्लियामेंट को जातीय संसद कहा जाता है. पाकिस्तान के उलट बांग्लादेश एक सदन वाला सिस्टम फॉलो करता है. इसका मतलब है कि कानून बनाने के लिए सिर्फ एक लेजिस्लेटिव हाउस जिम्मेदार है. जातीय संसद में 350 सीटें हैं. इसमें सीधे चुने गए रिप्रेजेंटेटिव और महिलाओं के लिए  रिजर्व सीट शामिल हैं. इसका टर्म 5 साल का होता है. ढाका में पार्लियामेंट बिल्डिंग अपने आर्किटेक्चर डिजाइन के लिए इंटरनेशनल लेवल पर मशहूर है. 

नेपाल 

फेडरल डेमोक्रेटिक रिपब्लिक में बदलने के बाद नेपाल ने अपनी फेडरल पार्लियामेंट बनाई. इसे संघीय संसद भी कहा जाता है. यह दो सदन वाले सिस्टम के तहत काम करती है. इसमें हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और नेशनल असेंबली शामिल है. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में सीधे चुने गए और प्रोपोर्शनली रिप्रेजेंटेटिव मेंबर होते हैं. इसी के साथ नेशनल असेंबली अपर हाउस के तौर पर काम करती है. लोअर हाउस का टर्म 5 साल का होता है और अपर हाउस 6 साल के लिए काम करता है. 

भूटान 

 भूटान की पार्लियामेंट को गयेलयोंग त्शोकहांग के नाम से जाना जाता है. भूटान ने 2008 में एब्सोल्यूट मोनार्की से हटकर एक डेमोक्रेटिक कॉनस्टिट्यूशनल मोनार्की अपनाई. इसकी पार्लियामेंट बाईकैमरल है जिसमें नेशनल असेंबली और नेशनल काउंसिल शामिल है. दोनों हाउस का टर्म 5 साल का होता है. 

श्रीलंका 

श्रीलंका की लेजिस्लेचरको बस श्रीलंका की पार्लियामेंट कहा जाता है. यहां एक यूनिकैमरल स्ट्रक्चर के तहत काम किया जाता है. यहां सभी मेंबर बहस करने और कानून पास करने के लिए एक ही हाउस में बैठते हैं. पार्लियामेंट में 225 मेंबर है जो नेशनल लिस्ट से नॉमिनेट किए गए लोगों के साथ जिलों से चुने जाते हैं. पार्लियामेंट का टर्म 5 साल का होता है. 

म्यांमार 

म्यांमार में पार्लियामेंट को पायडांगसू हलुट्टाव कहा जाता है. इसका मतलब है यूनियन असेंबली. यह दो सदनों वाली है जिसमें हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और नेशनल असेंबली शामिल है. 2021 से पहले डेमोक्रेटिक फ्रेमवर्क के तहत इसमें 664 सीटें थीं. इनमें से 25% मिलिट्री के लिए रिजर्व थी. हालांकि 2021 के मिलिट्री  तख्तापलट के बाद से डेमोक्रेटिक पार्लियामेंट चालू नहीं है.

मालदीव

मालदीव की लेजिस्लेचर को पीपुल्स मजलिस कहा जाता है. यह एक सदनीय सिस्टम को फॉलो करती है. इसमें अलग-अलग एटोल से चुने गए रिप्रेजेंटेटिव होते हैं. अभी इसमें 87 मेंबर हैं जिनमें से हर एक 5 साल का टर्म पूरा करता है. 

चीन 

चीन की पार्लियामेंट को नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के नाम से जाना जाता है. यह एक सदनीय बॉडी है और लगभग 2980 मेंबर के साथ दुनिया की सबसे बड़ी पार्लियामेंट होने का गौरव रखती है. यह 5 साल का टर्म पूरा करती है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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