ठंड में शराब पीने से भाग जाती है सर्दी, कितनी सच है ये बात?
सर्दियों में शराब पीने से शरीर के भीतर गर्मी आने का अहसास सिर्फ एक भ्रम है, क्योंकि यह त्वचा की वाहिकाओं को फैलाकर तापमान तेजी से गिरा देता है. आइए जानें कि शराब पीने के बाद शरीर में क्या-क्या होता है.

सर्दियों का मौसम शुरू होते ही लोगों के बीच खानपान और रहन-सहन को लेकर कई तरह की बातें होने लगती हैं. समाज में बरसों से एक बहुत आम धारणा चली आ रही है कि ठंड के दिनों में शराब पीने से शरीर अंदर से गर्म हो जाता है और कड़ाके की सर्दी से राहत मिलती है. बहुत से लोग इसे सर्दियों से निपटने का एक घरेलू तरीका भी मानते हैं. लेकिन क्या सच में शराब पीने से शरीर का तापमान बढ़ता है या फिर यह सिर्फ एक छलावा है? आज हम जानेंगे कि इसके पीछे का वैज्ञानिक सच क्या है.
शराब पीने पर शरीर में क्या होता है?
जब कोई व्यक्ति सर्दी के मौसम में शराब का सेवन करता है, तो उसे कुछ ही पलों में अपने शरीर के भीतर एक अजीब सी गर्माहट का अहसास होने लगता है. चेहरा लाल पड़ जाता है और हाथ-पैरों में भी नरमी सी महसूस होने लगती है. लोग अक्सर इसे ही शरीर के गर्म होने का पुख्ता सबूत मान लेते हैं. लेकिन चिकित्सा विज्ञान के जानकारों का कहना है कि यह गर्माहट पूरी तरह से एक भ्रम है. असल में शराब शरीर को भीतर से गर्म नहीं करती, बल्कि शरीर के अंदर चल रही एक शारीरिक प्रक्रिया का नतीजा होती है जो बाहरी तौर पर केवल गर्मी का अहसास कराती है.
त्वचा तक पहुंचने लगता है गर्म खून
इस पूरी प्रक्रिया के पीछे हमारे शरीर की रक्त वाहिकाओं का बहुत बड़ा हाथ होता है. जब कोई व्यक्ति शराब पीता है, तो उसके शरीर की त्वचा के बिल्कुल पास मौजूद छोटी-छोटी रक्त वाहिकाएं यानी ब्लड वेसल्स अचानक फैल जाती हैं. इन वाहिकाओं के फैलने की वजह से शरीर का गर्म खून तेजी से त्वचा की सतह की तरफ दौड़ने लगता है. चूंकि गर्म खून त्वचा के करीब पहुंच जाता है, इसलिए उस व्यक्ति को यह महसूस होता है कि उसके शरीर में गर्मी आ गई है. हालांकि, यह केवल त्वचा के स्तर पर होने वाला एक सतही अहसास होता है.
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अंदरूनी तापमान गिरने का खतरा
त्वचा की तरफ गर्म खून के पहुंचने से एक बड़ा नुकसान यह होता है कि शरीर की असली गर्मी बहुत तेजी से बाहर के ठंडे वातावरण में लीक होने लगती है. यानी एक तरफ जहां इंसान को ऊपर से गर्माहट महसूस हो रही होती है, वहीं दूसरी तरफ उसके शरीर का अंदरूनी तापमान यानी कोर टेम्परेचर लगातार गिर रहा होता है. सामान्य स्थिति में इंसानी शरीर का आंतरिक तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस या 98.6 डिग्री फारेनहाइट होना चाहिए. यदि यह तापमान ठंड के कारण 35 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है, तो इंसान हाइपोथर्मिया नामक गंभीर स्थिति का शिकार हो जाता है, जो जानलेवा साबित हो सकती है.
कांपने की प्राकृतिक क्षमता का कम होना
जब हमारे शरीर को अत्यधिक ठंड लगती है, तो वह खुद को बचाने के लिए अपने आप कांपना शुरू कर देता है. यह कांपना शरीर का एक प्राकृतिक डिफेंस मेकैनिज्म है, जिसके जरिए मांसपेशियां हरकत में आती हैं और शरीर के अंदर प्राकृतिक रूप से गर्मी पैदा होती है. लेकिन जब कोई व्यक्ति शराब के नशे में होता है, तो यह शराब उसके दिमाग के उस हिस्से को प्रभावित करती है जो तापमान को नियंत्रित करता है. इसके असर से शरीर की कांपने की क्षमता कमजोर हो जाती है और इंसान को ठंड का सही अहसास होना बंद हो जाता है. उसे खतरे का जरा भी अंदाजा नहीं होता और उसका शरीर धीरे-धीरे अंदर से ठंडा पड़ता जाता है.
पहाड़ों और पुरानी मान्यताओं का मिथक
अक्सर फिल्मों या पुरानी कहानियों में यह दिखाया जाता है कि बर्फीले पहाड़ों या अत्यधिक ठंडे इलाकों में ठंड भगाने के लिए लोग शराब का सहारा लेते हैं. समाज में इस बात को लेकर कई तरह के भ्रम फैले हुए हैं कि यह शरीर को जमाव से बचाती है, लेकिन आपातकालीन चिकित्सा और डॉक्टर इस बात पर पूरी तरह से रोक लगाते हैं. गंभीर रूप से ठंड से प्रभावित यानी हाइपोथर्मिया के शिकार किसी भी व्यक्ति को कभी भी शराब नहीं दी जानी चाहिए. ऐसा करने से उसके शरीर की बची-खुची आंतरिक गर्मी भी बहुत तेजी से बाहर निकल जाती है और उसकी जान खतरे में पड़ सकती है.
किन लोगों के लिए यह सबसे ज्यादा खतरनाक है?
शराब का सेवन और ठंड का यह मेल कुछ खास तरह के लोगों के लिए बहुत ज्यादा घातक साबित हो सकता है. जो लोग कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे, छतों पर या किसी ठंडे कमरे में सो जाते हैं, उनके लिए जोखिम कई गुना बढ़ जाता है. इसके अलावा बुजुर्ग लोग, ऐसे व्यक्ति जिनका वजन बहुत कम है, या जिन्हें दिल और हाई ब्लड प्रेशर की पुरानी बीमारी है, उन्हें सर्दियों में शराब से पूरी तरह दूर रहना चाहिए. हर साल सर्दियों के मौसम में नशे की हालत में खुले में सोए लोगों की दुखद मौतों के मामलों के पीछे यही मुख्य वजह होती है कि शराब पीने के कारण उन्हें ठंड का अहसास ही नहीं हो पाता है.

सेहत को होने वाले अन्य गंभीर नुकसान
ठंड के दिनों में शराब पीने से शरीर को कई और तरह की गंभीर परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है. शराब के सेवन से शरीर में यूरिन यानी पेशाब की मात्रा काफी बढ़ जाती है, जिसकी वजह से शरीर में पानी की भारी कमी यानी डिहाइड्रेशन हो सकता है. इसके अलावा, रात की नींद की गुणवत्ता भी बुरी तरह प्रभावित होती है. ठंड के मौसम में वैसे ही हमारे दिल और ब्लड प्रेशर पर प्राकृतिक रूप से दबाव बढ़ा रहता है, और शराब इस दबाव को और ज्यादा खतरनाक स्तर तक पहुंचा सकती है. नशे की हालत में शरीर का संतुलन बिगड़ जाने से फिसलकर गिरने और गंभीर चोट लगने का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है.
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