दुनिया में किसके नाम है सबसे लंबे समय तक भूखा रहने का रिकॉर्ड, जानें कितने दिन चली थी हड़ताल
Sonam Wangchuk Hunger Strike: जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध प्रदर्शन चल रहा है और साथ ही सोनम वांगचुक भी भूख हड़ताल पर हैं. आइए जानते हैं कि अब तक सबसे लंबी भूख हड़ताल किसने की थी.

- इरोम शर्मिला ने 5793 दिन की सबसे लंबी भूख हड़ताल की।
- उन्होंने मणिपुर में AFSPA कानून रद्द करने के लिए 16 साल विरोध किया।
- नासोगैस्ट्रिक ट्यूब से पोषण मिला, फिर उन्होंने लोकतांत्रिक तरीका चुना।
- भगत सिंह समेत कई अन्य ने भी ऐतिहासिक भूख हड़तालें कीं।
Sonam Wangchuk Hunger Strike: दुनिया भर में भूख हड़ताल का इस्तेमाल लंबे समय से अहिंसक विरोध के एक ताकतवर तरीके के तौर पर किया जाता रहा है. भारत की आजादी की लड़ाई से लेकर आज के दौर के राजनीतिक अभियानों तक कई कार्यकर्ताओं ने अपनी मांग की तरफ ध्यान खींचने के लिए भूख हड़ताल का रास्ता चुना. जंतर मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन और कई दिनों की भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता बढ़ चुकी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि सबसे लंबी भूख हड़ताल का वर्ल्ड रिकॉर्ड किसके नाम है.
इरोम शर्मिला के नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड
अब तक सबसे लंबी भूख हड़ताल भारत की इरोम चानू शर्मिला ने की थी. मणिपुर की आयरन लेडी के नाम से मशहूर शर्मिला 2 नवंबर, 2000 से 9 अगस्त, 2016 तक भूख हड़ताल पर रही थीं. ये लगभग 5793 दिन होते हैं.
क्यों की थी भूख हड़ताल?
इरोम शर्मिला ने मणिपुर में मालोम घटना के बाद अपना विरोध शुरू किया था. इसमें असम राइफल्स के जवानों ने कथित तौर पर 10 आम नागरिकों की जान ले ली थी. उन्होंने आर्म्ड फोर्सेस एक्ट को रद्द करने की मांग की थी. उनका तर्क था कि यह कानून संघर्ष वाले इलाकों में काम करने वाले सुरक्षा बलों को काफी ज्यादा अधिकार दे देता है.
16 साल तक कैसे जिंदा रहीं?
भूख हड़ताल शुरू करने के कुछ ही समय बाद अधिकारियों ने शर्मिला को उस समय लागू कानून के तहत आत्महत्या की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था. न्यायिक हिरासत के दौरान, डॉक्टर उन्हें नासौगैस्ट्रिक ट्यूब के जरिए जबरदस्ती खाना खिलाकर जिंदा रखते थे. इस ट्यूब से लिक्विड न्यूट्रिशन और दवाई सीधे उनके पेट में पहुंचाई जाती थी. विरोध के दौरान उन्होंने कभी अपनी मर्जी से ठोस खाना नहीं खाया.
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उन्होंने भूख हड़ताल क्यों खत्म की?
16 साल के लगातार विरोध के बाद शर्मिला इस नतीजे पर पहुंची कि अकेले उनकी भूख हड़ताल से वह राजनीतिक बदलाव नहीं आ पाया जिसकी उन्हें उम्मीद थी. 9 अगस्त 2016 को उन्होंने शहद चखकर अपनी भूख हड़ताल खत्म की और घोषणा की कि वे अब लोकतांत्रिक और चुनावी राजनीतिक के जरिए अपने अभियान को जारी रखेंगी.
कुछ और ऐतिहासिक भूख हड़ताल
कई दूसरी भूख हड़तालें भी अपने लंबे समय और असर की वजह से इतिहास का हिस्सा बन गई हैं. भारत की आजादी की लड़ाई के दौरान भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने लाहौर जेल में 116 दिनों तक की थी. उनकी यह मांग थी कि भारतीय राजनीतिक कैदियों के साथ समान व्यवहार किया जाए और उन्हें बेहतर सुविधा दी जाए. क्रांतिकारी जतिन दास ने अपनी जान गंवाने से पहले 63 दिनों तक भूख हड़ताल की थी.
यूनाइटेड किंगडम में आयरिश रिपब्लिकन आर्मी के सदस्य बॉबी सैंड्स ने राजनीतिक कैदी का दर्जा पाने की मांग को लेकर जेल में 66 दिनों तक भूख हड़ताल की थी. विरोध प्रदर्शन के दौरान ही उनकी मौत हो गई थी.
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