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Cyclone Names: मुरासु से लेकर बिपरजॉय तक... कैसे रखे जाते हैं चक्रवात के नाम, जानें क्या होती है प्रकिया

Cyclone Names: अक्सर ही लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि चक्रवात के नाम कैसे रखे जाते हैं. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

Cyclone Names: गुरुवार देर रात उत्तरी भारत के कई जिलों में मोबाइल यूजर्स अचानक चौंक गए. दरअसल उनके फोन अचानक जोर-जोर से सायरन बजाने लगे और उन पर मौसम से जुड़े आपातकालीन अलर्ट दिखने लगे. इन अलर्ट में तूफान, बिजली गिरने, भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी दी गई थी. इसी बीच आइए जानते हैं कि बिपरजॉय जैसे चक्रवात के नाम आखिर कैसे रखे जाते हैं. 

क्या होती है प्रकिया?

बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले चक्रवातों के नाम एक काफी व्यवस्थित अंतरराष्ट्रीय प्रणाली के तहत रखे जाते हैं. इस प्रणाली की देखरेख विश्व मौसम विज्ञान संगठन और संयुक्त राष्ट्र के एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए आर्थिक और सामाजिक आयोग द्वारा की जाती है. उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र के 13 देशों का एक बड़ा पैनल मिलकर भविष्य में आने वाले तूफानों के लिए नामों का सुझाव देता है. 

चक्रवातों के नाम कौन से देश तय करते हैं?

चक्रवातों के नाम तय करने वाले इस पैनल में भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, मालदीव, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका, थाईलैंड, ईरान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और यमन शामिल हैं. हर देश नामों की एक सूची जमा करता है. बाद में उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र में बनने वाले ट्रॉपिकल साइक्लोन को इन्हीं नामों में से कोई एक नाम दिया जाता है.  ये नाम वर्णमाला के क्रम के आधार पर पहले से तय की गई एक सूची में रखे जाते हैं. जैसे-जैसे तूफान आते हैं वैसे-वैसे इन नामों का इस्तेमाल एक के बाद एक किया जाता है. 

कैसे काम करती है यह प्रक्रिया? 

जब भी अरब सागर या फिर बंगाल की खाड़ी में कोई चक्रवाती तूफान बनता है और एक तय तीव्रता तक पहुंच जाता है तो भारत मौसम विज्ञान विभाग पहले से तैयार सूची में से अगला उपलब्ध नाम उस तूफान को आधिकारिक तौर पर दे देता है. चक्रवातों की निगरानी करने और उनके नाम रखने की जिम्मेदारी के लिए विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने दुनिया भर में जिन 6 क्षेत्रीय विशेष मौसम विज्ञान केंद्रों को मान्यता दी है भारत मौसम विज्ञान विभाग उनमें से एक है. 

सख्त नियमों का पालन जरूरी 

देश चक्रवातों के लिए कोई भी नाम या विवादित नाम नहीं दे सकते. विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने इस बारे में सख्त नियम बनाए हैं कि किस तरह के नाम मंजूर किए जाएंगे. चक्रवात का नाम राजनीतिक और धार्मिक रूप से निष्पक्ष होना चाहिए. यह धर्म, लिंग, राष्ट्रीयता या फिर संस्कृति से जुड़ी भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचा सकता. नाम आसान होना चाहिए जिसका उच्चारण करना आसान हो और आपात स्थिति में अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले लोग इसे जल्दी से समझ सकें. इन सबके अलावा नाम आठ अक्षरों से ज्यादा लंबा नहीं होना चाहिए.

यह भी पढ़ेंः फ्रांस नहीं बल्कि यहां हुआ था फ्रेंच फ्राइज का आविष्कार, जानें फिर कैसे पड़ा इसका यह नाम?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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