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Nuclear Attack: जहां भी होता है परमाणु हमला, वहां ऐसा होता है नजारा! इस वजह से पता भी नहीं चलता और मौत हो जाती है!

दो देशों के बीच जब युद्ध होता है, तो दुनियाभर के बाकी देशों को सबसे पहले परमाणु हमले की चिंता होने लगती है. युद्ध में अगर परमाणु क्षमता वाला देश अगर परमाणु हमला करेगा, तो इसका असर दुनियाभर में पड़ेगा.

दुनिया में परमाणु हमले को सबसे बड़ा और खतरनाक हमला माना जाता है. इतना ही नहीं दुनिया में जब भी  दो परमाणु क्षमता वाले देशों के मध्य तनाव की स्थिति पैदा होती है या युद्ध छिड़ता है, तो पूरी दुनिया इस चिंता में डूब जाती है कि कहीं परमाणु हमला जैसी स्थिति ना बने. इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर भी दुनियाभर को यही चिंता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि परमाणु हमला कैसे होता है और इसके बाद की स्थिति क्या होती है. आज हम आपको बताएंगे कि परमाणु हमले के बाद क्या-क्या बदल जाता है.  

परमाणु हमला

परमाणु हमले की जब भी बात होती है, तो दुनियाभर में सबसे पहले जापान का नाम लेती है. क्योंकि अमेरिका ने  6 अगस्त 1945 की सुबह जापान के हिरोशिमा पर परमाणु बम "लिटिल बॉय" गिराया था. वहीं तीन दिनों बाद अमरीका ने नागासाकी शहर पर "फ़ैट मैन" परमाणु बम गिराया था. इस घटना में 1-2 लाख से ज्यादा लोगों ने अपनी जाव गंवा दी थी. बचा दें कि मौतें सिर्फ ब्लास्ट की वजह से ही नहीं हुई थी, बल्कि भीषण आग, हानिकारक केमिकल और जहरीले रेडिएशन की वजह से भी कुछ लोग मारे गए थे. 

दरअसल परमाणु बम की सबसे खतरनाक बात यह है कि ब्लास्ट के बाद रेडियोएक्टिव पार्टिकल एनवायरमेंट में फैल जाते हैं और धरती के लोगों पर इनका असर लंबे समय तक देखने को मिलता है. परमाणु हमले की वजह से तेज गर्मी और रेडिएशन निकलता है. ये लोगों को लंबे समय तक प्रभावित करता है और ल्यूकेमिया, कैंसर समेत कई बीमारियों का कारण बनता है. जापान के हिरोशिमा और नागासाकी में इतने सालों के बाद आज भी परमाणु हमले का असर दिखता है. 

परमाणु विस्फोट

अब सवाल ये है कि क्या आप जानते हैं कि परमाणु हमला कितना खतरनाक होता है. परमाणु हमले की आवाज इतनी तेज होती है कि ये काफी दूर बैठे इंसान को भी प्रभावित करता है. इतना ही नहीं ये हमला जिस इलाके में होता है, उसके कई किलोमीटर दूर तक इसका असर दिखता है. वहीं आस-पास के सैंकड़ों किलोमीटर का आसमान काले धूएं से भर जाता है. इसका सबसे ज्यादा असर रिहायशी इलाकों पर होता है. वहीं परमाणु हमले का असर हमले के बाद भी सालों साल तक उस इलाके में देखने को मिलता है. यही कारण है कि दुनियाभर के सभी देश परमाणु हमले से सबसे ज्यादा डरते हैं और जिन देशों के पास ये परमाणु शक्ति है, वो भी इसका इस्तेमाल नहीं करते हैं. 

ये भी पढ़ें: इस देश में 96 फीसदी आबादी मुस्लिम, फिर भी दाढ़ी रखने और हिजाब पहनने पर बैन

गिरिजांश गोपालन को मीडिया इंडस्ट्री में चार साल से ज्यादा का अनुभव है. फिलहाल वह डिजिटल में सक्रिय हैं, लेकिन इनके पास प्रिंट मीडिया में भी काम करने का तजुर्बा है. दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद गिरिजांश ने नवभारत टाइम्स अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. उन्हें घूमना बेहद पसंद है. पहाड़ों पर चढ़ना, कैंपिंग-हाइकिंग करना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना उनकी हॉबी में शुमार है। यही कारण है कि वह तीन साल से पहाड़ों में ज्यादा वक्त बिता रहे हैं. अपने अनुभव और दुनियाभर की खूबसूरत जगहों को अपने लेखन-फोटो के जरिए सोशल मीडिया के रास्ते लोगों तक पहुंचाते हैं.
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