एक्सप्लोरर

चुनाव रिजल्ट 2026

(Source: ECI/ABP News)

जब नहीं था UGC तब कौन देता था यूनिवर्सिटी को मान्यता, अंग्रेजों के जमाने में कितनी अलग थी व्यवस्था?

हाल ही में सरकार यूजीसी के नए नियम लेकर आई थी, जिनका जमकर विरोध देखने को मिला, जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. आज कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए सभी नए नियमों पर रोक लगा दी है.

जनवरी 2026 में यूजीसी ने अपने नए Equity in Higher Education Institutions Regulations जारी किए थे. इन नियमों का उद्देश्य कैंपसों में जाति-आधारित भेदभाव को खत्म करना और छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करना था. हालांकि, नियम जारी होते ही कई सवाल उठने लगे और आज यानि गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए नए नियमों पर फिलहाल रोक लगा दी है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या की पीठ ने कहा कि नियमों में कई बातें अस्पष्ट हैं, जिससे उनका गलत इस्तेमाल होने का खतरा है. कोर्ट ने केंद्र सरकार से निर्देश दिया कि नए नियमों का मसौदा फिर से तैयार किया जाए और उन्हें अधिक पारदर्शी और स्पष्ट बनाया जाए. 

कोर्ट ने यह भी कहा कि वर्तमान में व्यवस्थाएं 2012 के ढांचे के अनुसार ही चलेंगी. भारत की यूनिवर्सिटी व्यवस्था में वर्षों से कई बदलाव होते रहे हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यूजीसी बनने से पहले विश्वविद्यालयों को कौन मान्यता देता था? क्या अंग्रेजों के जमाने में नियम अलग थे और संस्थानों की निगरानी कैसे होती थी? आइए जानें.

यूजीसी क्या होता है?

यूजीसी यानी यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन. यह भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली एक वैधानिक संस्था है. इसका मुख्य काम देश में उच्च शिक्षा की दिशा तय करना और विश्वविद्यालयों के कामकाज को व्यवस्थित रखना है. यूजीसी यह सुनिश्चित करता है कि यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में पढ़ाई, परीक्षा और शोध का स्तर एक तय मानक के अनुसार हो.

इसके अलावा संसद द्वारा पारित यूजीसी अधिनियम 1956 के तहत यह संस्था योग्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को आर्थिक सहायता यानी ग्रांट भी देती है. यूजीसी केंद्र और राज्य सरकारों को उच्च शिक्षा से जुड़े विकास कार्यों पर सलाह देने की भूमिका भी निभाता है, ताकि शिक्षा व्यवस्था मजबूत और संतुलित बनी रहे.

यूजीसी की शुरुआत कब और कैसे हुई, इससे पहले कैसे मिलती थी मान्यता?

भारत में उच्च शिक्षा की परंपरा कोई नई नहीं है. प्राचीन समय में नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालय दुनिया भर में प्रसिद्ध थे. इन संस्थानों में कोरिया, चीन, बर्मा (म्यांमार), सीलोन (श्रीलंका), तिब्बत और नेपाल जैसे देशों से छात्र पढ़ने आते थे. ब्रिटिश शासन के दौरान शिक्षा व्यवस्था में कई बदलाव हुए. 1823 में माउंटस्टुअर्ट एल्फिंस्टन, 1835 में लॉर्ड मैकाले और 1854 में सर चार्ल्स वुड ने शिक्षा सुधारों की दिशा तय की, खासकर अंग्रेजी शिक्षा को बढ़ावा देने में उनकी बड़ी भूमिका रही.

कम लोगों को पता है कि आजादी से पहले ही यूजीसी की नींव रखी जा चुकी थी. 1944 में भारत में एक राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हुई. इसी दौरान केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड ने एक रिपोर्ट तैयार की, जिसे सार्जेंट रिपोर्ट कहा गया. इस रिपोर्ट में पहली बार विश्वविद्यालय अनुदान समिति बनाने का सुझाव दिया गया.

 यूजीसी बनने से पहले, विश्वविद्यालयों की मान्यता और निगरानी सीधे केंद्रीय सरकार (शिक्षा मंत्रालय) और कुछ मामलों में पूर्ववर्ती समितियों के माध्यम से की जाती थी.

आजादी से पहले ही रखी गई थी नींव

सार्जेंट रिपोर्ट के आधार पर 1945 में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिटी का गठन किया गया. शुरुआत में इसका काम अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी और दिल्ली यूनिवर्सिटी जैसे तीन केंद्रीय विश्वविद्यालयों की निगरानी तक सीमित था. लेकिन 1947 में इस समिति की जिम्मेदारी बढ़ा दी गई और उसे देश के सभी विश्वविद्यालयों से जुड़े मामलों को देखने का अधिकार दे दिया गया. 

स्वतंत्र भारत में यूजीसी को मिला नया रूप

आजादी के बाद 1948 में डॉ. एस. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग बनाया गया. इस आयोग की सिफारिशों के आधार पर भारत में यूजीसी को ब्रिटेन के मॉडल पर दोबारा संगठित किया गया. इसके बाद 28 दिसंबर 1953 को तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने आधिकारिक रूप से यूजीसी का उद्घाटन किया. हालांकि, नवंबर 1956 में संसद द्वारा पारित यूजीसी अधिनियम 1956 के जरिए इसे वैधानिक दर्जा मिला और तब से यह भारत सरकार की एक स्थायी और महत्वपूर्ण संस्था बन गई. 

