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India Loans: कितने देशों को कर्ज देता है भारत, जानें सबसे ज्यादा किस पर उधार?

India Loans: भारत कई देशों को कर्ज देता है. आइए जानते हैं कि भारत ने सबसे ज्यादा कर्ज किस देश को दिया है.

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  • भारत मित्र देशों को रियायती ऋण, विकास सहायता प्रदान करता है।
  • भूटान को सर्वाधिक सहायता मिलती है, बुनियादी ढांचे के विकास हेतु।
  • नेपाल, मालदीव सहित कई देशों को भी भारत से ऋण।
  • ये रियायती ऋण कम ब्याज, लंबी चुकौती अवधि वाले होते हैं।

India Loans: भारत ना सिर्फ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है बल्कि एशिया, अफ्रीका और हिंद महासागर क्षेत्र के कई देशों के लिए एक जरूरी विकास भागीदार भी है. लाइन ऑफ क्रेडिट के रूप में रियायती कर्ज और विदेशी विकास सहायता के जरिए भारत कई मित्र देशों में बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, परिवहन और सामुदायिक विकास परियोजना के लिए वित्त पोषण करता रहता है. भारत से सबसे ज्यादा कर्ज भूटान को दिया जाता है. 

कितने देशों को वित्तीय सहायता देता है भारत?

भारत सरकार और एक्सपोर्ट इंपोर्ट बैंक ऑफ इंडिया के जरिए से भारत 10 से ज्यादा प्रमुख विकासशील और पड़ोसी देशों को कर्ज और विकास सहायता देता है. इन निधियों का इस्तेमाल मुख्य रूप से सड़क, रेलवे, बिजली परियोजना, बंदरगाह, अस्पताल, स्कूल और दूसरे बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए किया जाता है. इनका उद्देश्य आर्थिक विकास और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना है.

भूटान को सबसे ज्यादा वित्तीय सहायता 

हाल ही के केंद्रीय बजट के आंकड़ों के मुताबिक भूटान भारतीय वित्तीय सहायता का सबसे बड़ा प्राप्त करता है. भारत ने भूटान को मुख्य रूप से जल विद्युत परियोजना, बुनियादी ढांचे के विकास और दूसरी रणनीतिक पहलों के लिए लगभग ₹2,068.56 करोड़ दिए हैं. दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी भूटान को ऐसी सहायता के भारत के सबसे बड़े लाभार्थियों में से एक बनाती है. 

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भारतीय ऋण प्राप्त करने वाले दूसरे देश 

भूटान के अलावा कई पड़ोसी और भागीदार देशों को भारत से वित्तीय सहायता मिलती है. नेपाल को सीमा पार रेलवे परियोजना, एकीकृत चेक पोस्ट और स्थानीय विकास के लिए ₹700 करोड़,  मालदीव को बुनियादी ढांचे और विकास के लिए ₹400 करोड़, मॉरीशस को रणनीतिक और आर्थिक सहयोग के लिए ₹370 करोड़, म्यांमार को ₹250 करोड़, श्रीलंका को ₹245 करोड़, अफगानिस्तान को ₹200 करोड़, अफ्रीकी देश को ₹200 करोड़, बांग्लादेश को ₹120 करोड़, सेशेल्स को ₹40 करोड़ और लैटिन अमेरिकी देश को ₹30 करोड़ दिए गए हैं.

भारत का सॉफ्ट लोन

भारत की तरफ से दी जाने वाली ज्यादातर विदेशी आर्थिक मदद रियायती लाइन ऑफ क्रेडिट के रूप में दी जाती है. इसे आसान शब्दों में सॉफ्ट लोन भी कहा जाता है.  इस कर्ज पर आमतौर पर 1.5% से 2.5% के बीच ब्याज दर लगाया जाता है और कुछ मानवीय या फिर रणनीति प्रोजेक्ट के लिए इससे भी कम दरों पर फंडिंग मिल सकती है.

इसमें कर्ज चुकाने की अवधि आमतौर पर 15 से 20 साल होती है और साथ ही 3 से 5 साल का ग्रेस पीरियड भी मिलता है. इस दौरान कर्ज लेने वाले देश को मूल राशि नहीं चुकानी पड़ती.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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