अमेरिका के परमानेंट वीजा का क्या है रेट, इसे लेने में किस देश के लोग टॉप पर?
अमेरिका का सामान्य ग्रीन कार्ड सरकारी फीस के रूप में 1.5 से 3 लाख रुपये में मिलता है, जबकि रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड पाने में भारतीय और पारिवारिक श्रेणी में मेक्सिको के लोग सबसे आगे हैं.

अमेरिका में चालू वित्तीय वर्ष 30 सितंबर को खत्म होने जा रहा है, जिससे पहले अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय पेशेवरों को सतर्क कर दिया है. खबर है कि अत्यधिक मांग के कारण भारत के लिए रोजगार-आधारित EB-1 श्रेणी का ग्रीन कार्ड इस वर्ष अस्थायी रूप से पूरी तरह खत्म हो सकता है. वर्षों से अमेरिका में स्थायी निवास पत्र यानी ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे लाखों भारतीयों के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर अमेरिका का ग्रीन कार्ड पाने में कितनी लागत आती है और कौन से देश के नागरिक इस लिस्ट में सबसे आगे खड़े हैं.
अमेरिकी ग्रीन कार्ड क्या है और यह क्यों खास है?
ग्रीन कार्ड को आधिकारिक तौर पर अमेरिका का स्थायी निवासी कार्ड कहा जाता है. यह दस्तावेज किसी भी विदेशी नागरिक को अमेरिका में जीवनभर रहने, नौकरी करने और व्यापार करने का कानूनी अधिकार देता है. इसे पाने के बाद व्यक्ति को अमेरिकी नागरिक जैसी ही कई अधिकार और सुविधाएं मिल जाती हैं. इसके लिए आवेदन प्रक्रिया काफी लंबी होती है, जिसमें व्यक्ति की शिक्षा, नौकरी की श्रेणी, पारिवारिक संबंध या देश में किए गए आर्थिक निवेश को देखा जाता है.
सामान्य प्रक्रिया में कितनी लगती है फीस?
साधारण तरीके से ग्रीन कार्ड पाने के लिए आवेदक को फॉर्म फीस और प्रोसेसिंग चार्ज देना होता है. यदि कोई नौकरी के जरिए ग्रीन कार्ड लेता है, तो उसमें फॉर्म I-140 की फीस करीब 715 डॉलर (लगभग 60 हजार रुपये) होती है, जिसके साथ कंपनी के अन्य प्रशासनिक शुल्क भी जुड़ते हैं. वहीं पारिवारिक आधार पर अर्जी देने के लिए फॉर्म I-130 की सरकारी फीस लगभग 625 से 675 डॉलर होती है. अगर आवेदक अमेरिका के भीतर ही मौजूद है, तो उसे एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस (फॉर्म I-485) के लिए लगभग 1,440 डॉलर (लगभग 1.2 लाख रुपये) अलग से देने पड़ते हैं.
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विदेश से आवेदन का खर्च और अन्य चार्ज
अगर कोई व्यक्ति अमेरिका के बाहर से ग्रीन कार्ड की अर्जी देता है, तो उसे कंसुलर प्रोसेसिंग से गुजरना पड़ता है. इसके तहत DS-260 फॉर्म और बाकी विभागीय प्रक्रियाओं को मिलाकर लगभग 325 डॉलर की सरकारी फीस चुकानी होती है. इसके अलावा बायोमेट्रिक टेस्ट और इमिग्रेंट फीस के रूप में लगभग 235 डॉलर का खर्च आता है. कुल मिलाकर सभी कागजी कार्रवाइयों, मेडिकल टेस्ट और बायोमेट्रिक्स का सरकारी खर्च लगभग 1.5 लाख से 2.5 लाख रुपये के बीच रहता है, हालांकि इसमें कानूनी वकील की फीस अलग से जोड़नी पड़ती है.
बिना कतार के EB-5 इन्वेस्टर वीजा लेने का रास्ता
जो लोग बरसों लंबी कतारों में नहीं लगना चाहते, उनके लिए अमेरिका EB-5 इन्वेस्टर वीजा का विकल्प देता है. इस प्रोग्राम के जरिए अमीर विदेशी नागरिक अमेरिका में बड़ा निवेश करके तुरंत ग्रीन कार्ड हासिल कर सकते हैं. इसके तहत कम से कम 8 लाख डॉलर (लगभग 6.7 से 7 करोड़ रुपये) से लेकर 10.5 लाख डॉलर (लगभग 8.7 करोड़ रुपये) तक का निवेश करना अनिवार्य होता है. शर्त यह होती है कि इस निवेश से अमेरिकी नागरिकों के लिए कम से कम 10 नई नौकरियां पैदा होनी चाहिए.
प्रस्तावित गोल्ड कार्ड और नई योजनाएं
हाल के दिनों में अमेरिका में अमीर विदेशी नागरिकों को आकर्षित करने के लिए गोल्ड कार्ड या बॉन्ड जैसी कई योजनाओं पर चर्चा तेज हुई है. इन प्रीमियम प्रस्तावों के तहत 1 लाख डॉलर से लेकर 50 लाख डॉलर तक के बॉन्ड निवेश की बात कही गई है. यदि यह नई व्यवस्था पूरी तरह लागू होती है, तो इसके जरिए ग्रीन कार्ड पाने का कुल खर्च बढ़कर कई करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है.
पारिवारिक ग्रीन कार्ड में मेक्सिको का दबदबा
अगर सभी श्रेणियों और पारिवारिक प्रवासन (फैमिली-बेस्ड इमिग्रेशन) के कुल आंकड़े देखे जाएं, तो ग्रीन कार्ड हासिल करने वालों में मेक्सिको के लोग सबसे आगे रहते हैं. भौगोलिक रूप से अमेरिका से बिल्कुल सटे होने और मजबूत पारिवारिक संबंधों के कारण मेक्सिको के नागरिकों को सबसे अधिक संख्या में ग्रीन कार्ड जारी किए जाते हैं.

रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड में भारतीय आगे
नौकरी और तकनीकी योग्यता के दम पर मिलने वाले एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड (EB) ग्रीन कार्ड की सूची में भारत और चीन के लोग दुनिया में सबसे टॉप पर हैं. आईटी पेशेवरों और कुशल कारीगरों की भारी मांग के कारण भारतीय आवेदकों की संख्या सबसे अधिक है. हालांकि, अमेरिकी इमिग्रेशन कानून के तहत हर देश के लिए केवल 7 प्रतिशत का कोटा तय है. इसी वजह से आवेदकों की संख्या ज्यादा और कोटा कम होने के कारण भारतीयों को ग्रीन कार्ड पाने के लिए दशकों का लंबा इंतजार करना पड़ता है.
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