Venezuela Earthquake: क्या है रिंग ऑफ फायर और कितना खतरनाक, इसकी जद में आते हैं कौन-कौन से देश?
Venezuela Earthquake: वेनेजुएला में आए भूकंप के बाद वहां कई इमारतें जमींदोज हो गईं और तमाम लोगों के मारे जाने की आशंका है. इस आपदा के बीच चलिए पहले जान लेते हैं कि यह रिंग ऑफ फायर कितना खतरनाक है.

Venezuela Earthquake: वेनेजुएला की राजधानी काराकस में महज कुछ मिनट के अंतराल पर आए दो भूकंपों ने सबकुछ हिलाकर रख दिया है. इस भूकंप में व्यापक तौर पर तबाही मची है. आशंका जताई जा रही है कि मृतकों की संख्या दस हजार से ज्यादा हो सकती है. हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है, जब वेनेजुएला में भूकंप से त्राहि-त्राहि हुई हो, ऐसा पहले भी हो चुका है, लेकिन यह पिछले 100 सालों में आए भूकंप की तुलना में सबसे शक्तिशाली है. इस आपदा ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर रिंग ऑफ फायर क्या है, यह कितना खतरनाक है और इसकी जद में कितने देश आते हैं.
रिंग ऑफ फायर क्या है?
रिंग ऑफ फायर प्रशांत महासागर के चारों ओर फैला ऐसा इलाका है, जिसे वैज्ञानिक दुनिया में सबसे खौफनाक मानते हैं. घोड़ो की नाल के आकार में फैला यह एरिया किसी बारूद के ढेर की तरह काम करता है. लगभग 40 हजार किलोमीटर लंबी इस पट्टी में जब भी कभी कोई हलचल होती है तो भूकंप आना और ज्वालामुखी का धधकना तय माना जाता है. वैज्ञानिक भाषा में इसे सर्कम-पैसिफिक बेल्ट भी कहा जाता है. दरअसल हमारी धरती की ऊपरी परत कई बड़ी-बड़ी चट्टानी परतों से मिलकर बनी है, इनको ही टेक्टॉनिक प्लेट्स कहा जाता है. रिंग ऑफ फायर वह सरहद है, जहां ये भारी चट्टानें आपस में टकराती हैं, या फिर एक-दूसरे के नीचे धंसती जाती हैं. इस वजह से जमीन के अंदर गर्मी और दबाव पैदा होता है. इसी गर्मी से अंदर मौजूद पत्थर पिघलकर मैग्मा बन जाताे हैं, जो कि ज्वालामुखी से निकलता है.
90 फीसदी भूकंप का केंद्र रिंग ऑफ फायर
दुनिया के करीब 75 फीसदी से ज्यादा ज्वालामुखी इसी रिंग ऑफ फायर के अंदर मौजूद हैं, जिसमें से करीब 450 से भी ज्यादा सक्रिय ज्वालामुखी हैं. सिर्फ इतना ही नहीं इसके खतरनाक होने का अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि भूकंप के 90 फीसदी झटके इसी रिंग ऑफ फायर में महसूस किए जाते हैं. सुनामी की बात करें तो वो भी सबसे ज्यादा इसी क्षेत्र में आती है. साल 1960 में चिली में 9.5 तीव्रता का खतरनाक भूकंप आया था, जो कि रिंग ऑफ फायर बेल्ट की ही देन था.
रिंग ऑफ फायर में किन देशों को सबसे ज्यादा खतरा?
इस घेरे की जद में दुनिया के कई सारे अहम देश आते हैं, जिसमें एशियाई महाद्वीप के देश सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जाते हैं. इसमें रूस का कमचटका प्रायद्वीप, जापान, ताइवान, फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे देश सीधे तौर पर इस विनाशकारी बेल्ट के मुहाने पर हैं. जापान में अक्सर आने वाले खतरनाक भूकंप, इंडोनेशिया के सुलगते हुए ज्वालामुखी रिंग ऑफ फायर की ही देन हैं. इसके अलावा पापुआ न्यू गिनी और इसके आस-पास के द्वीपों पर भी रिंग ऑफ फायर का असर देखने को मिलता है.
अमेरिका से अंटार्कटिका तक तबाही ही तबाही
रिंग ऑफ फायर का घेरा एशिया के अलावा ओशिनिया के न्यूजीलैंड औप सोलोमन द्वीप से होते हुए सीधे अमेरिका तक पहुंचता है. उत्तरी अमेरिका की बात करें तो यहां कनाडा, मैक्सिको और संयुक्त राज्य अमेरिका का केलिफोर्निया, अलास्का का पश्चिमी तट सीधे इसकी चपेट में आता है. मध्य अमेरिकी देश जैसे- पनामा, कोस्टा रिका और ग्वाटेमाला भी इसी पट्टी पर हैं. दक्षिणी अमेरिका पहुंचें तो वहां इक्वेडोर, कोलंबिया, चिली और पेरू देश इसकी सीमा में शामिल हैं. इतना ही नहीं चारों तरफ बर्फ से ढंका हुआ अंटार्कटिका महाद्वीप का एक बड़ा हिस्सा भी रिंग ऑफ फायर पर ही स्थित है.
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