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PNG Gas: युद्ध के बीच पीएनजी पर क्यों नहीं पड़ रहा असर, जानें भारत में कितना होता है प्रोडक्शन?

PNG Gas: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर ईंधन आपूर्ति पर पड़ रहा है. लेकिन पीएनजी की आपूर्ति अभी भी स्थिर है. आइए जानते हैं क्या है इसका कारण?

PNG Gas: ईरान, इजरायल और वैश्विक ऊर्जा बाजारों से जुड़े मौजूदा तनाव के बीच भारत में घरों में ईंधन आपूर्ति संबंधी चिंताएं बढ़ने लगी हैं.  इंपोर्ट पर ज्यादा निर्भरता की वजह से एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है. वहीं पाइपलाइन से आने वाली पीएनजी की आपूर्ति काफी हद तक स्थिर बनी हुई है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.

घरेलू गैस को प्राथमिकता 

पीएनजी के अप्रभावित रहने की सबसे बड़ी वजह भारत का अपना प्राकृतिक गैस उत्पादन है. देश की लगभग 50% गैस मांग घरेलू स्तर पर पूरी होती है. इसी के साथ सरकार घरेलू पीएनजी और सीएनजी जैसे जरूरी उपयोगों के लिए आपूर्ति को प्राथमिकता देती है. इससे यह पक्का होता है कि वैश्विक व्यवधानों के दौरान भी रसोई में गैस की आपूर्ति जारी रहे.

आयात निर्भरता का अंतर 

भारत अपनी एलपीजी आयात का 90% से ज्यादा खाड़ी देशों पर निर्भर है. इससे यह भू-राजनीतिक तनावों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाता है. इसके उलट पीएनजी के लिए उपयोग की जाने वाली एलएनजी अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देशों से आती है. 

पाइपलाइन प्रणाली की सुचारू आपूर्ति 

एलपीजी के उलट जिसे सिलेंडर, ट्रक या फिर वितरण नेटवर्क के जरिए से परिवहन की जरूरत होती है, पीएनजी सीधे भूमिगत पाइपलाइनों के जरिए से वितरित की जाती है. इससे रसद संबंधी बाधाएं दूर हो जाती हैं और संकट के समय भी आपूर्ति लगातार चलती रहती है. 

भंडारण बफर बैकअप आपूर्ति देता है

आयातित एलएनजी को भारत भर के टर्मिनल में तरल रूप में संग्रहित किया जाता है. यह भंडार बफर के रूप में काम करते हैं. इससे इंपोर्ट में अस्थायी रुकावट आने पर भी देश कई हफ्तों तक आपूर्ति बनाए रख सकता है.

भारत की बढ़ती गैस उत्पादन क्षमता 

भारत प्राकृतिक गैस उत्पादन में लगातार वृद्धि कर रहा है. 2023-24 में देश ने लगभग 36.4 बिलियन घन मीटर गैस का उत्पादन किया. वर्तमान में दैनिक उत्पादन 92 से 97.5 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रति माह के बीच है.

आंध्र प्रदेश तट पर स्थित कृष्णा गोदावरी बेसिन प्रमुख उत्पादक केंद्रों में से एक है. यह कुल उत्पादन में लगभग 25% का योगदान देता है. असम और त्रिपुरा जैसे राज्य तटवर्ती उत्पादन का लगभग 47% हिस्सा हैं. इसी के साथ मुंबई के पास स्थित समुद्री क्षेत्र भी बड़ी भूमिका निभाते हैं. वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए सरकार परिवारों को पीएनजी कनेक्शन की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है.

यह भी पढ़ें: सिर्फ इजरायल और भारत ही नहीं, इस देश में भी पाकिस्तानी लोगों की एंट्री पर लगी है रोक

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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