अंग्रेजों के समय क्या थी व्यवस्था

ब्रिटिश शासन के दौरान विश्वविद्यालयों की स्थापना और मान्यता कानूनी अधिनियमों और केंद्रीय/प्रांतीय नीतियों के माध्यम से होती थी. इसमें कई सीमाएं थीं, जैसे कि मानकीकृत निगरानी का अभाव और भौगोलिक तौर पर कुछ विश्वविद्यालयों पर ज्यादा ध्यान देना.

1925 में स्थापित इंटर-यूनिवर्सिटी बोर्ड ने सहयोग और संचार बढ़ाया, लेकिन इसे किसी विश्वविद्यालय को मान्यता देने का अधिकार नहीं था. 1945 में बने University Grants Committee ने पहले तीन केंद्रीय विश्वविद्यालयों को मॉनिटर किया और 1947 के बाद देश के सभी विश्वविद्यालयों पर नजर रखी.

यह भी पढ़ें: देश का कौन-सा राज्य लेता है सबसे ज्यादा कर्ज? इस लिस्ट में कहीं आपका स्टेट तो नहीं

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

Election Results 2026: किस सीट पर कितने राउंड में होती वोटों की गिनती, कैसे होता है तय?
किस सीट पर कितने राउंड में होती वोटों की गिनती, कैसे होता है तय?
Election Result 2026: चुनाव जीतने वाले विधायकों को क्या पहले दिन से ही मिलने लगती है सैलरी, क्या है नियम?
चुनाव जीतने वाले विधायकों को क्या पहले दिन से ही मिलने लगती है सैलरी, क्या है नियम?
Election Results 2026: क्या रिजल्ट की घोषणा होते ही हट जाती है आचार संहिता, किसके हाथ में आ जाती है पावर?
क्या रिजल्ट की घोषणा होते ही हट जाती है आचार संहिता, किसके हाथ में आ जाती है पावर?
LPG Prices: तेल संकट के बीच इन देशों में अभी भी मिल रही है सबसे सस्ती एलपीजी, जानें क्या है वजह?
तेल संकट के बीच इन देशों में अभी भी मिल रही है सबसे सस्ती एलपीजी, जानें क्या है वजह?

वीडियोज

West Bengal Election Results 2026 Updates: बंगाल में भगवा लहर, BJP मजबूत | Mamata Banerjee | TMC
West Bengal Election Result Vote Counting: बीजेपी बहुमत की ओर | TMC Vs BJP | Mamata
Assembly Elections Result: बंगाल में बीजेपी आगे | PM Modi | TMC Vs BJP | Breaking
West Bengal Election Updates: बंगाल में पलटती बाजी, ममता को बड़ा झटका | West Bengal | Mamata | TMC
Election Results 2026 for West Bengal Assembly: BJP ने जीता किला | BJP | Mamata Banerjee

फोटो गैलरी

Petrol Price Today
₹ 94.77 / litre
New Delhi
Diesel Price Today
₹ 87.67 / litre
New Delhi

Source: IOCL

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
पश्चिम बंगाल के रुझान देख उमर अब्दुल्ला का चौंकाने वाला रिएक्शन, दो शब्दों में बयां की हैरानी
पश्चिम बंगाल के रुझान देख उमर अब्दुल्ला का चौंकाने वाला रिएक्शन, दो शब्दों में बयां की हैरानी
Binnakandi Election Result 2026: क्या बिन्नाकंडी सीट जीत पाएंगे बदरुद्दीन अजमल? सामने आए रुझान
Binnakandi Election Result 2026: क्या बिन्नाकंडी सीट जीत पाएंगे बदरुद्दीन अजमल? सामने आए रुझान
Share Market: शेयर बाजार पर चढ़ा चुनावी नतीजे का रंग, खुलते ही तेजी से उछले सेंसेक्स और निफ्टी 125 अंक ऊपर
शेयर बाजार पर चढ़ा चुनावी नतीजे का रंग, खुलते ही तेजी से उछले सेंसेक्स और निफ्टी 125 अंक ऊपर
बीजेपी की पूर्व सांसद रीता बहुगुणा जोशी के पति का निधन, SGPGI लखनऊ में ली अंतिम सांस
बीजेपी की पूर्व सांसद रीता बहुगुणा जोशी के पति का निधन, SGPGI लखनऊ में ली अंतिम सांस
सायरा बानो ने हेमा मालिनी संग मुलाकात की तस्वीर की शेयर , धर्मेंद्र को याद कर लिखा- 'दिलीप साहब के लिए उनका प्यार...'
सायरा बानो ने हेमा मालिनी संग मुलाकात की तस्वीर की शेयर, धर्मेंद्र और दिलीप कुमार को लेकर कही ये बात
तमिलनाडु में विजय के काम आई प्रशांत किशोर की ये सलाह, 7 महीने पहले कर दिया था ऐलान
तमिलनाडु में विजय के काम आई प्रशांत किशोर की ये सलाह, 7 महीने पहले कर दिया था ऐलान
राघव चड्ढा का यह कदम चौंकाने वाला, सीएम भगवंत मान से पहले किससे मिलेंगे BJP सांसद?
राघव चड्ढा का यह कदम चौंकाने वाला, सीएम भगवंत मान से पहले किससे मिलेंगे BJP सांसद?
Bidhannagar Election Result 2026: बंगाल में बिधाननगर काउंटिंग सेंटर के बाहर हंगामा! TMC-BJP समर्थकों में हुई झड़प
बंगाल में बिधाननगर काउंटिंग सेंटर के बाहर हंगामा! TMC-BJP समर्थकों में हुई झड़प, पुलिस ने किया लाठीचार्ज
Embed widget