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यूरेनियम और प्लूटोनियम वाले परमाणु बम में क्या फर्क, किसके फटने से ज्यादा होती है तबाही?

Plutonium Uranium Bomb: यूरेनियम और प्लूटोनियम दोनों से ही परमाणु बम बनाए जा सकते हैं. आइए जानते हैं कि कौन सा बम ज्यादा खतरनाक होगा.

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  • जापान के पास 5500 परमाणु हथियार बनाने योग्य प्लूटोनियम।
  • यूरेनियम बम यू-235, प्लूटोनियम बम पीयू-239 से बनते।
  • यूरेनियम बम गण डिजाइन, प्लूटोनियम बम इम्प्लोजन डिजाइन।
  • प्लूटोनियम बम अधिक ऊर्जावान, ज्यादा विनाशकारी क्षमता रखते।

Plutonium Uranium Bomb: चीन के एक सरकारी अखबार के मुताबिक जापान के पास इतना प्लूटोनियम है कि वह 5500 परमाणु हथियार बना सकता है. इसी बीच लोगों के मन में एक सवाल उठ रहा है कि जब यूरेनियम और प्लूटोनियम दोनों ही परमाणु बम बनाने के मुख्य घटक हैं तो इनमें फर्क क्या होता है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

इस्तेमाल होने वाला ईंधन 

यूरेनियम बम में मुख्य पदार्थ के तौर पर यूरेनियम-235 का इस्तेमाल होता है. इसी के साथ प्लूटोनियम बम में प्लूटोनियम-239 का इस्तेमाल होता है. यूरेनियम धरती में कुदरती तौर पर पाया जाता है और U-235 की मात्रा बढ़ाने के लिए इसे शुद्ध करना पड़ता है. दूसरी तरफ प्लूटोनियम कुदरती तौर पर ज्यादा मात्रा में नहीं मिलता. इसे न्यूक्लियर रिएक्टर के अंदर यूरेनियम से बनाया जाता है. 

डिजाइन और काम करने का तरीका 

सबसे बड़ा तकनीकी फर्क इस बात में है कि धमाका कैसे शुरू होता है. यूरेनियम बम में आमतौर पर गण टाइप डिजाइन का इस्तेमाल होता है. इसमें दो सब क्रिटिकल टुकड़ों को एक दूसरे की तरफ तेजी से फेंका जाता है. इससे एक सुपर क्रिटिकल रिएक्शन शुरू होता है. यह तरीका काफी आसान है और हिरोशिमा पर गिराए गए बम में इसी का इस्तेमाल किया गया था. 

प्लूटोनियम बम में कहीं ज्यादा पेचीदा इम्प्लोजन टाइप डिजाइन का इस्तेमाल होता है. इस सिस्टम में धमाका करने वाले पदार्थ प्लूटोनियम के मुख्य हिस्से को अंदर की तरफ दबाते हैं. इससे एक काफी असरदार चेन रिएक्शन शुरू होता है. नागासाकी पर गिराए गए बम में इसी डिजाइन का इस्तेमाल किया गया था. 

धमाके की क्षमता 

प्लूटोनियम बम को ज्यादा आधुनिक मानने की मुख्य वजह उसकी असरदार क्षमता है. यूरेनियम बम में पदार्थ का कुछ हिस्सा रिएक्शन में पूरी तरह से हिस्सा नहीं ले सकता. इस वजह से उसकी कुल असरदार क्षमता कम हो जाती है. प्लूटोनियम बम अपने इम्प्लोजन सिस्टम की वजह से ईंधन का ज्यादा पूरी तरह से इस्तेमाल करते हैं. इसकी वजह से कम मात्रा में मटीरियल होने पर भी ज्यादा जोरदार धमाका होता है.

ऊर्जा और तबाही मचाने की ताकत 

जब बराबर मात्रा की तुलना की जाती है तो प्लूटोनियम से बने बम आमतौर पर ज्यादा ऊर्जा पैदा करते हैं. प्लूटोनियम में होने वाले फिशन से प्रति यूनिट ज्यादा ऊर्जा निकलती है. इससे यह ज्यादा तबाही मचाने वाला बन जाता है. इस ज्यादा असरदार क्षमता का मतलब है कि प्लूटोनियम बम उसी आकार के यूरेनियम बम के मुकाबले ज्यादा बड़ा धमाका, ज्यादा तेज गर्मी और ज्यादा जोरदार शॉकवेव पैदा कर सकते हैं.

ज्यादा खतरनाक कौन सा है? 

विनाशकारी क्षमता के मामले में प्लूटोनियम बम आमतौर पर ज्यादा शक्तिशाली होता है. उनकी ज्यादा एफिशिएंसी, ज्यादा ऊर्जा का निकलना और छोटा डिजाइन उन्हें एडवांस्ड परमाणु हथियारों में ज्यादा घातक बनाता है.

यह भी पढ़ें: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से LPG लेकर आ रहा ग्रीन सान्वी, भारत आने तक पी जाएगा कितना तेल?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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