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अमेरिका-इजरायल और ईरान के युद्ध से किन देशों को फायदा, जानें किसकी कमाई बढ़ी सबसे ज्यादा?

US Israel Iran War: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के दौरान कुछ देश ऐसे भी हैं जिन्हें काफी फायदा हो रहा है. आइए जानते हैं कौन से हैं वे देश.

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  • ईरान-इजरायल युद्ध से रूस को तेल-गैस कीमतों से लाभ।
  • अमेरिका की डिफेंस कंपनियों को।
  • यूरोप के लिए अमेरिका की एलएनजी सप्लाई बढ़ी।
  • नॉर्वे, कनाडा, ब्राजील जैसे देशों को निर्यात में फायदा।

US Israel Iran War: ईरान, इजरायल और यूनाइटेड स्टेट्स के बीच चल रहे झगड़े ने ग्लोबल इकॉनमी में बड़ी रूकावटों को पैदा कर दिया है. जहां युद्ध में सीधे तौर पर शामिल देश मिलिट्री ऑपरेशन और डिफेंस सिस्टम पर अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं, वहीं इस संकट से अचानक कई दूसरे देशों और इंडस्ट्रीज को फायदा हुआ है.  तेल की बढ़ती कीमत, हथियारों की बढ़ती डिमांड और एनर्जी सप्लाई के बदलते रास्तों ने लड़ाई के मैदान से दूर कुछ देशों के लिए आर्थिक मौके पैदा किए हैं. आइए जानते हैं कि इस जंग का सबसे ज्यादा फायदा किन देशों को हो रहा है.

रूस को सबसे बड़ा आर्थिक फायदा 

यूरोपीयन यूनियन के कई एनालिस्ट और अधिकारियों के मुताबिक रूस को इस जंग का सबसे बड़ा फायदा हो रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह ग्लोबल तेल और गैस की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी है. जैसे-जैसे मिडल ईस्ट में तनाव बढ़ा कच्चे तेल की कीमतें 100 से 115 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गईं. रूस दुनिया के सबसे बड़े एनर्जी एक्सपोर्टर्स में से एक है और इस कीमत में बढ़ोतरी से काफी फायदा उठा रहा है. 

इसके अलावा मिडिल ईस्ट के सप्लाई रूट में रूकावटों की वजह से भारत और चीन जैसे बड़े तेल खरीदारों ने रूस से ज्यादा कच्चा तेल खरीदा है. इस बदलाव से मॉस्को का एनर्जी रेवेन्यू बढ़ा है. रूस के लिए एक और स्ट्रैटेजिक फायदा यह है कि दुनिया का ध्यान रूस-यूक्रेन युद्ध से हट गया है. इससे मॉस्को पर इंटरनेशनल दबाव कम हुआ है.

यूनाइटेड स्टेट्स डिफेंस कंपनियों को बड़ा फायदा 

भले ही यूनाइटेड स्टेट्स मिलिट्री ऑपरेशन और इजरायल को सपोर्ट देने पर भारी खर्च कर रहा है लेकिन उसकी इकोनॉमी के कुछ सेक्टर में काफी फाइनेंशियल फायदा हो रहा है. यूनाइटेड स्टेट्स में सबसे ज्यादा फायदा डिफेंस ठेकेदारों को हुआ है. उनके शेयर हथियारों और मिलट्री इक्विपमेंट की बढ़ती डिमांड की वजह से बढ़ें हैं. युद्ध ने अमेरिकी एनर्जी एक्सपोर्ट, खासकर लिक्विफाइड नेचुरल गैस को भी काफी ज्यादा बढ़ावा दिया है. जैसे-जैसे यूरोप रूसी गैस के विकल्प ढूंढ रहा है, यूनाइटेड स्टेट्स लिक्विफाइड नेचुरल गैस शिपमेंट की डिमांड बढ़ी है. इससे अमेरिकी एनर्जी कंपनियों का रेवेन्यू बढ़ा है.

दूसरे एनर्जी एक्सपोर्टर्स को भी फायदा 

जो देश लड़ाई वाले इलाके और होर्मुज स्ट्रेट से दूर हैं उन्हें भी इस संकट से काफी फायदा हो रहा है. क्योंकि गल्फ से होकर जाने वाले शिपिंग रूट पक्के नहीं हैं इस वजह से कई देश सुरक्षित एनर्जी सप्लायर ढूंढ रहे हैं. नॉर्वे ने यूरोप को गैस एक्सपोर्ट बढ़ा दिया है और डिमांड बढ़ने की वजह से ज्यादा कीमत पर एनर्जी बेच रहा है. इसी तरह कनाडा मैं भी अपने तेल और गैस एक्सपोर्ट की डिमांड बढ़ी है. 

इसी के साथ कुछ उभरते हुए एनर्जी प्रोड्यूसर्स भी ग्लोबल सप्लाई में रुकावट से फायदा उठा रहे हैं. ब्राजील और गुयाना जैसे देश मिडिल ईस्ट जैसे बाहर भरोसेमंद तेल एक्सपोर्टर के तौर पर ध्यान खींच रहे हैं. 

क्यों हो रहा है कुछ देशों को आर्थिक फायदा? 

दरअसल इन देशों को आर्थिक फायदा होने की कई वजह हैं. सबसे बड़ी वजहों में से एक कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी है. इससे तेल बनाने वाले देशों की कमाई काफी बढ़ जाती है. एक और बड़ा फायदा हथियारों और मिलिट्री इक्विपमेंट की बढ़ती डिमांड है. डिफेंस कंपनियों को अरबों डॉलर के ऑर्डर मिल रहे हैं.

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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