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इस देश में बिल्ली को मारने पर दी जाती थी मौत की सजा, जानें क्यों बना ऐसा कानून ?

Death Penalty For Killing Cats: प्राचीन मिस्र में अगर कोई बिल्ली को मार देता था तो उसे मौत की सजा दे दी जाती थी. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.

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  • प्राचीन मिस्र में बिल्लियाँ मारने पर मृत्युदंड की सज़ा मिलती थी।
  • यह देवी बास्तेत से जुड़ी पवित्र मानी जाती थीं।
  • बिल्लियाँ अनाज के भंडार चूहों से बचाकर जीवन रक्षा करती थीं।
  • मृत बिल्लियों को ममी बनाकर सम्मान से दफ़नाया जाता था।

Death Penalty For Killing Cats: प्राचीन मिस्र में बिल्लियों को मारना मौत की सजा के लायक अपराध था. यह कानून इतना सख्त था कि अगर कोई व्यक्ति अनजाने में या फिर गलती से भी किसी बिल्ली की जान ले लेता था तो उसे भी यही सजा मिल सकती थी. इतनी कठोर सजा इस बात को दिखाती है कि मिस्र के समाज में बिल्लियों का स्थान कितना खास था.

बिल्लियां सिर्फ पालतू जानवर नहीं थी बल्कि वह एक पूजनीय देवी से जुड़ी थीं. इसी के साथ अनाज के भंडार और उन लोगों की रक्षा करने में मदद करती थीं जिन पर पूरा समुदाय निर्भर था. 

बास्तेत और बिल्लियों का धार्मिक महत्व 

बिल्लियों के प्रति इस सख्त रवैये का एक मुख्य कारण देवी बास्तेत के प्रति धार्मिक आस्था थी. मिस्र की पौराणिक कथाओं में बास्तेत को प्रेम, संगीत, घर की सुरक्षा और प्रजनन क्षमता की देवी के रूप में पूजा जाता था. उन्हें बिल्ली के चेहरे के साथ दर्शाया जाता था जो इस जानवर को सीधे देवी से जोड़ता था. इस वजह से मिस्र के लोग बिल्लियों को पवित्र मानते थे और उनकी मौजूदगी को देवी का ही एक रूप या फिर उनका आशीर्वाद समझते थे. 

इस मान्यता के मुताबिक किसी बिल्ली को नुकसान पहुंचाना सिर्फ किसी जानवर के साथ बुरा बर्ताव करना नहीं था. बल्कि इसे खुद देवी का अपमान माना जाता था. इसी धार्मिक जुड़ाव से यह समझ आता है कि किसी बिल्ली की मौत होने पर मिलने वाली सजा किसी आम जानवर को नुकसान पहुंचाने की सजा से काफी ज्यादा गंभीर क्यों हो सकती थी. 


इस देश में बिल्ली को मारने पर दी जाती थी मौत की सजा, जानें क्यों बना ऐसा कानून ?

बिल्ली अनाज के भंडार की भी रक्षा करती थी 

धार्मिक श्रद्धा इस रिश्ते का सिर्फ एक पहलू थी. बिल्लियां एक ऐसे समाज में काफी काम आती थी जहां की अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की जिंदगी काफी हद तक खेती की पैदावार पर निर्भर थी. अनाज के भंडारों को चूहा और दूसरे हानिकारक जीवों से खतरा रहता था जो खाने पीने के भंडार को बर्बाद कर सकते थे और पूरे समुदाय के सामने अकाल का संकट खड़ा कर सकते थे. इस वजह से अनाज के भंडार की सुरक्षा सीधे तौर पर लोगों के जीवित रहने से जुड़ी थे. 

बिल्लियां चूहों और दूसरे हानिकारक जीवों का शिकार करती थीं. इससे उस अनाज की सुरक्षा होती थी जिस पर लोग निर्भर थे. उनकी भूमिका इस वजह से भी जरूरी थी क्योंकि फसल काटने के बाद और अनाज के भंडारण के दौरान खाने-पीने की चीजों को सुरक्षित रखने की जरूरत होती थी. यही बिल्लियां जहरीले सांपों का भी शिकार करती थीं. इन खतरों को कंट्रोल करने में मदद करके बिल्लियों ने अनाज के भंडार और इंसानी जान की रक्षा की. 

उनके इस व्यवहारिक योगदान ने समाज में उनके महत्व को और मजबूत कर दिया. उन्हें सिर्फ इस वजह से महत्व नहीं दिया जाता था कि वह एक देवी से जुड़ी थीं, बल्कि इसलिए भी क्योंकि वे ऐसे काम करती थी जिनसे घरों और खेती बाड़ी को मदद मिलती थी. 


इस देश में बिल्ली को मारने पर दी जाती थी मौत की सजा, जानें क्यों बना ऐसा कानून ?

शोक और ममी बनाने की प्रथा 

बिल्लियों के प्रति सम्मान शोक मनाने की रीतियों में झलकता था. जब भी घर की पालतू बिल्ली मर जाती थी तो परिवार के लोग शोक मनाते थे और अपनी भौहें मुंडवा लेते थे. शोक प्रकट करने का यह तरीका दिखाता है कि घर में उस जानवर का कितना भावनात्मक महत्व था. 

मृत्यु के बाद बिल्ली के अवशेषों को काफी सावधानी से ममी बना दिया जाता था. ठीक वैसे ही जैसा इंसानों के अवशेषों के साथ किया जाता था. इसके बाद बिल्ली को पूरे सम्मान के साथ दफनाया जाता था. इन रिवाजों से पता चलता है कि परिवार और बिल्लियों के बीच का रिश्ता सिर्फ रोजमर्रा के साथ तक ही सीमित नहीं था. 

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बिल्लियों का स्थान इतना खास क्यों?

प्राचीन मिस्र में बिल्लियों को मारने पर मिलने वाली कड़ी सजा के पीछे दो मुख्य कारण हैं. पहला देवी से जुड़ाव की वजह से बिल्लियों को धार्मिक महत्व मिला हुआ था और उनके शिकार करने की आदत से अनाज के भंडारों की सुरक्षा होती थी. इन भूमिकाओं की वजह से बिल्लियां आध्यात्मिक और व्यावहारिक दोनों ही दृष्टि से जरूरी हो गई थी. 

यहां बताए गए कानून, शोक मनाने के रिवाज और ममी बनाने की प्रथाएं दर्शाती हैं कि इस समाज में बिल्लियों का कितना गहरा सम्मान था. उनके इस खास स्थान को किसी एक कारण से नहीं समझा जा सकता. इसमें आस्था, खाद्य सुरक्षा और पारिवारिक लगाव शामिल थे.

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स्पर्श गोयल एबीपी लाइव के साथ कंटेंट राइटर के तौर पर जुड़े हुए हैं. वह जनरल नॉलेज बीट की जिम्मेदारी संभालते हैं. कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में उन्हें चार साल का अनुभव है. एबीपी से पहले वह डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद में करीब दो साल तक काम कर चुके हैं. उन्होंने नमस्कार भारत से अपने करियर की शुरुआत की थी. .

वह अलग-अलग विषयों पर रिसर्च करके पाठकों के लिए जानकारी को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण अंदाज में पेश करते हैं. उन्होंने न्यूज राइटिंग के साथ-साथ स्क्रीनराइटिंग में भी अपनी पकड़ मजबूत की.

उन्होंने मां शाकुम्भरी यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. इसके साथ उन्होंने एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलिविजन से स्क्रीनप्ले का डिप्लोमा भी हासिल किया है.

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